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Lalitpur News: अयोध्या जाने वाले कारसेवकों का नहीं भुलाया जा सकता संघर्ष

Sun, 14 Jan 2024 11:32 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jan 2024 11:32 PM IST
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The struggle of the kar sevaks going to Ayodhya cannot be forgotten.
अमर उजाला ब्यूरो
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ललितपुर-जाखलौन। अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर का सपना लेकर 1990 में कारसेवकों को कड़ा संघर्ष करना पड़ा था। दीपावली पर पूजन के बाद कारसेवकों की घर से गिरफ्तारी के समय भले ही परिजन परेशान थे, लेकिन आज जब भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया है और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है तो कारसेवकों के साथ ही उनके परिजन भी खुश हैं। पेश है कारसेवकों से बातचीत के अंश...

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यातनाओं के बाद भी कार्यकर्ताओं में संतों द्वारा जोश भरने का कार्य लगातार जारी रहा। कहा जाता था कि ऐसे ही सरलता से राम मंदिर नहीं बनेगा, इसके लिए बलिदानों की आवश्यकता होगी। आज हम सब लोगों की आंखों के सामने भगवान राम जी का मंदिर बनकर तैयार है। 22 जनवरी को जब इसकी प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होगा तो हम जैसे कारसेवकों के लिए इससे बड़ी और प्रसन्नता की बात कोई दूसरी नहीं होगी।-सुरेंद्र कुमार लिटौरिया, कारसेवक
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दीपावली के पूजन के पश्चात घर पर भोजन कर ही रहे थे कि अचानक पुलिस ने छापा डालकर गिरफ्तार कर लिया और उरई जेल भेज दिया। 45 दिन तक सभी रामभक्तों को जेल में पुलिस की भारी यातनाएं सहनी पड़ीं। 26 अक्टूबर की रात बैरकों की लाइट बंद कर पुलिस ने लाठीचार्ज करवाया। बैरक नंबर सात में बंद सैकड़ों कारसेवकों के साथ मऊरानीपुर विधायक प्रागीलाल अहिरवार, महरौनी विधायक देवेंद्र कुमार सिंह, भाजपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष रामकुमार तिवारी घायल हुए थे। -सुरेश प्रकाश कौंतेय, कारसेवक
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हम लोगों के साथ झांसी से त्रिभुवन नाथ त्रिवेदी, डॉक्टर धन्नूलाल गौतम, गिरीश सक्सेना, छोटी छावनी अयोध्या के महाराज कामतादास सहित भारी संख्या में दक्षिण भारत के कारसेवक और साधु-महात्मा बंद थे। कुछ कार्यकर्ताओं के साथ इतनी भयानक पिटाई की गई कि आज भी उस दृश्य को सोचकर कंपकंपी भर आती है। खुशी इस बात की है कि आज मंदिर बनकर तैयार हो गया है।-सुरेश कुमार साहू, कारसेवक

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आज भी वह घड़ी उन्हें याद है, जब पुलिस ने दीपावली पर उनके घर की घेराबंदी कर कारसेवा पर जाने से पहले गिरफ्तार कर लिया था। इनमें नाबालिग राजाराम नांगल के पिता भी परेशान थे। उनके रोकने के बाद भी राजाराम ने गिरफ्तारी दी और उरई जेल में पुलिस की यातनाएं सहीं। आज भले वह इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके साथी उनके संघर्ष को आज भी याद करते हैं। -रामबाबू लिटौरिया, कारसेवक


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छह दिसंबर 92 को ढांचा गिराने में भी हमारे कस्बे से राधाकांत, राजाराम नांगल, राकेश साहू, सुरेश कौंतेय अयोध्या गए थे। हम लोगों के साथ गौना से शोभाराम भोंडेले, सैदपुर से हरनारायण शर्मा, केशव शर्मा, महरौनी से गजेंद्र सिंह बुंदेला, बांसी से काशीनाथ दुबे, रामबाबू लिटौरिया सहित भारी संख्या में कारसेवकों ने भारी यातनाएं सहीं। आज सभी लोग अपने आराध्य भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर बहुत ही प्रफुल्लित हैं। -रामकृष्ण झा, कारसेवक
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