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Lalitpur News: बांधों से जुड़ने वाली नदियों में वर्षभर बहेगा पानी
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जामनी, रोहिणी, सजनाम बांधों में मिलने वाली नदियों से जुड़ने वाले विलुप्त नालों को पुनर्जीवित किया जाएगा। इसके लिए सिंचाई विभाग ड्रेन सर्वे करवा रहा है। करीब दो सौ से अधिक नालाें के सर्वे की तैयारी है। इन नालों के पुनर्जीवित होने से नदियों में वर्ष भर पानी रहेगा।
जिले को बांधों का जनपद कहा जाता है। यहां चौदह बांध परियोजनाएं हैं, जोकि विभिन्न नदियों पर निर्मित हैं। इन बांधों से यहां के लोगों को सिंचाई, पेयजल और वाणिज्य उपयोग के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है। प्रमुख नदियों में बेतवा, रोहिणी, शहजाद, जामनी, सजनाम, उटारी, सौंर, घुंसी, अमझिर, पाली, ओडी, बानई हैं और विभिन्न क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं। इन नदियों से कई नाले जुड़े हैं, लेकिन गुजरते दिनों के साथ इनकी यह हालत हो चुकी कि या तो ये विलुप्त हो गए या फिर सिर्फ बरसाती नाले बन गए।
अब सिंचाई विभाग जामनी, रोहिणी, सजनाम बांधों में मिलने वाली नदियों के विलुप्त या क्षमता विहीन हो चुके नालों को पुनर्जीवित करेगा। विभिन्न क्षेत्रों में स्थित करीब नौ सौ किलोमीटर लंबाई के नालों का ड्रेन सर्वे कराने के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। नालों के पुनर्जीवित होने से इनसे जुड़ी नदियों में वर्ष भर पानी रहेगा। इससे नदियों पर बने बांधों के जलस्तर में बढ़ोतरी तो होगी ही, जल संरक्षण भी होगा। इसका लाभ किसानों को भी मिलेगा।
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फैक्ट फाइल
- जिले में 415 ग्राम पंचायतें
- 14 बांध परियोजनाएं
- करीब 2.64 लाख किसान
- करीब 3.15 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि
- करीब 2.85 लाख हेक्टेयर सिंचित भूमि
- करीब 1.80 लाख हेक्टेयर भूमि नहरों से सिंचित
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बांधों में मिलने वाली नदियों से जुड़े विलुप्त नालों को पुनर्जीवित करने के लिए ड्रेन सर्वे कराया जाएगा। कार्ययोजना तैयार की जा रही है। आचार संहिता समाप्त होने के बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी।
इं. सलमान खान, सहायक अभियंता सिंचाई खंड
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ललितपुर। जामनी, रोहिणी, सजनाम बांधों में मिलने वाली नदियों से जुड़ने वाले विलुप्त नालों को पुनर्जीवित किया जाएगा। इसके लिए सिंचाई विभाग ड्रेन सर्वे करवा रहा है। करीब दो सौ से अधिक नालाें के सर्वे की तैयारी है। इन नालों के पुनर्जीवित होने से नदियों में वर्ष भर पानी रहेगा।
जिले को बांधों का जनपद कहा जाता है। यहां चौदह बांध परियोजनाएं हैं, जोकि विभिन्न नदियों पर निर्मित हैं। इन बांधों से यहां के लोगों को सिंचाई, पेयजल और वाणिज्य उपयोग के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है। प्रमुख नदियों में बेतवा, रोहिणी, शहजाद, जामनी, सजनाम, उटारी, सौंर, घुंसी, अमझिर, पाली, ओडी, बानई हैं और विभिन्न क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं। इन नदियों से कई नाले जुड़े हैं, लेकिन गुजरते दिनों के साथ इनकी यह हालत हो चुकी कि या तो ये विलुप्त हो गए या फिर सिर्फ बरसाती नाले बन गए।
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अब सिंचाई विभाग जामनी, रोहिणी, सजनाम बांधों में मिलने वाली नदियों के विलुप्त या क्षमता विहीन हो चुके नालों को पुनर्जीवित करेगा। विभिन्न क्षेत्रों में स्थित करीब नौ सौ किलोमीटर लंबाई के नालों का ड्रेन सर्वे कराने के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। नालों के पुनर्जीवित होने से इनसे जुड़ी नदियों में वर्ष भर पानी रहेगा। इससे नदियों पर बने बांधों के जलस्तर में बढ़ोतरी तो होगी ही, जल संरक्षण भी होगा। इसका लाभ किसानों को भी मिलेगा।
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फैक्ट फाइल
- जिले में 415 ग्राम पंचायतें
- 14 बांध परियोजनाएं
- करीब 2.64 लाख किसान
- करीब 3.15 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि
- करीब 2.85 लाख हेक्टेयर सिंचित भूमि
- करीब 1.80 लाख हेक्टेयर भूमि नहरों से सिंचित
बांधों में मिलने वाली नदियों से जुड़े विलुप्त नालों को पुनर्जीवित करने के लिए ड्रेन सर्वे कराया जाएगा। कार्ययोजना तैयार की जा रही है। आचार संहिता समाप्त होने के बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी।
इं. सलमान खान, सहायक अभियंता सिंचाई खंड