फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   west material

जज्बा: कबाड़ बीनकर बेटियों को पढ़ा रही बेसहारा

Thu, 01 Jun 2017 12:57 AM IST
lalitpur
lalitpur Updated Thu, 01 Jun 2017 12:57 AM IST
विज्ञापन
west material
प‌र‌िवार - फोटो : amar ujala
विकासखंड बिरधा के ग्राम रीछपुरा की एक बेसहारा महिला अपनी दो बेटियों को कबाड़ बीनकर पढ़ा़ रही है। उसके पति ने कुछ माह पहले दूसरी शादी कर उसे घर से निकाल दिया। वह न्याय की उम्मीद लेकर अफसरों की चौखट पर गई, लेकिन उसकी फरियाद नहीं सुनी गई। वह सिविल लाइंस इलाके में जीआईसी के सामने एक टीन की दुकान में रहकर गुजारा करने को मजबूर है। उसे भरोसा है कि एक न एक दिन उसे न्याय जरूर मिलेगा।
विज्ञापन


नगर के निकवटर्ती ग्राम रोड़ा में दलित परिवार में जन्मी मीरा की शादी करीब पंद्रह साल पूर्व ब्लाक बिरधा के ग्राम रीछपुरा में रहने वाले सुनील से हुई थी। सालों तक दांपत्य जीवन में सबकुछ ठीकठाक चलता रहा। इस दौरान उसने एक बेटा और तीन बेटियों को जन्म दिया। बीते वर्ष पति ने महिला को मारपीट कर घर से निकाल दिया और दूसरी महिला से शादी कर ली। इस बीच रिश्तेदारों ने भी मुंह मोड़ लिया। मीरा ने बताया कि पति ने बड़े बेटे को अपने साथ रख लिया है, लेकिन तीनों छोटी बेटियों को उसके हवाले कर दिया है। पति ने सारे दस्तावेज भी अपने पास रख लिए। घर से निकाले जाने के बाद वह अधिकारियों के पास न्याय की गुहार लेकर पहुंची, लेकिन कहीं से भी उसे न्याय नहीं मिला। इस बीच चार महीने तक वह नदीपुरा मुहल्ले में किराए पर रही। लेकिन, कुछ महीनों में ही किराया चुकाना मुश्किल हो गया। तो उसे वह मकान छोड़ना पड़ा।
विज्ञापन


मीरा ने बताया कि बेटियों को पढ़ाने और पेट भरने के लिए सब्जी मंडी में फल बेचना शुरू किया। लेकिन, घाटा हुआ। इसके बाद कबाड़ बीनना शुरू किया। टीन से बनी दुकान में तीनों बेटियों के साथ रहती हूं। बेटियों को पढ़ाने के लिए सिविल लाइन के परिषदीय स्कूल में एडमिशन कराया। दस वर्षीय बड़ी बेटी राजकुमारी कक्षा चार में है, जबकि दूसरी बेटी द्रोपदी कक्षा तीन में पढ़ रही है। चार वर्षीय तीसरी बेटी मीना को भी वह पढ़ाना चाहती है, लेकिन मजबूरियां आड़े आ रही हैं। उसने बताया कि पति के उत्पीड़न की शिकायत कई बार पुलिस और अधिकारियों से की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। तहसील दिवस में भी कई बार शिकायत की आवास के लिए भी आवेदन किया, लेकिन हुआ कुछ नहीं। उसके पास दस्तावेज के नाम पर कुछ भी नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मदद की गुहार
बेसहारा महिला और उसकी तीनों बेटियों का भविष्य सुधारने के लिए उसने लोगों से मदद की गुहार लगाई है। वर्तमान में उसे किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के लिए अभी तक कोई आगे नहीं आया है।      


हर संभव मदद की जाएगी    
निर्धन एवं बेसहारा लोगों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित हो रही हैं। इनका लाभ दिलाने के लिए मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में लाया जाएगा। पीड़ित महिला की हर संभव मदद की जाएगी।
- प्रदीप चौबे, सांसद प्रतिनिधि ललितपुर।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed