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Lalitpur News: घरों-मंदिरों में पूजा, गूंजीं शहनाइयां
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। देवउठनी एकादशी पर मंगलवार देर शाम को मंदिरों व घरों में श्रद्धा व उत्साह के साथ पूजन किया गया। दीप जलाए गए। देव जागने के साथ ही विवाहघरों में शहनाइयां भी गूंजने लगीं। अब पूरे एक माह तक शुभ मुहूर्त में विवाह संपन्न होंगे।
मंगलवार को देवउठनी एकादशी का पर्व परंपरानुसार श्रद्धा व उत्साह से मनाया गया। मान्यता है कि भगवान विष्णु चार माह के शयन के बाद देवउठनी एकादशी पर जागते हैं, इसलिए इस दिन को देवउठनी एकादशी कहा जाता है।
इसी दिन से विवाह आदि शुभ काम शुरू हो जाते हैं। एकादशी पर मंदिरों व घरों में चौक बनाकर गन्नों का मंडप सजाया गया और मध्य में भगवान ठाकुरजी को विराजमान करके कलश स्थापित किया गया। मंडप के प्रत्येक गन्ने के नीचे दीपक जलाते हुए पूजन किया गया। सबसे पहले दही, दूध, शहद, गंगाजल, पंचमेवा से बने पंचामृत से ठाकुरजी, लड्डूगोपाल को स्नानादि कराने के बाद तिलक करते हुए छप्पन भोग लगाया गया। फिर आरती करते हुए मंडप की परिक्रमा कर शंख झालर के साथ जयकारे लगाए गए।
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इसके बाद दशहरा के दिन गाय के गोबर से बनी दशरइयों को जलाकर भगवान को ताप दिया गया। मोहल्ले के लोगों ने एक दूसरे को आमंत्रित किया, जिसमें सभी एक दूसरे के यहां पूजन करने पहुंचे। इसके बाद घर-घर दीप जलाए गए और पटाखे फोड़े गए। सीतापाठ धाम पर महिलाओं ने किया पूजन : कार्तिक माह की ग्यारस पर सुबह से ही सीतापाठ धाम पर महिलाओं ने पूजन अर्चन कर आशीर्वाद लिया। कार्तिक मास में महिलाएं तड़के घाटों पर स्नान करने जाती हैं। इसके बाद घाट पर राधाकृष्ण का पूजन करती हैं। मंगलवार को ग्यारस पर सीतापाठ धाम पर विशेष पूजन अर्चन किया गया।
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ललितपुर। देवउठनी एकादशी पर मंगलवार देर शाम को मंदिरों व घरों में श्रद्धा व उत्साह के साथ पूजन किया गया। दीप जलाए गए। देव जागने के साथ ही विवाहघरों में शहनाइयां भी गूंजने लगीं। अब पूरे एक माह तक शुभ मुहूर्त में विवाह संपन्न होंगे।
मंगलवार को देवउठनी एकादशी का पर्व परंपरानुसार श्रद्धा व उत्साह से मनाया गया। मान्यता है कि भगवान विष्णु चार माह के शयन के बाद देवउठनी एकादशी पर जागते हैं, इसलिए इस दिन को देवउठनी एकादशी कहा जाता है।
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इसी दिन से विवाह आदि शुभ काम शुरू हो जाते हैं। एकादशी पर मंदिरों व घरों में चौक बनाकर गन्नों का मंडप सजाया गया और मध्य में भगवान ठाकुरजी को विराजमान करके कलश स्थापित किया गया। मंडप के प्रत्येक गन्ने के नीचे दीपक जलाते हुए पूजन किया गया। सबसे पहले दही, दूध, शहद, गंगाजल, पंचमेवा से बने पंचामृत से ठाकुरजी, लड्डूगोपाल को स्नानादि कराने के बाद तिलक करते हुए छप्पन भोग लगाया गया। फिर आरती करते हुए मंडप की परिक्रमा कर शंख झालर के साथ जयकारे लगाए गए।
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इसके बाद दशहरा के दिन गाय के गोबर से बनी दशरइयों को जलाकर भगवान को ताप दिया गया। मोहल्ले के लोगों ने एक दूसरे को आमंत्रित किया, जिसमें सभी एक दूसरे के यहां पूजन करने पहुंचे। इसके बाद घर-घर दीप जलाए गए और पटाखे फोड़े गए। सीतापाठ धाम पर महिलाओं ने किया पूजन : कार्तिक माह की ग्यारस पर सुबह से ही सीतापाठ धाम पर महिलाओं ने पूजन अर्चन कर आशीर्वाद लिया। कार्तिक मास में महिलाएं तड़के घाटों पर स्नान करने जाती हैं। इसके बाद घाट पर राधाकृष्ण का पूजन करती हैं। मंगलवार को ग्यारस पर सीतापाठ धाम पर विशेष पूजन अर्चन किया गया।