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अप्रैल के बाद गहरा सकता है पेयजल संकट!
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Tue, 20 Oct 2015 01:33 AM IST
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ललितपुर। नगर में अप्रैल के बाद पेयजल संकट हो सकता है। बारिश कम होने के
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कारण गोविंद सागर बांध में मात्र 22 प्रतिशत उपयोगी जल है। जो अप्रैल के
अंत तक खत्म हो सकता है। ऐसी स्थिति में नगर के लोगों को बूंद-बूंद पानी के
लिए तरसना पड़ सकता है।
दो लाख से अधिक आबादी वाले नगर में 28 हजार से अधिक भवन बने हुए हैं। इन भवनों के सापेक्ष मात्र 10 हजार ऐसे उपभोक्ता हैं, जो जल संस्थान से संयोजन लिए हुए हैं। शहर के निवासियों को पेयजल की आपूर्ति गोविंद सागर बांध से की जाती है। गोविंद सागर बांध से आने वाले कच्चे पानी को डोंड़ा घाट में बने 31 एमएलडी पानी के शोधित प्लांट और नझाई बाजार में बने दो एमएलडी पानी के शोधित प्लांट से पानी साफ करने के बाद मोटरों की सहायता से टंकियां भरी जाती हैं। इन टंकियों से नगर के उपभोक्ताओं तक पानी पहुंचाया जाता है। नगर में प्रतिदिन 33 एमएलडी पानी की खपत होती है।
वर्तमान में गोविंद सागर बांध में 37 प्रतिशत पानी मौजूद है, इसमें भी करीब 15 प्रतिशत ऐसा पानी है, जिसका उपयोग पेयजल के लिए नहीं किया जा सकता है। ऐसे में मात्र 22 प्रतिशत पानी पीने योग्य है। सिंचाई विभाग के अफसरों की मानें तो अप्रैल तक पानी पेयजल के लिए पर्याप्त है, जबकि जल संस्थान के जिम्मेदारों का कहना है कि यह पानी अप्रैल से पहले भी खत्म हो सकता।
कारण, बांध में जो भराव दिख रहा है, उसमें अधिकांश सिल्ट मौजूद है। ऐसी स्थिति में नगरवासियों को अप्रैल के बाद पानी के लिए दो-चार होना पड़ सकता है। हालांकि, इस समस्या से निपटने के लिए अफसर बेतवा रिबर बोर्ड से पत्राचार करके जाखलौन पंप केनाल के माध्यम से बांध को भरने की बात कह रहे हैं, लेकिन यदि समय से काम नहीं हो पाया तो इसका खामियाजा नगरवासियों को भुगतना पड़ सकता है।
ग्रेनाइट खदान के पानी की ले सकते मदद
ग्राम बुढ़वार रोड स्थित ग्रेनाइट खदानों में बड़ी मात्रा में पानी भरा हुआ है। इन खदानों में काफी साफ पानी है और यह शहर के नजदीक भी हैं। खदानों में काम बंद है। ऐसे में यदि यहां से पाइप लाइन डालकर पानी की आपूर्ति की जाए तो कम से कम नेहरू नगर के लोगों को पेयजल आपूर्ति आसानी से गर्मियों भर के लिए की जा सकती है।
वर्तमान में कुल भराव के सापेक्ष गोविंद सागर बांध में केवल 37 प्रतिशत ही पानी है। बांध की तलहटी में खेती होने से पानी की और कमी भी हो सकती है। यह पानी अप्रैल के आसपास तक खत्म हो जाएगा। नगर की पेयजल व्यवस्था को देखते हुए डीएम ने नहर नहीं चलाने के निर्देश दिए हैं। शीत ऋतु के दौरान बारिश नहीं होने की स्थिति में बेतवा रिवर बोर्ड को पत्र लिखकर बांध भरने का काम किया जाएगा।
- इंजी. आनंद स्वरूप अरजरिया
सहायक अभियंता गोविंद सागर बांध।
