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मंडियों से पहुंच रहा खरीद केंद्रों पर गेंहूं
lalitpur
Updated Tue, 26 Apr 2016 12:39 AM IST
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अनाज
- फोटो : demo pic
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ललितपुर। भारतीय खाद्य निगम द्वारा विभिन्न सरकारी समितियों के माध्यम से होने वाली गेहूं खरीद के लिए बनाए खरीद केंद्रों पर किसानों तो नहीं पहुंच रहा है, लेकिन सरकारी समितियों द्वारा गल्ला मंडियों से गेहूं लादकर सरकारी गोदामों पर पहुंचाकर कोटा पूरा करने की कोशिश की जा रही है। ताकि, शासन द्वारा दिए गए लक्ष्य के करीब पहुंचा जा सके।
भारतीय खाद्य निगम द्वारा जनपद में विभिन्न सरकारी समितियों के माध्यम से गेहूूं खरीद के लिए अलग-अलग स्थानों पर 98 खरीद केंद्र बनाए गए हैं। एक अप्रैल से शुरू हुई गेहूं खरीद का इस बार एफसीआई के लिए 55 हजार क्विंटल खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि अब तक कुल 8,300 क्विंटल गेहूं की खरीद की जा सकी है। किसान सरकारी खरीद केंद्रों पर नहीं पहुंचकर सीधे गल्ला मंडियों में गेहूं की बिक्री कर रहा है। गल्ला मंडियों में गेहूं खरीद 1,600 से लेकर 2,200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं बिक रहा है, जबकि खरीद केंद्रों पर गेहूं खरीद के लिए 1,525 रुपये प्रति क्विंटल दर निर्धारित की गई है। ऐसे में किसान खरीद केंद्रों की जगह गल्ला मंडियों में गेहूं ले जा रहे हैं।
उधर, खरीद केंद्रों पर किसान तो नहीं पहुंच रहा है, लेकिन सरकारी समितियों द्वारा लक्ष्य के करीब पहुंचने के लिए गल्ला मंडियों से खरीद की जा रही है। सूत्रों के अनुसार गुपचुप दलालों के माध्यम से गेहूं खरीदा जा रहा है। यहां से सरकारी गोदामों और बेयर हाउस कर्मियों को गेहूं सौंपा जा रहा है।
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हालांकि, एफसीआई अधिकारियों द्वारा किसानों के अलावा गल्ला मंडियों से या अन्य तंत्रों के माध्यम से गेहूं खरीद से इंकार किया जा रहा है, जबकि खरीद केंद्रों पर किसान के नहीं पहुंचने की बात स्वीकारी जा रही है। ऐसे में खरीद केंद्रों पर भले ही गेहूं खरीद नहीं हो रही हो, लेकिन गेहूं गोदामों तक पहुंच रहा है। यदि किसान खरीद केंद्र तक पहुंच भी जाता है तो इन केंद्रों पर किसान के गेहूं को घटिया बताकर रिजेक्ट कर दिया जाता है। जबकि, गल्ला मंडियों से ट्रकों के माध्यम से गेहूं सरकारी गोदामों पर पहुंच रहा है। ऐसे में गेहूं खरीद का लाभ किसानों को पहुंचे या न पहुंचे, लेकिन गेहूं क्रय केंद्र संचालकों की मौज ही मौज है।
कैसे मिल रहा सस्ता गेहूं?
