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Lalitpur News: तीन प्राचीन किलों को पीपी मॉडल पर किया जाएगा विकसित
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। तीन प्राचीन किलों को पीपी मॉडल पर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इन ऐतिहासिक धरोहरों को हेरिटेज सर्किट में शामिल कर बुनियादी सुविधाओं से लैस किया जाएगा। मार्केटिंग व ब्रांडिंग के साथ व्यापक प्रचार प्रसार करके अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया जाएगा। इससे रोजगार के साथ राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।
यहां पर्यटन के विकास की अपार संभावनाएं हैं। प्राकृतिक पर्यटन के साथ पुरातत्व संपदा भी खूब है। इसे सहेजने के लिए पर्यटन विभाग लगातार काम कर रहा है। तीन किलों मड़ावरा, सोंरई और बालाबेहट को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना पर्यटन विभाग ने बनाई है। यहां होटल, पार्किंग, रंगाई-पुताई, सौंदर्यीकरण सहित अन्य कार्य होंगे। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो आने वाले दिनों में ये तीनों ही किले आकर्षक व पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो जाएंगे और यहां पर्यटक आने शुरू हो जाएंगे।
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बालाबेहट का किला
पाली तहसील अंतर्गत ग्राम बालाबेहट है, जोकि मध्यप्रदेश के बार्डर से सटा हुआ है। मुख्यालय से बालाबेहट की दूरी करीब 50 किलोमीटर है। यहां एक प्राचीन किला है, जो आज भी अपने पुराने स्वरूप में है और काफी आकर्षक है। किले में चित्रलेखा महल, रानी महल, बावड़ी, आकर्षक दरवाजे बने हुए हैं।
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मड़ावरा का किला
जनपद मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर की दूसरी पर कस्बा मड़ावरा है। यहां एक प्राचीन किला है, जोकि इस क्षेत्र सहित आसपास के लोगों में पर्यटन स्थल के रूप में पहचाना जाता है। यह किला मराठा काल का बताया जाता है। किला करीब 60 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल में बना है। यहां अनंतकुआं, मंदिर, तालाब, बरामदे, बुर्ज, कमल बुर्ज सहित अन्य इमारतें देखने योग्य हैं।
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सोंरई किला
तहसील मड़ावरा अंतर्गत ग्राम सोंरई में बुंदेला राजाओं के वैभव का प्रतीक एक प्राचीन किला है। जिला मुख्यालय से सोंरई किला की दूरी करीब 50 किलोमीटर है। इस प्राचीन किले में बुर्ज, महल, बावड़ी, तालाब सहित अन्य आकर्षक स्थल हैं।
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तीन प्राचीन किला बालाबेहट, मड़ावरा व सोंरई को पीपी मॉडल पर विकसित किया जाएगा। मार्केटिंग तथा ब्रांडिंग के साथ ही व्यापक प्रचार-प्रसार करके अधिक से अधिक देसी- विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया जाएगा।
हेमलता, पर्यटन अधिकारी/ सचिव जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद
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ललितपुर। तीन प्राचीन किलों को पीपी मॉडल पर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इन ऐतिहासिक धरोहरों को हेरिटेज सर्किट में शामिल कर बुनियादी सुविधाओं से लैस किया जाएगा। मार्केटिंग व ब्रांडिंग के साथ व्यापक प्रचार प्रसार करके अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया जाएगा। इससे रोजगार के साथ राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।
यहां पर्यटन के विकास की अपार संभावनाएं हैं। प्राकृतिक पर्यटन के साथ पुरातत्व संपदा भी खूब है। इसे सहेजने के लिए पर्यटन विभाग लगातार काम कर रहा है। तीन किलों मड़ावरा, सोंरई और बालाबेहट को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना पर्यटन विभाग ने बनाई है। यहां होटल, पार्किंग, रंगाई-पुताई, सौंदर्यीकरण सहित अन्य कार्य होंगे। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो आने वाले दिनों में ये तीनों ही किले आकर्षक व पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो जाएंगे और यहां पर्यटक आने शुरू हो जाएंगे।
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बालाबेहट का किला
पाली तहसील अंतर्गत ग्राम बालाबेहट है, जोकि मध्यप्रदेश के बार्डर से सटा हुआ है। मुख्यालय से बालाबेहट की दूरी करीब 50 किलोमीटर है। यहां एक प्राचीन किला है, जो आज भी अपने पुराने स्वरूप में है और काफी आकर्षक है। किले में चित्रलेखा महल, रानी महल, बावड़ी, आकर्षक दरवाजे बने हुए हैं।
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मड़ावरा का किला
जनपद मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर की दूसरी पर कस्बा मड़ावरा है। यहां एक प्राचीन किला है, जोकि इस क्षेत्र सहित आसपास के लोगों में पर्यटन स्थल के रूप में पहचाना जाता है। यह किला मराठा काल का बताया जाता है। किला करीब 60 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल में बना है। यहां अनंतकुआं, मंदिर, तालाब, बरामदे, बुर्ज, कमल बुर्ज सहित अन्य इमारतें देखने योग्य हैं।
सोंरई किला
तहसील मड़ावरा अंतर्गत ग्राम सोंरई में बुंदेला राजाओं के वैभव का प्रतीक एक प्राचीन किला है। जिला मुख्यालय से सोंरई किला की दूरी करीब 50 किलोमीटर है। इस प्राचीन किले में बुर्ज, महल, बावड़ी, तालाब सहित अन्य आकर्षक स्थल हैं।
तीन प्राचीन किला बालाबेहट, मड़ावरा व सोंरई को पीपी मॉडल पर विकसित किया जाएगा। मार्केटिंग तथा ब्रांडिंग के साथ ही व्यापक प्रचार-प्रसार करके अधिक से अधिक देसी- विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया जाएगा।
हेमलता, पर्यटन अधिकारी/ सचिव जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद