फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   touraism in lalitpur

पर्यटन नगरी की सुंदरता पर रास्ते बने कालिख

Mon, 17 Jul 2017 12:26 AM IST
lalitpur
lalitpur Updated Mon, 17 Jul 2017 12:26 AM IST
विज्ञापन
touraism in lalitpur
प्रशासन - फोटो : demo pic
ललितपुर। जनपद में रेल और बसों का संचालन भले ही बहुत अच्छा हो, लेकिन दर्जनों किलोमीटर दूर जगह-जगह स्थित पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों के पहुंचने के लिए सुगम मार्ग नहीं हैं। पर्यटन विभाग द्वारा जनपद के पर्यटन स्थलों तक जाने के लिए वाहनों का साधन भी उपलब्ध नहीं कराया गया है। यहां तक कि रखर खाव के अभाव में धूल खा रही दर्जनों मूर्तियां भरोसे चल रहा है। वहीं पर्यटन विभाग भी इन जगहों पर एक बोर्ड लगाकर ही अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर ली है।       
विज्ञापन



जनपद में पर्यटन के क्षेत्र में अपार प्राचीन संपदाएं मौजूद हैं। धौर्रा क्षेत्र में मुख्यालय से करीब बत्तीस किलोमीटर दूर देवगढ़ में भगवान दशावतार का मंदिर, प्राचीन जैन मंदिर, धौर्रा के पास ही स्थित चांदपुर-जहाजपुर, श्रीरणछोरधाम मंदिर के साथ बेेतवा नदी के किनारे मुचकुंद की गुफाएं व जाखलौन के अंतर्गत ग्राम बंट के पास स्थित प्राचीन च्यावन आश्रम भी है, जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। देवगढ़ तक तो निजी वाहनों से आसानी से पहुंचा जा सकता है। लेकिन यहां अन्य पर्यटन क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए जंगलों के बीच से दुर्गम रास्तों से गुजरने को मजबूर होना पड़ता है। खासकर बारिश के दिनों में यहां के कई रास्ते कीचड़ में तब्दील हो जाते हैं। जो पर्यटकों को पहुंचने में बाधा पहुंचाते हैं।
विज्ञापन

कई बार तो पर्यटक इन रास्तों पर भटकने पर वापस ही लौट आते है। इन दुर्लभ स्थानों तक पहुंचने के लिए प्रशासन और पर्यटन विभाग की ओर से कोई खास इंतजाम नहीं किए गए हैं। न तो इन स्थानों तक पहुंचने के लिए सड़क बनी हुई है और न ही पर्यटन विभाग द्वारा कोई वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। ताकि पर्यटक वहां तक बिना किसी पूछताछ और मदद के पहुंच सकें। ललितपुर में कई और भी स्थान हैं, जहां पहुंचने के लिए ही लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
विज्ञापन
विज्ञापन



मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर सागर रोड से डोंगराखुर्द के रास्ते विंध्यांचल पर्वत श्रंखला पर स्थित प्राचीन पंडुवन की स्थिति भी यही है। डोंगराखुर्द के बाद ग्राम पारौल से करीब सात किलोमीटर की दूरी का मार्ग काफी खराब है। यहां बारिश के दिनों में पहुंचने में काफी कठिनाई होती है। यहां तक लोगों को या तो पैदल ही पंडुवन तक पहुंचना होता है या फिर ट्रैक्टर का साधन जुटाना होता है। दो पहिया और चार पहिया वाहनों का जाना पूरी तरह बंद हो जाता है। इसी प्रकार नीलकंठेश्वर मंदिर ललितपुर के दक्षिण में 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां घने जंगलों के बीच स्थित शिव त्रिमूर्ति मंदिर चंदेल शासन के समय का है। इस मंदिर के प्रवेश द्वार के ठीक सामने परम शिव त्रिमूर्ति स्थित है। शिव त्रिमूर्ति में एक मुखलिंग स्थित है। इस मुखलिंग की ऊंचाई 77 सेंटीमीटर और व्यास 1 फीट 30 सेंटीमीटर है। पाली तक तो लोग किसी न किसी साधन से पहुंच जाते हैं, लेकिन पाली से नीलकंठेश्वर मंदिर तक जाने के लिए मार्ग में कहीं भी सांकेतक बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। साथ ही यहां करीब तीन किलोमीटर की सड़क भी काफी खस्ताहाल में है। जिससे मंदिर तक जाने में काफी परेशानी होती है। जबकि यहां हर वर्ष महाशिवरात्रि और अन्य कई धार्मिक आयोजनों में हजारों की संख्या में श्रद्घालु पहुंचते हैं। वहीं नगर पंचायत पाली से करीब दस किलोमीटर दूर बालाबेहट रोड पर दूधई क्षेत्र में प्राचीन धरोधर बिखरी पड़ी हैं। सैकड़ों वर्ष पहले बनाए गए मंदिर व मूर्तियों की संख्या अनगिनत है। अनेक प्राचीन मंदिर खंडहर में तब्दील हो गए हैं। यहां भी जाने वाले रास्ते की हालत काफी खराब है। वहीं दूधई के पास ही प्राचीन कई फुट ऊंची पहाड़ी पर उकेरी गई प्रतिमा भी दुर्गम मार्ग पर स्थित है।       


अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा पुरातत्व संग्रहालय      
ललितपुर। मुख्यालय स्थित नेहरू नगर में स्थापित स्थलीय पुरातत्व संग्रहालय की दुर्दशा भी किसी से छिपी नहीं है। यहां जनपद के विभिन्न स्थानों से लाकर संग्रहित की गई करीब सवा सौ प्राचीन मूर्तियों की दशा काफी खराब है। यह संग्रहालय पुरातत्व विभाग की उदासीनता के चलते अक्सर बंद ही पड़ा रहता है। यहां यह मूर्तियां धूल खा रही हैं। यहां संग्रहालय की सुरक्षा को करीब पांच गार्ड तैनात तो किए गए हैं, लेकिन वह अक्सर गायब ही रहते है। जब कोई पर्यटक यहां संग्रहालय में मूर्तियां देखने पहुंचता है तो संग्रहालय बंद मिलने पर उसे मायूस होकर वापस लौटना होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed