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ट्रांजिट परमिट आनलाइन होने से बढ़ी मुसीबत
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गौना वन रेंज कार्यालय
- फोटो : LALITPUR
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डोंगराखुर्द। पांच दशक से संचालित हो रहा वन विभाग का अंतर्राज्यीय चेक पोष्ट बैरियर बंद होने एवं ट्रांजिट परमिट की प्रक्रिया जनपद मुख्यालय पर ऑनलाइन आरंभ होने से वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई है। दरअसल, ट्रांजिट परमिट मुख्यालय से नया बनाने के कारण यह दिक्कत आ रही है।
गौना वन रेंज मध्य प्रदेश का सीमावर्ती क्षेत्र है। इसे ध्यान में रखकर वर्षो पहले से अंतर्राज्यीय चेक पोस्ट स्थापित किया गया था, जिसे अब बंद कर दिया गया है। यही नहीं, ट्रांजिट परमिट बदलने की प्रक्रिया भी जनपद मुख्यालय से शुरू कर दी गई है। पहले यह प्रक्रिया गौना वन रेंज कार्यालय से अपनाई जाती थी। जब से प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है, तब से गौना रेंज से प्रक्रिया अलग हो गई है।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश का वार्डर गौना वन रेंज की सीमा में है। मड़ावरा वन रेंज का मदनपुर वार्डर और महरौनी वन रेंज में भी मध्य प्रदेश का टीकमगढ़ वार्डर पड़ता है। इन क्षेत्रों में कहीं भी बैरियर स्वीकृत नहीं है, ऐसे में कई वाहन बगैर जांच के ही निकल जाते हैं। जब तक विभागीय कर्मी हरकत में आते हैं, तब तक वाहन सीमा कर चुके होते हैं। डीएफओ कार्यालय सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक संचालित होता है। नेशनल हाइवे से प्रभागीय वन कार्यालय करीब दस किलोमीटर दूर है, इससे स्टाफ को आने- जाने में दिक्कत होती है। उन्हें अपने वाहन हाइवे पर ही छोड़ने पड़ते हैं, तब जाकर वह ट्रांजिट परमिट की प्रक्रिया पूरी करा पाते हैं। ट्रांजिट परमिट (टीपी) चेक कराए बगैर ही कई वाहन चालक निकल जाते हैं, इससे विभाग को राजस्व की चपत लग रही है। वन माफियाओं के भी हौंसले बुलंद होते जा रहे हैं।
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कैसे बदले जाते हैं ट्रांजिट परमिट
जब कोई वाहन माल लादकर एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश की सीमा में पहुंचता है तो वाहन चालक को मौजूदा प्रदेश का परमिट जमा कराना होता है, उसे दूसरे प्रदेश में जाने का अलग परमिट जारी किया जाता है। पहले यह काम गौना वन रेंज कार्यालय में होता था, अब इस व्यवस्था को हटा दिया गया है।
अंतर्राज्यीय बैरियर हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है और मुझे इसके बारे ज्यादा जानकारी नहीं है।
- आर के शाही, वन क्षेत्राधिकारी रेंज गौना
गौना वन रेंज से बैरियर हटने से तकलीफ़ ज्यादा हो गई है, क्योंकि ड्राईवर ट्रक अकेला खड़ा करके जाएगा तो ट्रक चोरी होने का खतरा बना रहता है। प्रभागीय कार्यालय आने- जाने में समय और पैसे की बर्बादी होती है।
- विजय भूषण, सचिव टिंबर मर्चेंट सागर मध्य प्रदेश
---
अंतर्राज्यीय बैरियर पहले ही समाप्त हो चुका है। जब से ट्रांजिट परमिट ऑनलाइन हुआ, तब से इसका काम जनपद मुख्यालय से हो रहा है।
- जेडी सिंह, एसडीओ वन, महरौनी
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गौना वन रेंज मध्य प्रदेश का सीमावर्ती क्षेत्र है। इसे ध्यान में रखकर वर्षो पहले से अंतर्राज्यीय चेक पोस्ट स्थापित किया गया था, जिसे अब बंद कर दिया गया है। यही नहीं, ट्रांजिट परमिट बदलने की प्रक्रिया भी जनपद मुख्यालय से शुरू कर दी गई है। पहले यह प्रक्रिया गौना वन रेंज कार्यालय से अपनाई जाती थी। जब से प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है, तब से गौना रेंज से प्रक्रिया अलग हो गई है।
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उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश का वार्डर गौना वन रेंज की सीमा में है। मड़ावरा वन रेंज का मदनपुर वार्डर और महरौनी वन रेंज में भी मध्य प्रदेश का टीकमगढ़ वार्डर पड़ता है। इन क्षेत्रों में कहीं भी बैरियर स्वीकृत नहीं है, ऐसे में कई वाहन बगैर जांच के ही निकल जाते हैं। जब तक विभागीय कर्मी हरकत में आते हैं, तब तक वाहन सीमा कर चुके होते हैं। डीएफओ कार्यालय सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक संचालित होता है। नेशनल हाइवे से प्रभागीय वन कार्यालय करीब दस किलोमीटर दूर है, इससे स्टाफ को आने- जाने में दिक्कत होती है। उन्हें अपने वाहन हाइवे पर ही छोड़ने पड़ते हैं, तब जाकर वह ट्रांजिट परमिट की प्रक्रिया पूरी करा पाते हैं। ट्रांजिट परमिट (टीपी) चेक कराए बगैर ही कई वाहन चालक निकल जाते हैं, इससे विभाग को राजस्व की चपत लग रही है। वन माफियाओं के भी हौंसले बुलंद होते जा रहे हैं।
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कैसे बदले जाते हैं ट्रांजिट परमिट
जब कोई वाहन माल लादकर एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश की सीमा में पहुंचता है तो वाहन चालक को मौजूदा प्रदेश का परमिट जमा कराना होता है, उसे दूसरे प्रदेश में जाने का अलग परमिट जारी किया जाता है। पहले यह काम गौना वन रेंज कार्यालय में होता था, अब इस व्यवस्था को हटा दिया गया है।
अंतर्राज्यीय बैरियर हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है और मुझे इसके बारे ज्यादा जानकारी नहीं है।
- आर के शाही, वन क्षेत्राधिकारी रेंज गौना
गौना वन रेंज से बैरियर हटने से तकलीफ़ ज्यादा हो गई है, क्योंकि ड्राईवर ट्रक अकेला खड़ा करके जाएगा तो ट्रक चोरी होने का खतरा बना रहता है। प्रभागीय कार्यालय आने- जाने में समय और पैसे की बर्बादी होती है।
- विजय भूषण, सचिव टिंबर मर्चेंट सागर मध्य प्रदेश
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अंतर्राज्यीय बैरियर पहले ही समाप्त हो चुका है। जब से ट्रांजिट परमिट ऑनलाइन हुआ, तब से इसका काम जनपद मुख्यालय से हो रहा है।
- जेडी सिंह, एसडीओ वन, महरौनी