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Lalitpur News: सड़क पर तड़पती रही प्रसूता, 50 मिनट में ढाई किमी नहीं आ सकी एंबुलेंस

Fri, 22 Aug 2025 11:54 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 22 Aug 2025 11:54 PM IST
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The pregnant woman kept writhing in pain on the road, the ambulance could not cover 2.5 km in 50 minutes
- तड़पता देख आरपीएफ व चेकिंग स्टाफ ने टैक्सी से भेजा मेडिकल कॉलेज
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। स्वास्थ्य विभाग के सुविधाएं मुहैया कराने के दावों की उस समय पोल खुल गई, जब एक प्रसूता रेलवे स्टेशन के बाहर 50 मिनट तक एंबुलेंस के इंतजार में सड़क पर तड़पती रही। लेकिन, फोन करने के 50 मिनट बाद भी एंबुलेंस ढा़ई किलोमीटर का रास्ता तय नहीं कर सकी। प्रसूता को तड़पता देख टिकट चेकिंग स्टाफ व आरपीएफ ने एक महिला कांस्टेबल के साथ टैक्सी से मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया।
उरई के ग्राम कुकनू निवासी आरती पत्नी वीरसिंह शुक्रवार को झांसी से छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से रायपुर जा रही थी। इसी दौरान ट्रेन में प्रसव पीड़ा हुई। जानकारी मिलने पर टिकट चेकिंग स्टाफ व रेल सुरक्षा बल ट्रेन के समय प्लेटफार्म संख्या दो पर पहुंच गए और ट्रेन आने पर प्रसूता को स्ट्रेचर के सहारे बोगी से उतारकर उसे स्टेशन के बाहर सर्कुलेटिंग एरिया में लाए। इसके बाद टिकट चेकिंग स्टाफ ने एंबुलेंस को 2.54 बजे व 3.09 बजे कॉल किया। लेकिन, 50 मिनट तक प्रसूता सड़क पर ही स्ट्रेचर पर लेटकर एंबुलेंस का इंतजार करती रही। एंबुलेंस के इंतजार में महिला तड़पती व चिल्लाती रही। प्रसूता को परेशान देखकर अन्य लोगों ने लगातार कई बार एंबुलेंस को फोन किया। इसके बाद भी नहीं आई। इस पर महिला को भारी प्रसव पीड़ा देखकर आरपीएफ और टिकट चेकिंग स्टाफ ने महिला आरपीएफ सिपाही के साथ टैक्सी से मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। प्रसूता की जांच कर उपचार शुरू कर दिया गया है।
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महिलाओं ने दिया कपड़ों से पर्दा का सहारा
प्रसूता को स्टेशन के बाहर लाकर स्ट्रेचर को सड़क पर रखकर एंबुलेंस का इंतजार किया। सड़क पर तड़पती महिला को देखकर प्रसव पीड़ा की स्थिति में महिलाओं ने अपने बैग से कपड़ा निकाले और महिला के चारों ओर पर्दा किया। साथ ही ढांढस बंधाया। इसके बाद अधिक देर तक एंबुलेंस न आने पर कहा जल्दी करो, समस्या हो जाएगी।
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जनपद में 42 एंबुलेंस का किया जा रहा संचालन
स्वास्थ्य विभाग में वर्तमान में 102 की 16 एंबुलेंस व 108 की 22 एंबुलेंस हैं। विभागीय अफसर शासकीय बैठकों व अन्य जागरूक कार्यक्रम में एंबुलेंस को कॉल करने के बाद पांच मिनट में पहुंचने का दावा करते हैं। लेकिन, दावा महज बैठकों तक ही सीमित है। धरातल पर स्थिति कुछ और ही बनी हुई है। मुख्यालय पर कॉल करने के 50 मिनट बाद भी ढाई किलोमीटर एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी तो ग्रामीण क्षेत्र की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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स्टेशन पर एंबुलेंस के कॉल करने के बाद 50 मिनट में एंबुलेंस नहीं पहुंचने की जानकारी हुई है। इसकी जांच कराकर दोषी पर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. इम्तियाज अहमद, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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