किसान गल्ला मंडी में सरकारी दरों से अधिक दामों पर गेहूं बेच रहा है, जबकि सरकारी खरीद केंद्र पर खरीदी बहुत कम हो रही है। सूत्रों के अनुसार सरकारी खरीदार लक्ष्य पूरा करना चाहते हैं, जिस कारण वह आढ़तियों से संपर्क कर रहे हैं और पहले का खरीदा गेहूं अथवा सस्ती दरों पर स्टाक किया गेहूं ले रहे हैं।
किसान खरीद केंद्रों पर नहीं पहुंच रहा है, जिससे लक्ष्य की पूर्ति करना मुश्किल हो रहा है। गल्ला मंडियों से गेहूं खरीद नहीं की जा रही है। किसानों द्वारा गल्ला मंडियों में लाया गेहूं एफसीआई से अधिक दामों में बिक रहा है। यहां गेहूं व्यापारियों से कम दामों में खरीदना मुश्किल है।
- संजय श्रीवास्तव, डिप्टी आरएमओ, ललितपुर।
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भारतीय खाद्य निगम द्वारा जनपद में विभिन्न सरकारी समितियों के माध्यम से गेहूूं खरीद के लिए अलग-अलग स्थानों पर 98 खरीद केंद्र बनाए गए हैं। एक अप्रैल से शुरू हुई गेहूं खरीद का इस बार एफसीआई के लिए 55 हजार क्विंटल खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि अब तक कुल 8,300 क्विंटल गेहूं की खरीद की जा सकी है। किसान सरकारी खरीद केंद्रों पर नहीं पहुंचकर सीधे गल्ला मंडियों में गेहूं की बिक्री कर रहा है। गल्ला मंडियों में गेहूं खरीद 1,600 से लेकर 2,200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं बिक रहा है, जबकि खरीद केंद्रों पर गेहूं खरीद के लिए 1,525 रुपये प्रति क्विंटल दर निर्धारित की गई है। ऐसे में किसान खरीद केंद्रों की जगह गल्ला मंडियों में गेहूं ले जा रहे हैं।
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उधर, खरीद केंद्रों पर किसान तो नहीं पहुंच रहा है, लेकिन सरकारी समितियों द्वारा लक्ष्य के करीब पहुंचने के लिए गल्ला मंडियों से खरीद की जा रही है। सूत्रों के अनुसार गुपचुप दलालों के माध्यम से गेहूं खरीदा जा रहा है। यहां से सरकारी गोदामों और बेयर हाउस कर्मियों को गेहूं सौंपा जा रहा है।
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हालांकि, एफसीआई अधिकारियों द्वारा किसानों के अलावा गल्ला मंडियों से या अन्य तंत्रों के माध्यम से गेहूं खरीद से इंकार किया जा रहा है, जबकि खरीद केंद्रों पर किसान के नहीं पहुंचने की बात स्वीकारी जा रही है। ऐसे में खरीद केंद्रों पर भले ही गेहूं खरीद नहीं हो रही हो, लेकिन गेहूं गोदामों तक पहुंच रहा है। यदि किसान खरीद केंद्र तक पहुंच भी जाता है तो इन केंद्रों पर किसान के गेहूं को घटिया बताकर रिजेक्ट कर दिया जाता है। जबकि, गल्ला मंडियों से ट्रकों के माध्यम से गेहूं सरकारी गोदामों पर पहुंच रहा है। ऐसे में गेहूं खरीद का लाभ किसानों को पहुंचे या न पहुंचे, लेकिन गेहूं क्रय केंद्र संचालकों की मौज ही मौज है।
कैसे मिल रहा सस्ता गेहूं?
किसान गल्ला मंडी में सरकारी दरों से अधिक दामों पर गेहूं बेच रहा है, जबकि सरकारी खरीद केंद्र पर खरीदी बहुत कम हो रही है। सूत्रों के अनुसार सरकारी खरीदार लक्ष्य पूरा करना चाहते हैं, जिस कारण वह आढ़तियों से संपर्क कर रहे हैं और पहले का खरीदा गेहूं अथवा सस्ती दरों पर स्टाक किया गेहूं ले रहे हैं।
किसान खरीद केंद्रों पर नहीं पहुंच रहा है, जिससे लक्ष्य की पूर्ति करना मुश्किल हो रहा है। गल्ला मंडियों से गेहूं खरीद नहीं की जा रही है। किसानों द्वारा गल्ला मंडियों में लाया गेहूं एफसीआई से अधिक दामों में बिक रहा है। यहां गेहूं व्यापारियों से कम दामों में खरीदना मुश्किल है।
- संजय श्रीवास्तव, डिप्टी आरएमओ, ललितपुर।