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टिड्डी दल का हो सकता है हमला, सतर्क रहें

Sat, 23 May 2020 01:24 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 23 May 2020 01:24 AM IST
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tiddi dal problem
ललितपुर। प्रदेश से लगे राज्यों में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाला कीट टिड्डी दल का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। इसको देखते हुए जिले के किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है। खेतों में जायद की फसलों में मूंग, उड़द एवं हरी सब्जियों आदि की सुरक्षा के लिए एहतियात बरतना चाहिए।
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जिला कृषि अधिकारी गौरव यादव ने बताया कि रेगिस्तानी टिड्डी की उड़ान हजारों मील तक पाई जाती है। टिड्डियों को उनके चमकीले पीले रंग और पिछले लंबे पैरों से पहचाना जा सकता है। टिड्डी जब अकेली होती है तो उतनी खतरनाक नहीं होती है, लेकिन झुंड में रहने पर बहुत खतरनाक और आक्रामक हो जाती है। फसलों का एक बार में सफाया कर देती है। दूर से देखने पर ऐसा लगता है कि आपकी फसल पर किसी ने बड़ी सी चादर बिछा दी हो। टिड्डियां फसलों के फूल, फल, पत्ते, तने, बीज और पेड़ की छाल सब कुछ खा जाती हैं। एक टिड्डी अपने वजन के बराबर खाना खाती है। इनका जीवनकाल कम से कम 40 से 85 दिनों का होता है।
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भगाने को यह करें उपाय
- टिड्डी दल को भगाने के लिए थालियां, ढोल, नगाडे़, लाउडस्पीकर या अन्य माध्यमों से शोरगुल करना चाहिए।
- रासायनिक कीटनाशक मेलाथियान 5 प्रतिशत धूल की 25 किलोग्राम मात्रा का बुरकाव या क्विनालफास 25 प्रति0 ईसी की 1.5 लीटर मात्रा को 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से फसल पर छिड़काव करें।
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- टिड्डी दल सुबह 10 बजे के बाद अपना डेरा बदलता है। इसलिए इसे आगे बढ़ने से रोकने के लिए लैंडा सायहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत ईसी की एक लीटर मात्रा या क्लोरोपाइरिफास 20 प्रति ईसी की एक लीटर मात्रा को 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हक्टेयर की दर से फसल पर छिड़काव करें।

- नीम के तेल की 40 एमएल मात्रा को 10 ग्राम कपडे धोने के पाउडर के साथ मिलाकर प्रति टंकी पानी में डालकर छिड़काव करने से टिड्डी फसलों को नहीं खा पाती है।
- फसल की कटाई के बाद मई और जून में खेत की गहरी जुताई करने से सूर्य की तेज किरणों से भूमि में पड़े कीटों केे अंडे व प्यूपा को नष्ट किया जा सकता है।
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