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प्रदेश के छह इको पर्यटन क्षेत्रों में शामिल हुआ सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग

Mon, 04 Sep 2017 05:19 PM IST
Updated Mon, 04 Sep 2017 05:19 PM IST
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प्रदेश के छह इको पर्यटन क्षेत्रों में शामिल हुआ सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग
महराजगंज। सूबे में इको पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने की योजना को लेकर पर्यटन विभाग और वनविभाग ने साझा पहल शुरू की है। इसके तहत प्रदेश में छह इको पर्यटन क्षेत्र विकसित किए जाने की योजना बनाई गई है, जिसमें जिले के सोहगीबरवा को भी शामिल किया गया है। सोहगीबरवां को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए एक्शन प्लान का काम वन विभाग ने शुरू कर दिया है लेकिन इस योजना को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी पर्यटन विभाग को सौंपी गई है।
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यह निर्णय पिछले सप्ताह लखनऊ में आयोजित वन व पर्यटन विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया है। शासन की मंशा है कि वर्ष 2018 के अंत तक सोहगीबरवां को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित कर दिया जाय, ताकि भगवान गौतम बुद्ध की जन्मस्थली और परिनिर्वाण स्थली को देखने आने वाले विदेशी पर्यटकों को प्रकृति के इस अद्भुत रंग को भी दिखाकर उन्हें आकर्षित किया जा सके। हर साल भगवान गौतम बुद्ध की परिनिर्वाण स्थली कुशीनगर आने वाले लाखों विदेशी पर्यटक जल्द ही यहां से नेपाल का रुख कर लेते हैं।
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बता दें कि पिछले महीने भी सोहगीबरवां को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए करीब चार करोड़ की एक परियोजना बनाई गई थी मगर उस पर ग्रहण लग गया। अब पर्यटन विभाग की पहल पर शुरू हुई इस नई परियोजना को लेकर विभाग सजग है।
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सोहगी बरवां जंगल को तीन जोन में बांट कर उसे सैलानियों के अनुकूल बनाने के क्रम में लक्ष्मीपुर रेंज के एकमा के परियोजना के केन्द्र में रखा गया है। इसके अलावा पकड़ी तथा डोमा को भी पर्यटन केंद्र बनाया जाएगा। व्यवस्था के मुताबिक एकमा, पकड़ी तथा डोमा पर्यटन क्षेत्र में जाने वाले सैलानियों को रहने खाने व घूमने की सुविधा दी जाएगी। रहने के लिए टेंट, घूमने के लिए वाहन तथा नारायणी के दोनों छोर के जंगलों में सैर के लिए मोटर बोट को सुविधा दी जाएगी। सैलानियों को खेसरहवा, सिगरहना, टेलफाल के आकर्षक नजारों के साथ घड़ियालों के घर दर्जीनिया ताल को भी देखने का मौका मिलेगा। यही नहीं वर्षों पहले बंद हुई ब्रिटिश हुकुमत में बनी ट्रांबे रेल परियोजना को भी पुन: चलाने का विचार किया जा रहा है। सबकुछ ठीक रहा तो सोहगीबरवा के एकमा से टेढ़ीघाट तक ट्रांबे रेल चलाई जा सकती है। इसके अलावा विभिन्न स्थानों का भ्रमण व निरीक्षण करने के लिए नेचर ट्रेल व निरीक्षण पथ भी बनेगा ताकि वन्य जीवों को देखते समय पर्यटन व वन्य जीव दोनों सुरक्षित रहें।

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सूबे में विकसित होने वाले छह इको पर्यटन क्षेत्रों में सोहगीबरवा को भी शामिल किया गया है। इसे तीन प्रमुख जोन में बांट कर विकसित करने के लिए एक सप्ताह में कार्य योजना तैयार कर शासन को सौंप दिया जाएगा। योजना को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी पर्यटन विभाग को दी गई है।
मनीष सिंह, डीएफओ, सोहगीबरवा, वन्य जीव प्रभाग
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