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तीज पर दिन भर निर्जला व्रत के साथ किया देर रात्रि तक पूजन

Sat, 22 Aug 2020 12:45 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 22 Aug 2020 12:45 AM IST
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Women celebration hariyali teez festival in long night
हरितालिका तीज पर पूजा अर्चना करती महिलाएं - फोटो : LALITPUR
ललितपुर। शुक्रवार को हरतालिका तीज व्रत पर्व महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र की कामना के लिए बड़े ही उत्साह व श्रद्धा के साथ मनाया गया। कोरोना संक्रमण के चलते सभी ने घरों में ही झांकी सजाकर गौरी-शंकर का पूजन किया गया। बुंदेलखंड में पर्व को युवतियां व महिलाएं व्रत कर उत्साह के साथ मनाती हैं।
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हरतालिका तीज का यह पर्व भाद्र पद के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है, हरितालिका तीज पर महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर महिलाओं ने देर रात तक पूजन अर्चन किया और शंकर-पार्वती की बालू या मिट्टी की मूति बनाकर पूजन किया गया। घर साफ-सफाई कर आम व केर के पत्तों के तोरण-मंडप आदि से सजाया गया। कोविड-19 के चलते मंदिरों में पूर्व की भांति नहीं सजाई गईं। सभी ने अपने घर में तीज पर झांकियां सजाईं, महिलाओं ने पूजन अर्चन किया और भजन
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कीर्तन का दौर मध्य रात्रि के बाद तक चला। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने पार्वती को इस व्रत के बारे में विस्तार पूर्वक समझाया था। गौरा ने माता पार्वती के रुप में हिमालय के घर में जन्म लिया था। बचपन से ही पार्वती भगवान शिव को वर के रुप में पाना चाहती थीं और उसके लिए उन्होंने कठोर तप किया। तब नारद जी ने हिमालय को बताया कि पार्वती के कठोर तप से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु उनकी पुत्री से विवाह करना चाहते हैं। नारद मुनि की बात सुनकर महाराज
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हिमालय बहुत प्रसन्न हुए। उधर, भगवान विष्णु के सामने जाकर नारद मुनि बोले कि महाराज हिमालय अपनी पुत्री पार्वती से आपका विवाह करवाना चाहते हैं। भगवान विष्णु ने भी इसकी अनुमति दे दी। लेकिन जब माता पार्वती के पास जाकर नारदजी ने यह जानकारी तो यह सुनकर पार्वती बहुत निराश हुईं। वह अपनी सखियों के साथ घने सुनसान जंगल में स्थित एक गुफा चली गईं। यहीं रहकर उन्होंने भगवान शिव को पति रुप में पाने के लिए कठोर तप शुरु किया था, जिसके लिए उन्होंने रेत के शिवलिंग की स्थापना की। संयोग से हस्त नक्षत्र में भाद्रपद शुक्ल तृतीया का वह दिन था जब माता पार्वती ने शिवलिंग की स्थापना की और निर्जला उपवास रखते हुए उन्होंने रात्रि में जागरण भी किया। तब भगवान शिव ने प्रसन्न होकर माता पार्वती जी को मनोकामना पूर्ण होने का वरदान दिया। तब से ही तीज व्रत रखने की परंपरा मानी जाती है।
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