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आशा चयन प्रक्रिया की होगी मजिस्ट्रीयल जांच
ब्यूरो
Updated Tue, 08 Dec 2015 12:48 AM IST
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ललितपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आशा चयन प्रक्रिया में लगातार आ रही गड़बड़ी की शिकायतों को गंभीरता से लते हुए डीएम ने मजिस्ट्रीयल जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी एसडीएम मड़ावरा को सौंपी गई है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नई जनगणना के बाद गांवों में आबादी बढ़ने पर अतिरिक्त आशाओं का चयन किया जाना था। लेकिन, चयन प्रक्रिया की शुरुआत से धांधली के आरोप लगने शुरू हो गए थे। आरोप था कि नई जनगणना को दरकिनार करते हुए अधिकारियों ने मनमर्जी से आशा चयन प्रक्रिया को अंजाम दिया है।
कई गांवों में जहां की जनगणना तय मानक से कम होने के बाद भी दूसरी आशाओं की भर्ती हो गई। आरोप था कि कई आशाओं के चयन के लिए फर्जी प्रस्ताव पत्र जमा कर दिए गए।
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सोमवार को आशाओं के एक समूह ने डीएम डा. रूपेश कुमार को ज्ञापन सौंपकर बताया कि कई आशाओं ने प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारी से बात की, जिसमें उन्होंने स्वीकारा कि उनकी जानकारी के बिना ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मनमर्जी से प्रस्ताव बना लिए।
उन्होंने मामले की जांच कराने की मांग की। इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम की ओर से जांच के निर्देश दिए। उन्होंने जांच की जिम्मेदारी एसडीएम मड़ावरा एसके पाल को सौंपते हुए जांच में संबंधित ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी व अन्य पक्षों को बयान लेने को कहा गया है।
सामने आएगी गड़बड़ी
मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश के बाद आशा चयन प्रक्रिया में हुई धांधली सामने आ सकती है। आशाओं ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि अधिकारियों ने कई पात्र उम्मीदवारों को दरकिनार करते हुए अपात्रों का चयन कर लिया है। जिस गांव में अतिरिक्त आशा की नियुक्ति होनी है, वहां पर कोई खुली बैठक आयोजित नहीं की गई, बल्कि प्रधानों के नाम से फर्जी दस्तावेज बना लिए गए।
चिकित्सक विवाद में भी होगी जांच
रविवार को जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में दो चिकित्सकों के बीच हुए विवाद को भी डीएम डा. रुपेश कुमार ने गंभीरता से लेते हुए प्रकरण की जांच कराने की बात कही है। विवाद की जानकारी के लिए सीएमओ डा. संजय वासवानी को सोमवार बुलाया गया था, लेकिन किसी कारणवश सीएमएस डीएम कार्यालय नहीं पहुंच सके।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नई जनगणना के बाद गांवों में आबादी बढ़ने पर अतिरिक्त आशाओं का चयन किया जाना था। लेकिन, चयन प्रक्रिया की शुरुआत से धांधली के आरोप लगने शुरू हो गए थे। आरोप था कि नई जनगणना को दरकिनार करते हुए अधिकारियों ने मनमर्जी से आशा चयन प्रक्रिया को अंजाम दिया है।
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कई गांवों में जहां की जनगणना तय मानक से कम होने के बाद भी दूसरी आशाओं की भर्ती हो गई। आरोप था कि कई आशाओं के चयन के लिए फर्जी प्रस्ताव पत्र जमा कर दिए गए।
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सोमवार को आशाओं के एक समूह ने डीएम डा. रूपेश कुमार को ज्ञापन सौंपकर बताया कि कई आशाओं ने प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारी से बात की, जिसमें उन्होंने स्वीकारा कि उनकी जानकारी के बिना ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मनमर्जी से प्रस्ताव बना लिए।
उन्होंने मामले की जांच कराने की मांग की। इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम की ओर से जांच के निर्देश दिए। उन्होंने जांच की जिम्मेदारी एसडीएम मड़ावरा एसके पाल को सौंपते हुए जांच में संबंधित ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी व अन्य पक्षों को बयान लेने को कहा गया है।
सामने आएगी गड़बड़ी
मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश के बाद आशा चयन प्रक्रिया में हुई धांधली सामने आ सकती है। आशाओं ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि अधिकारियों ने कई पात्र उम्मीदवारों को दरकिनार करते हुए अपात्रों का चयन कर लिया है। जिस गांव में अतिरिक्त आशा की नियुक्ति होनी है, वहां पर कोई खुली बैठक आयोजित नहीं की गई, बल्कि प्रधानों के नाम से फर्जी दस्तावेज बना लिए गए।
चिकित्सक विवाद में भी होगी जांच
रविवार को जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में दो चिकित्सकों के बीच हुए विवाद को भी डीएम डा. रुपेश कुमार ने गंभीरता से लेते हुए प्रकरण की जांच कराने की बात कही है। विवाद की जानकारी के लिए सीएमओ डा. संजय वासवानी को सोमवार बुलाया गया था, लेकिन किसी कारणवश सीएमएस डीएम कार्यालय नहीं पहुंच सके।