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Lalitpur News: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल पर दो बंदी जेल से रिहा

Fri, 16 Oct 2026 01:07 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2026 01:07 AM IST
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Two prisoners were released from jail on the initiative of the District Legal Services Authority.
अदालत से....
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''न्याय चला निर्धन से मिलने'' की भावना हुई साकार, पीएलवी व पैनल लॉयर की कानूनी सहायता बनी सहारा
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल पर दो जरूरतमंद बंदियों को जेल से रिहाई मिली है। पैरा लीगल वॉलेंटियर और पैनल लॉयर के प्रयासों से यह संभव हो सका। इन बंदियों को जमानत स्वीकृत होने के एक साल बाद भी रिहाई नहीं मिल पा रही थी। उन्हें यह कानूनी सहायता पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई गई।
बंदी राजेश सहरिया और लख्खी केंद्रीय कारागार, इटावा में निरूद्ध थे। उनकी जमानत एक वर्ष पहले ही स्वीकृत हो चुकी थी। परंतु जमानतदार उपलब्ध न होने के कारण उनकी रिहाई में बाधा आ रही थी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने इस समस्या को गंभीरता से लिया। उनके व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहाई सुनिश्चित करने के प्रयास किए गए। केंद्रीय कारागार इटावा के वरिष्ठ अधीक्षक ने ललितपुर प्राधिकरण को पत्र भेजे थे। इन पत्रों में बंदियों की परिस्थितियों का उल्लेख था। उन्होंने रिहाई के लिए आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया था।
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विधिक सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका
बंदियों की विधिक सहायता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में पैरा लीगल वॉलंटियर चंदन सिंह और पैनल अधिवक्ता शेर सिंह यादव ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण बंदियों को कोई शुल्क नहीं देना पड़ा। निशुल्क विधिक सहायता से उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में मदद मिली। अंततः दोनों बंदी जेल से बाहर आ सके।
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बंदियों के मामले और जमानत
बंदी लख्खी को वर्ष 2016 के पॉक्सो मामले में दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी। यह सजा 29 अप्रैल 2023 को सुनाई गई थी। उच्च न्यायालय से उसकी जमानत 12 अगस्त 2025 को स्वीकृत हुई थी।

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राजेश सहरिया को चार अगस्त 2023 को पॉक्सो एक्ट में दस वर्ष का कठोर कारावास मिला था। उसे 28 सितंबर 2024 को ललितपुर जिला कारागार से इटावा कारागार स्थानांतरित किया गया था। उच्च न्यायालय ने 25 सितंबर 2025 को उसकी जमानत स्वीकृत की थी।

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जमानतदार न मिलने से देरी
जमानत स्वीकृत होने के बाद भी दोनों बंदियों को जमानतदार नहीं मिल पा रहे थे। इसी कारण वे जमानत मिलने के बाद भी इटावा की जेल में निरूद्ध चल रहे थे। पैनल अधिवक्ता शेर सिंह ने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य ''''न्याय चला निर्धन से मिलने'''' की भावना को साकार करना है। उन्होंने कहा कि आर्थिक अभाव के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे। निशुल्क विधिक सहायता से उन्हें रिहाई दिलाने में सहयोग करना ही उनका उद्देश्य है।
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