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तालबेहट में विशेषज्ञों के अभाव में धूल खा रहे आधा दर्जन वेंटिलेटर
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तालबेहट। जनपद में कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए तालबेहट में बनाए गए एल वन और एल टू अस्पताल में मरीजों को सुविधाओं के नाम पर मात्र ऑक्सीजन देने तक का उपचार सीमित हैं। वेंटिलेटर के लिए मरीज को जिला मुख्यालय या झांसी जाना पड़ता है। ऐसी हालत में सीएचसी में करोड़ों की लागत के रखे आधा दर्जन वेंटिलेटर धूल खा रहे हैं। तालबेहट में वेंटिलेटर हैं लेकिन विशेषज्ञों के अभाव में उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।
इस समय कोरोना संक्रमण के रोकने के लिए शासन और प्रशासन काफी सक्रियता से काम कर रहा है। जांचों का दायरा बढ़ाने के साथ साथ मरीजों के लिए कोविड अस्पताल में बेडों की संख्या बढ़ाई जा रही है। वहीं नगर के राजकीय पॉलिटेक्निक में एल वन और सीएचसी में एल टू कोविड अस्पताल बनाया गया। एल टू में गंभीर मरीज आने पर उन्हें ऑक्सीजन दी जाती है लेकिन अति गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज झांसी भेजा जाता है। तालबेहट में वेंटिलेटर हैं लेकिन विशेषज्ञों के अभाव में उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। हांलाकि पिछलें दिनों सीएमओ डॉ. डीके गर्ग ने इन्हें जिला मुख्यालय पर प्रारंभ कराने की बात कही थी लेकिन अब तक वह सीएचसी में ही रखे हुए हैं। लोगों का मानना है कि जिस तेजी से प्रशासन कोरोना से निपटने के लिए तैयारियां कर रहा है उस तर्ज पर स्वास्थ्य विभाग को विशेषज्ञों की नियुक्ति करते हुए उन्हें प्रारंभ कराना चाहिए। जिससे आने वाले समय में लोगों को परेशान न होना पड़े और अधिक से अधिक मरीजों का उसका लाभ मिल सके।
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इस समय कोरोना संक्रमण के रोकने के लिए शासन और प्रशासन काफी सक्रियता से काम कर रहा है। जांचों का दायरा बढ़ाने के साथ साथ मरीजों के लिए कोविड अस्पताल में बेडों की संख्या बढ़ाई जा रही है। वहीं नगर के राजकीय पॉलिटेक्निक में एल वन और सीएचसी में एल टू कोविड अस्पताल बनाया गया। एल टू में गंभीर मरीज आने पर उन्हें ऑक्सीजन दी जाती है लेकिन अति गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज झांसी भेजा जाता है। तालबेहट में वेंटिलेटर हैं लेकिन विशेषज्ञों के अभाव में उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। हांलाकि पिछलें दिनों सीएमओ डॉ. डीके गर्ग ने इन्हें जिला मुख्यालय पर प्रारंभ कराने की बात कही थी लेकिन अब तक वह सीएचसी में ही रखे हुए हैं। लोगों का मानना है कि जिस तेजी से प्रशासन कोरोना से निपटने के लिए तैयारियां कर रहा है उस तर्ज पर स्वास्थ्य विभाग को विशेषज्ञों की नियुक्ति करते हुए उन्हें प्रारंभ कराना चाहिए। जिससे आने वाले समय में लोगों को परेशान न होना पड़े और अधिक से अधिक मरीजों का उसका लाभ मिल सके।
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