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पलायन से बेरोजगारी और अपराधों की गंभीर समस्या

Fri, 19 Jun 2020 12:30 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jun 2020 12:30 AM IST
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Unemployement and crime increase for outcity came laboure
ललितपुर। पहलवान गुरुदीन ग्रुप ऑफ कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग द्वारा कोविड-19 के दौरान मानव समाज पर प्रभाव विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता डा. स्वतंत्र रिछारिया ने कहा कि पलायन से बेरोजगारी और अपराधों की गंभीर समस्याएं उत्पन्न होंगी।
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मुख्य अतिथि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ के प्रो डॉ. वीरेंद्र नारायण दुबे, विशिष्ट अतिथि डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर के डॉ. कालीनाथ झा और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी की डॉ नीता यादव रहीं। अध्यक्षता संस्थापक डॉ. पारसनाथ यादव और प्रबंधक डॉ. सूर्यनाथ यादव ने की। मुख्य वक्ता डॉ. स्वतंत्र रिछारिया आरपीआर पीजी कॉलेज झांसी ने कहा कि विशाल जनसमूह के पलायन से गंभीर समस्या उत्पन्न हुई है, जिसके फलस्वरूप समाज में गरीबी, बेरोजगारी और अपराध जैसे अनेक समस्याएं उत्पन्न होंगी। व्यापार आदि के प्रभावित होने से सामाजिक संबंधों में परिवर्तन आएगा। सतत विकास की अवधारणा को पुन: परिभाषित करना पडे़गा। पुन: सामाजिक संबंधों और मूल्यों को स्थापित करना होगा।
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प्रो. मृत्युंजय राय ने बताया कि कोविड-19 से उत्पन्न संकट ने शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि सामाजिक स्वास्थ्य को भी छति पहुंचाई है। डॉ. वीरेंद्र नारायण दुबे ने कहा कि इस महामारी ने सामाजिक संबंधों को प्रभावित किया है। बड़े रिवर्स माईग्रेशन ने समाज के बीच अनेक विकृतियां उत्पन्न कर दी हैं। इस महामारी ने राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, केंद्र एवं राज्य के राजनीतिक संबंधों को भी नुकसान पहुंचाया है। डॉ. कालीनाथ झा ने कहा कि कोविड-19 महामारी सामाजिक चुनौती है। यह जीवन के प्रत्येक पहलुओं को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। मॉडल पब्लिक एजुकेशन कॉलेज चंदौसी डॉ. राजकुमार गोयल ने बताय कि कठिन परिस्थितियों में मनुष्य अपने कष्टों को भूलकर वक्त से गुजर जाता है।
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डॉ. नीता यादव ने चोलकालीन स्थानीय स्वशासन का आदर्श बताया कि हमारे इतिहास में ऐसे अनेक प्रमाण हैं, जिनको हम अपनाकर किसी भी संकट का सामना कर सकते हैं। डॉ. श्वेता पान्या, डॉ. विवेक कुमार पांडेय आदि ने विचार व्यक्त किए।

संस्थापक डॉ. पारसनाथ यादव ने कहा कि इस महामारी ने बड़े पलायन के बाद छिन्न- भिन्न आर्थिक ढांचे के बीच मानव को जीवन जीने के लिए मजबूर किया है। विभागाध्यक्ष प्रो. रंजना श्रीवास्तव ने विषय प्रस्तावना प्रस्तुत की। अंत में डॉ. महेश कुमार झा ने सामाजिक संबंधों और महामारी से उत्पन्न परिस्थितियों पर विचार प्रकट किए और आभार व्यक्त किया। इस वेबिनार की प्रस्तुति में मुख्य तकनीकि सहायक प्रो. विशाल कनौजिया व कंप्यूटर सहायक आशीष झा रहे। ई- संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर रमेशचंद्र पटेल ने किया। इस बेविनार में देशभर के 16 राज्यों एवं 25 से अधिक विश्वविद्यालयों एवं राजकीय महाविद्यालयों से विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर एवं 300 से अधिक छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया।
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