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Lalitpur News: देवगढ़ में हेलीपोर्ट बनने का रास्ता साफ, प्रशासन ने पर्यटन विभाग को दी जमीन
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। पर्यटन विभाग देवगढ़ में हेलीपोर्ट बनाने जा रहा है। इसके लिए पांच एकड़ भूमि का चयन पहले ही कर लिया गया था। अब जिला प्रशासन ने यह भूमि पर्यटन विभाग के सुपुर्द कर दी है।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए देवगढ़ क्षेत्र में हेलीपोर्ट का निर्माण तो होगा ही, यात्रियों की सुविधाओं के अन्य कार्य भी किए जाएंगे। यहां पुरातत्व विभाग के रेस्ट हाउस को पीपीपी मॉडल पर तैयार किया जा रहा है। पाथवे और जंगली इलाकों के मार्गों को भी विकसित किया जाएगा। यहां कई प्राचीन मंदिर हैं, जिसमें दशावतार व जैन मंदिर शामिल हैं। प्रतिवर्ष यहां हजारों लोग आते हैं। लेकिन, पर्यटन सुविधाएं न मिलने से वे यहां ठहरते नहीं थे। अब हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए हेलीपोर्ट का निर्माण कराया जा रहा है। उपजिलाधिकारी सदर चंद्रभूषण प्रताप सिंह ने बताया कि जमीन पर्यटन विभाग को सुपुर्द कर दी गई है। निर्माण कराने की जिम्मेदारी पर्यटन विभाग की है, वह अपनी सुविधानुसार कार्य करा सकता है।
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देवगढ़ में ये हैं दार्शनिक स्थल
देवगढ़ जनपद मुख्यालय से 33 किलोमीटर दूर बेतवा नदी के किनारे एक ऊंची पहाड़ी त्रिधर्म का केंद्र है। यहां प्राचीन दशावतार मंदिर, महावीर स्वामी, वन्य जीव अभयारण, बौद्ध गुफाएं हैं। यह जैन एवं वैष्णव संप्रदाय की मूर्ति कला का केंद्र रहा है। 41 जैन मंदिर और 18 मानस्तंभ भी यहां हैं। तीन घाटियों में सिद्ध घाटी, राजघाटी व नारघाटी में गुप्तकालीन कला के दर्शन होते हैं। यहां सातवीं सदी का वराह मंदिर, कीर्तिगिरी दुर्ग के अवशेष भी दर्शनीय हैं। इसके अआवा कुंज द्वार, हाथी दरवाजा, पत्थर की एक बावड़ी, शिवमंदिर, दुर्गा मंदिर, सती स्तंभ आदि मौजूद हैं।
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ललितपुर। पर्यटन विभाग देवगढ़ में हेलीपोर्ट बनाने जा रहा है। इसके लिए पांच एकड़ भूमि का चयन पहले ही कर लिया गया था। अब जिला प्रशासन ने यह भूमि पर्यटन विभाग के सुपुर्द कर दी है।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए देवगढ़ क्षेत्र में हेलीपोर्ट का निर्माण तो होगा ही, यात्रियों की सुविधाओं के अन्य कार्य भी किए जाएंगे। यहां पुरातत्व विभाग के रेस्ट हाउस को पीपीपी मॉडल पर तैयार किया जा रहा है। पाथवे और जंगली इलाकों के मार्गों को भी विकसित किया जाएगा। यहां कई प्राचीन मंदिर हैं, जिसमें दशावतार व जैन मंदिर शामिल हैं। प्रतिवर्ष यहां हजारों लोग आते हैं। लेकिन, पर्यटन सुविधाएं न मिलने से वे यहां ठहरते नहीं थे। अब हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए हेलीपोर्ट का निर्माण कराया जा रहा है। उपजिलाधिकारी सदर चंद्रभूषण प्रताप सिंह ने बताया कि जमीन पर्यटन विभाग को सुपुर्द कर दी गई है। निर्माण कराने की जिम्मेदारी पर्यटन विभाग की है, वह अपनी सुविधानुसार कार्य करा सकता है।
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देवगढ़ में ये हैं दार्शनिक स्थल
देवगढ़ जनपद मुख्यालय से 33 किलोमीटर दूर बेतवा नदी के किनारे एक ऊंची पहाड़ी त्रिधर्म का केंद्र है। यहां प्राचीन दशावतार मंदिर, महावीर स्वामी, वन्य जीव अभयारण, बौद्ध गुफाएं हैं। यह जैन एवं वैष्णव संप्रदाय की मूर्ति कला का केंद्र रहा है। 41 जैन मंदिर और 18 मानस्तंभ भी यहां हैं। तीन घाटियों में सिद्ध घाटी, राजघाटी व नारघाटी में गुप्तकालीन कला के दर्शन होते हैं। यहां सातवीं सदी का वराह मंदिर, कीर्तिगिरी दुर्ग के अवशेष भी दर्शनीय हैं। इसके अआवा कुंज द्वार, हाथी दरवाजा, पत्थर की एक बावड़ी, शिवमंदिर, दुर्गा मंदिर, सती स्तंभ आदि मौजूद हैं।
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