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धौर्रा समेत कई पठारी गांवों में पेयजल का भीषण संकट
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ैंकर से पानी भरते बच्चे व महिलाएं
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। ब्लाक बिरधा अंतर्गत ग्राम धौर्रा स्थित पिपराबांसा पेयजल योजना ग्रामीणों की प्यास बुझाने में नाकाम साबित हो रही है। इसकी मोटरों में आई खराबी से करीब एक माह से जलापूर्ति बाधित बनी हुई है। इससे आसपास के 11 गांवों में पेयजल का भीषण संकट उत्पन्न हो गया है।
वर्षों पहले पिपराबांसा पेयजल योजना की शुरुआत की गई थी। इस परियोजना से आधा सैकड़ा से अधिक गांवों को जोड़ा गया था, लेकिन मौजूदा दौर में इसकी आपूर्ति 11 गांव तक सिमटकर रह गई है। इनमें प्रमुख रूप से ग्राम धौर्रा, धौजरी, अमऊखेड़ा, जहाजपुर, पिपरई, कपासी आदि शामिल हैं। करीब एक माह से इस योजना की जलापूर्ति बाधित बनी हुई है। पठारी क्षेत्र होने के कारण यहां का भूगर्भ जलस्तर निरंतर गिर रहा है। इससे हैंडपंपों ने पानी छोड़ना आरंभ कर दिया है।
कई हैंडपंप पानी की जगह हवा निकाल रहे हैं। हालात यह हो गए हैं कि लोगों को आधा से एक किलोमीटर दूरी से पानी जुटाना पड़ रहा है। ग्राम धौर्रा और पिपरई क्षेत्र में पानी की विकराल समस्या उत्पन्न हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि रणछोड़जी से धौर्रा के रास्ते में पानी सप्लाई नहीं होने से कई जंगली जानवर बिलबिला उठे हैं। कई प्यास से मर रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर शीघ्र ही पिपराबांसा पेयजल योजना को सुचारु रूप से चालू कराने की मांग की है।
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पानी की समस्या के कारण गांव में लॉकडाउन का पालन संभव नहीं हो रहा है। जिला प्रशासन को यहां की पेयजल समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस भीषण गर्मी में लोगों को दूर-दूर से पानी जुटाना पड़ रहा है।
- आनंद प्रजापति, एडवोकेट
गांव में पानी के टैंकर से जलापूर्ति की जा रही है लेकिन, टैंकर पर भीड़ देखते ही बनती है। कई तो टैंकर के ऊपर भी चढ़ जाते हैं। हर कोई टैंकर से पानी भरना चाहता है। लोगों का लगता है कि यदि टैंकर से पानी नहीं मिला तो काफी दूर से पानी भरना पड़ेगा। ऐसे में सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं हो पा रहा है।
- रामबाबू नायक
पठारी क्षेत्र होने के कारण कुआं व हैंडपंपों का पानी धरती की कोख में पहुंचने लगता है, जिससे पेयजल की गंभीर स्थिति बन जाती है। ऐसे में पिपराबांसा परियोजना का सहारा रहता है, लेकिन इस बार उसने भी धोखा दे दिया है।
- पूरन सिंह प्रजापति
पिपराबांसा परियोजना की उचित देखरेख नहीं की जा रही है। इस वजह से आए दिन जलापूर्ति बाधित हो जाती है। विभागीय अफसर भी यहां की कमियों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका खामियाजा स्थानीय लोगों को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है।
- प्रभुदयाल कुशवाहा
पिपराबांसा परियोजना से 11 गांव में जलापूर्ति की जाती है। यहां की मोटर खराब हो गई थी, जिसे ठीक करा लिया गया है। इसके अलावा वोल्टेज की समस्या को भी दूर किया गया है। अब लोगों को पानी मिलने लगेगा।
- संजीव कुमार, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान
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वर्षों पहले पिपराबांसा पेयजल योजना की शुरुआत की गई थी। इस परियोजना से आधा सैकड़ा से अधिक गांवों को जोड़ा गया था, लेकिन मौजूदा दौर में इसकी आपूर्ति 11 गांव तक सिमटकर रह गई है। इनमें प्रमुख रूप से ग्राम धौर्रा, धौजरी, अमऊखेड़ा, जहाजपुर, पिपरई, कपासी आदि शामिल हैं। करीब एक माह से इस योजना की जलापूर्ति बाधित बनी हुई है। पठारी क्षेत्र होने के कारण यहां का भूगर्भ जलस्तर निरंतर गिर रहा है। इससे हैंडपंपों ने पानी छोड़ना आरंभ कर दिया है।
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कई हैंडपंप पानी की जगह हवा निकाल रहे हैं। हालात यह हो गए हैं कि लोगों को आधा से एक किलोमीटर दूरी से पानी जुटाना पड़ रहा है। ग्राम धौर्रा और पिपरई क्षेत्र में पानी की विकराल समस्या उत्पन्न हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि रणछोड़जी से धौर्रा के रास्ते में पानी सप्लाई नहीं होने से कई जंगली जानवर बिलबिला उठे हैं। कई प्यास से मर रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर शीघ्र ही पिपराबांसा पेयजल योजना को सुचारु रूप से चालू कराने की मांग की है।
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पानी की समस्या के कारण गांव में लॉकडाउन का पालन संभव नहीं हो रहा है। जिला प्रशासन को यहां की पेयजल समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस भीषण गर्मी में लोगों को दूर-दूर से पानी जुटाना पड़ रहा है।
- आनंद प्रजापति, एडवोकेट
गांव में पानी के टैंकर से जलापूर्ति की जा रही है लेकिन, टैंकर पर भीड़ देखते ही बनती है। कई तो टैंकर के ऊपर भी चढ़ जाते हैं। हर कोई टैंकर से पानी भरना चाहता है। लोगों का लगता है कि यदि टैंकर से पानी नहीं मिला तो काफी दूर से पानी भरना पड़ेगा। ऐसे में सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं हो पा रहा है।
- रामबाबू नायक
पठारी क्षेत्र होने के कारण कुआं व हैंडपंपों का पानी धरती की कोख में पहुंचने लगता है, जिससे पेयजल की गंभीर स्थिति बन जाती है। ऐसे में पिपराबांसा परियोजना का सहारा रहता है, लेकिन इस बार उसने भी धोखा दे दिया है।
- पूरन सिंह प्रजापति
पिपराबांसा परियोजना की उचित देखरेख नहीं की जा रही है। इस वजह से आए दिन जलापूर्ति बाधित हो जाती है। विभागीय अफसर भी यहां की कमियों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका खामियाजा स्थानीय लोगों को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है।
- प्रभुदयाल कुशवाहा
पिपराबांसा परियोजना से 11 गांव में जलापूर्ति की जाती है। यहां की मोटर खराब हो गई थी, जिसे ठीक करा लिया गया है। इसके अलावा वोल्टेज की समस्या को भी दूर किया गया है। अब लोगों को पानी मिलने लगेगा।
- संजीव कुमार, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान

दूरदराज से साइकिल व दुपहिया वाहनों पर पानी ढोते ग्रामीण- फोटो : LALITPUR

टैंकर से पानी भरने को लगी ग्रामीणों की भीड़- फोटो : LALITPUR