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प्रभु को रिझाने के लिए भक्तिभाव से आराधना करें: मुनि अविचल
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ललितपुर। मुनि अविचल सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में वैचारिक बदलाव जरूरी है। हम अपने से श्रेष्ठ व्यक्ति को रिझाने के लिए पहले उसके पास जाने का प्रयास करते हैं। फिर उनके गुणों की प्रशंसा करते हैं। इसी तरह हमें ऐसे ही प्रभु को रिझाने के लिए भक्तिभाव से आराधना करनी चाहिए।
श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अभिनंदनोदय अतिशय तीर्थ पर संत शिरोमणि आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि अविचल सागर महाराज ससंघ का चातुर्मास कलश स्थापना हुई, जिसमें श्रेष्ठीजनों ने गुरुभक्ति पूर्वक पुर्ण्याजन किया। मुनि श्री ने कहा कि बड़ी ही आत्मीयता और विनम्रता से भगवान के पास जाना चाहिए। श्रेष्ठ भावों से प्रभु की आराधना करने से वह इष्ट की प्राप्ति होगी, जो जीवन को संवारने में कारगर होगी। ऐसे श्रेष्ठ भावों से की गई प्रभु की स्तुति ही जहां कल्याणकारी रहती है। वहीं, जीवन में वैचारिक बदलाव लाने में सहायक होती है। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज की संगीतमय पूजन द्वारा किया गया। महिला मंडल द्वारा सुसज्जित अष्टद्रव्य ब्रह्मचारी मनोज के संयोजन में श्रेष्ठीजनों द्वारा समर्पित की गई। मंगलाचरण पाठशाला परिवार एवं पुनीत बहुमंडल द्वारा भक्तिनृत्य के साथ किया गया। कार्यक्रम का ध्वजारोहण मनोज कुमार, विनय जैन परिवार ने किया। जबकि, पादप्रक्षालन का पुर्ण्याजन संदीप जैन, पवन जैन गंगवाल ने किया। चातुर्मास मुख्य कलश का पुर्ण्याजन डॉ. निर्देश जैन, डॉ.रुचि जैन, राजेंद्र जैन, कल्पना जैन, डॉ. अभिषेक जैन, राकेश बरया, महेंद्र कुमार, आलोक जैन, सुरेश कुमार, आकाश जैन, भवरलाल, पवन कुमार, प्रदीप कुमार जैन द्वारा हुआ।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अर्चना जैन सदस्य नीति आयोग, दया फाउंडेशन के संरक्षक अनिल शाह, शैलेंद्र जैन, अनुपम चौधरी ने अपने विचार रखे। जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया,महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत जैन खजुरिया, कोषाध्यक्ष सौरभ जैन, प्रबंधक मोदी पंकज जैन, मुन्ना लाल जैन अभिलाषा, जैन पंचायत के महामंत्री झांसी कमल जैन, पूर्व डीएफओ वीके जैन मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन महामंत्री आकाश जैन द्वारा किया।
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श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अभिनंदनोदय अतिशय तीर्थ पर संत शिरोमणि आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि अविचल सागर महाराज ससंघ का चातुर्मास कलश स्थापना हुई, जिसमें श्रेष्ठीजनों ने गुरुभक्ति पूर्वक पुर्ण्याजन किया। मुनि श्री ने कहा कि बड़ी ही आत्मीयता और विनम्रता से भगवान के पास जाना चाहिए। श्रेष्ठ भावों से प्रभु की आराधना करने से वह इष्ट की प्राप्ति होगी, जो जीवन को संवारने में कारगर होगी। ऐसे श्रेष्ठ भावों से की गई प्रभु की स्तुति ही जहां कल्याणकारी रहती है। वहीं, जीवन में वैचारिक बदलाव लाने में सहायक होती है। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज की संगीतमय पूजन द्वारा किया गया। महिला मंडल द्वारा सुसज्जित अष्टद्रव्य ब्रह्मचारी मनोज के संयोजन में श्रेष्ठीजनों द्वारा समर्पित की गई। मंगलाचरण पाठशाला परिवार एवं पुनीत बहुमंडल द्वारा भक्तिनृत्य के साथ किया गया। कार्यक्रम का ध्वजारोहण मनोज कुमार, विनय जैन परिवार ने किया। जबकि, पादप्रक्षालन का पुर्ण्याजन संदीप जैन, पवन जैन गंगवाल ने किया। चातुर्मास मुख्य कलश का पुर्ण्याजन डॉ. निर्देश जैन, डॉ.रुचि जैन, राजेंद्र जैन, कल्पना जैन, डॉ. अभिषेक जैन, राकेश बरया, महेंद्र कुमार, आलोक जैन, सुरेश कुमार, आकाश जैन, भवरलाल, पवन कुमार, प्रदीप कुमार जैन द्वारा हुआ।
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कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अर्चना जैन सदस्य नीति आयोग, दया फाउंडेशन के संरक्षक अनिल शाह, शैलेंद्र जैन, अनुपम चौधरी ने अपने विचार रखे। जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया,महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत जैन खजुरिया, कोषाध्यक्ष सौरभ जैन, प्रबंधक मोदी पंकज जैन, मुन्ना लाल जैन अभिलाषा, जैन पंचायत के महामंत्री झांसी कमल जैन, पूर्व डीएफओ वीके जैन मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन महामंत्री आकाश जैन द्वारा किया।
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