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Lok Sabha Election 2024: भाजपा के लिए रालोद से ज्यादा मुफीद है सुभासपा, बीजेपी के आंतरिक सर्वे से खुलासा
Thu, 01 Jun 2023 08:54 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 01 Jun 2023 08:54 AM IST
सार
लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर भाजपा ने आंतरिक सर्वे कराया है। इस सर्वे में खुलासा हुआ है कि सुभासपा से गठबंधन करने पर भाजपा को लोकसभा चुनाव में पांच से छह सीटों पर फायदा मिल सकता है। उधर, रालोद के प्रभाव वाली सीटों पर भाजपा ज्यादा मजबूत दिख रही है।
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Lok Sabha Election 2024
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा के लिए मिशन 80 को पूरा करने में राष्ट्रीय लोकदल से ज्यादा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी मुफीद है। भाजपा के आंतरिक सर्वे में सामने आया है कि रालोद के प्रभाव वाले पश्चिमी यूपी के क्षेत्रों में भाजपा पहले से मजबूत हैं। जबकि सुभासपा से गठबंधन करने पर भाजपा को पूर्वांचल में पांच से छह सीटों पर फायदा होगा। नतीजन भाजपा ने आगामी चुनाव में सुभासपा से गठबंधन करने के लिए कदम बढ़ाते हुए उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह को कमान सौंपी है।
लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर भाजपा नेतृत्व किसी भी तरह की गलतफहमी में नहीं हैं। नेतृत्व का मानना है कि यूपी में मुकाबला बहुत कड़ा होगा। सभी विपक्षी दल भाजपा को हराने के लिए एकजुट होंगे ऐसे में भाजपा के लिए अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए करो या मरो के सिद्धांत पर पूरी ताकत लगानी होगी।
पार्टी ने गठबंधन के मौजूदा साथी निषाद पार्टी और अपना दल (एस) से गठबंधन बरकरार रखने के साथ नए साथी की तलाश शुरू की है। पार्टी की प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया है कि रालोद का पश्चिमी यूपी के सहानरपुर, मुजफ्फरनगर, बागपत, आगरा, मथुरा, मेरठ, शामली, संभल, अमरोहा, बिजनौर, मुरादाबाद और हाथरस जिलों में प्रभाव है। इनमें से मुजफ्फरनगर, बागपत, आगरा, मथुरा, मेरठ सीटें भाजपा ने जीती हैं।
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वहीं 2019 में अमरोहा, सहारनपुर, नगीना, बिजनौर, रामपुर और संभल में यदि बसपा-सपा का गठबंधन नहीं होता तो भाजपा चुनाव जीत सकती थी। आगामी लोकसभा चुनाव में फिलहाल सपा और बसपा का गठबंधन होता नजर नहीं आ रहा है लिहाजा रालोद से गठबंधन करने का पार्टी को कोई फायदा नहीं होगा।
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लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर भाजपा नेतृत्व किसी भी तरह की गलतफहमी में नहीं हैं। नेतृत्व का मानना है कि यूपी में मुकाबला बहुत कड़ा होगा। सभी विपक्षी दल भाजपा को हराने के लिए एकजुट होंगे ऐसे में भाजपा के लिए अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए करो या मरो के सिद्धांत पर पूरी ताकत लगानी होगी।
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पार्टी ने गठबंधन के मौजूदा साथी निषाद पार्टी और अपना दल (एस) से गठबंधन बरकरार रखने के साथ नए साथी की तलाश शुरू की है। पार्टी की प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया है कि रालोद का पश्चिमी यूपी के सहानरपुर, मुजफ्फरनगर, बागपत, आगरा, मथुरा, मेरठ, शामली, संभल, अमरोहा, बिजनौर, मुरादाबाद और हाथरस जिलों में प्रभाव है। इनमें से मुजफ्फरनगर, बागपत, आगरा, मथुरा, मेरठ सीटें भाजपा ने जीती हैं।
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वहीं 2019 में अमरोहा, सहारनपुर, नगीना, बिजनौर, रामपुर और संभल में यदि बसपा-सपा का गठबंधन नहीं होता तो भाजपा चुनाव जीत सकती थी। आगामी लोकसभा चुनाव में फिलहाल सपा और बसपा का गठबंधन होता नजर नहीं आ रहा है लिहाजा रालोद से गठबंधन करने का पार्टी को कोई फायदा नहीं होगा।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी, केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, प्रदेश सरकार के मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी और राज्यमंत्री केपी मलिक भी जाट समाज से हैं। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव के नतीजे बताते हैं कि अधिकांश सीटों पर जाट समाज भाजपा के साथ भी रहा है।
वहीं पार्टी का मानना है कि रालोद से ज्यादा भाजपा के लिए सुभासपा मुफीद है। सुभासपा से गठबंधन करने पर भाजपा को पूर्वांचल की घोसी, गाजीपुर, जौनपुरी, लालगंज, श्रावस्ती और आजमगढ़ सीट पर फायदा होगा। इन लोकसभा सीटों पर राजभर समाज के मतदाताओं की बड़ी संख्या है। लोकसभा चुनाव 2019 और विधानसभा चुनाव 2022 में सुभासपा के अलग होने से भाजपा को इन क्षेत्रों में नुकसान झेलना पड़ा था।
सुभासपा और भाजपा के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत का दौर शुरू हो गया है। पार्टी ने सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के बेटे को किसी एक सीट से लोकसभा प्रत्याशी बनाने, ओमप्रकाश को प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाने सहित अन्य राजनीतिक फायदे देने का प्रस्ताव रखा है। भाजपा की ओर से उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह इस काम को अंजाम देने में जुटे हैं।
टूट सकते हैं बसपा के सांसद
भाजपा के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि आगामी दिनों में बसपा के कुछ सांसद हाथी की सवारी छोड़कर कमल थाम सकते हैं। कुछ बसपा सांसदों से भाजपा के नेताओं की बातचीत चल रही है।
भाजपा के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि आगामी दिनों में बसपा के कुछ सांसद हाथी की सवारी छोड़कर कमल थाम सकते हैं। कुछ बसपा सांसदों से भाजपा के नेताओं की बातचीत चल रही है।
भाजपा और सपा के बीच ही होगा मुकाबला
पार्टी सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव में भी अधिकांश सीटों पर भाजपा और सपा के बीच ही सीधा मुकाबला होगा। बसपा पश्चिमी यूपी और पूर्वांचल की चार से पांच सीटों पर मुख्य मुकाबले में रह सकती है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव में भी अधिकांश सीटों पर भाजपा और सपा के बीच ही सीधा मुकाबला होगा। बसपा पश्चिमी यूपी और पूर्वांचल की चार से पांच सीटों पर मुख्य मुकाबले में रह सकती है।
एआईएमआईएम का मिलेगा फायदा
नगरीय निकाय चुनाव के नतीजे बता रहे हैं कि निकाय चुनाव में मेरठ नगर निगम सहित कुछ नगरीय निकायों में एआईएमआईएम की मजबूत स्थिति से भाजपा को फायदा मिला है। लोकसभा चुनाव में भी मुस्लिम बहुल सीटों पर एआईएमआईएम के प्रत्याशी उतारने की स्थिति में भाजपा को फायदा मिल सकता है।
नगरीय निकाय चुनाव के नतीजे बता रहे हैं कि निकाय चुनाव में मेरठ नगर निगम सहित कुछ नगरीय निकायों में एआईएमआईएम की मजबूत स्थिति से भाजपा को फायदा मिला है। लोकसभा चुनाव में भी मुस्लिम बहुल सीटों पर एआईएमआईएम के प्रत्याशी उतारने की स्थिति में भाजपा को फायदा मिल सकता है।