गोविंद सागर बांध में भराव के जो आंकड़े दिए जा रहे हैं, वह बहुत पुराने हैं। वर्षों से बांध की सिल्ट नहीं निकाली गई है। इससे बांध की तलहटी में पानी नहीं, बल्कि सिल्ट मौजूद है। वर्तमान में शहर के लिए 31 एमएलडी पानी की प्रतिदिन जरूरत है।
- इंजी. वीके श्रीवास्तव
सहायक अभियंता, जल संस्थान
दो लाख से अधिक आबादी वाले नगर में 28 हजार से अधिक भवन बने हुए हैं। इन भवनों के सापेक्ष मात्र 10 हजार ऐसे उपभोक्ता हैं, जो जल संस्थान से संयोजन लिए हुए हैं। शहर के निवासियों को पेयजल की आपूर्ति गोविंद सागर बांध से की जाती है। गोविंद सागर बांध से आने वाले कच्चे पानी को डोंड़ा घाट में बने 31 एमएलडी पानी के शोधित प्लांट और नझाई बाजार में बने दो एमएलडी पानी के शोधित प्लांट से पानी साफ करने के बाद मोटरों की सहायता से टंकियां भरी जाती हैं। इन टंकियों से नगर के उपभोक्ताओं तक पानी पहुंचाया जाता है। नगर में प्रतिदिन 33 एमएलडी पानी की खपत होती है।
वर्तमान में गोविंद सागर बांध में 37 प्रतिशत पानी मौजूद है, इसमें भी करीब 15 प्रतिशत ऐसा पानी है, जिसका उपयोग पेयजल के लिए नहीं किया जा सकता है। ऐसे में मात्र 22 प्रतिशत पानी पीने योग्य है। सिंचाई विभाग के अफसरों की मानें तो अप्रैल तक पानी पेयजल के लिए पर्याप्त है, जबकि जल संस्थान के जिम्मेदारों का कहना है कि यह पानी अप्रैल से पहले भी खत्म हो सकता।
कारण, बांध में जो भराव दिख रहा है, उसमें अधिकांश सिल्ट मौजूद है। ऐसी स्थिति में नगरवासियों को अप्रैल के बाद पानी के लिए दो-चार होना पड़ सकता है। हालांकि, इस समस्या से निपटने के लिए अफसर बेतवा रिबर बोर्ड से पत्राचार करके जाखलौन पंप केनाल के माध्यम से बांध को भरने की बात कह रहे हैं, लेकिन यदि समय से काम नहीं हो पाया तो इसका खामियाजा नगरवासियों को भुगतना पड़ सकता है।
ग्रेनाइट खदान के पानी की ले सकते मदद
ग्राम बुढ़वार रोड स्थित ग्रेनाइट खदानों में बड़ी मात्रा में पानी भरा हुआ है। इन खदानों में काफी साफ पानी है और यह शहर के नजदीक भी हैं। खदानों में काम बंद है। ऐसे में यदि यहां से पाइप लाइन डालकर पानी की आपूर्ति की जाए तो कम से कम नेहरू नगर के लोगों को पेयजल आपूर्ति आसानी से गर्मियों भर के लिए की जा सकती है।
वर्तमान में कुल भराव के सापेक्ष गोविंद सागर बांध में केवल 37 प्रतिशत ही पानी है। बांध की तलहटी में खेती होने से पानी की और कमी भी हो सकती है। यह पानी अप्रैल के आसपास तक खत्म हो जाएगा। नगर की पेयजल व्यवस्था को देखते हुए डीएम ने नहर नहीं चलाने के निर्देश दिए हैं। शीत ऋतु के दौरान बारिश नहीं होने की स्थिति में बेतवा रिवर बोर्ड को पत्र लिखकर बांध भरने का काम किया जाएगा।
- इंजी. आनंद स्वरूप अरजरिया
सहायक अभियंता गोविंद सागर बांध।
गोविंद सागर बांध में भराव के जो आंकड़े दिए जा रहे हैं, वह बहुत पुराने हैं। वर्षों से बांध की सिल्ट नहीं निकाली गई है। इससे बांध की तलहटी में पानी नहीं, बल्कि सिल्ट मौजूद है। वर्तमान में शहर के लिए 31 एमएलडी पानी की प्रतिदिन जरूरत है।
- इंजी. वीके श्रीवास्तव
सहायक अभियंता, जल संस्थान