ललितपुर। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल ने जीएसटी कानून को लेकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन डीएम को दिया है। इसमें बताया गया कि भारत का परंपरागत लघु खुदरा व्यापारी, भारत की अर्थव्यवस्था में एक रीढ़ की हड्डी के समान है।
जिलाध्यक्ष सुमित अग्रवाल ने डीएम को दिए ज्ञापन में बताया कि जीएसटी की बढ़ती जटिलताओं के कारण लघु व्यापारियों को परेशानी आ रही है। वर्तमान जीएसटी कानून में संरचनात्मक परिवर्तन की आवश्यकता है। इस संबंध में पुन: स्मरण पत्र भेजा जा रहा है। जीएसटी राजस्व संग्रह में सिर्फ 20 प्रतिशत संग्रह व्यापारियों से प्राप्त होता है, जबकि 80 प्रतिशत संग्रह उद्योग एवं सेवा क्षेत्र से प्राप्त होता है। यदि लघु व्यापारियों के लिए जीएसटी के प्रावधानों को सरल एवं सुगम कर दिया जाए तो राष्ट्र का प्रत्येक व्यापारी अपना सम्पूर्ण सामर्थ्य व्यापार बढ़ाने में लगाएगा। जिस प्रकार समय-समय पर सरकार पुराने कानूनों की समीक्षा करती है और समय की मांग एवं पूर्व में हुए अनुभव के आधार पर कानूनों में संशोधन कर नया कानून बनाती है, ठीक उसी प्रकार वर्तमान जीएसटी को सरल सुगम बनाने हेतु एक नया संशोधित जीएसटी कानून पारित करें, जो लघु व्यापारियों को आर्थिक एवं मानसिक उत्पीड़न से रक्षा कर सके। एक राष्ट्र एक कर होने की बाद भी व्यापारियों को बिल में अलग-अलग आईजीएसटी, सीजीएसटी, एसजीएसटी की गणना करनी पड़ती है। ज्ञापन देते समय सुमित अग्रवाल, करीम राईन, अभय चौबे, आरिफ पठान, दीपक जैन, अमजद राइन, मु इब्राहिम, ब्रजेश ताम्रकार, सचिन नामदेव, निक्की जैन, रवि सोनी, जगदीश सेन, इस्लाम साकी, विकास सोनी, धर्मवीर कुशवाहा, रोशन कुशवाहा, दीपक सोनी, अर्जुन भोंसले, राजा, आनंद सोनी, राजीव जैन, प्रदीप साहू आदि मौजूद रहे।