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Lalitpur News: खामोशी से खत्म हो रही प्रकृति की सफाई व्यवस्था और बचाने की अनंतिम जंग
Sat, 05 Sep 2026 02:05 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Updated Sat, 05 Sep 2026 02:05 AM IST
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ललितपुर। अंतरराष्ट्रीय गिद्ध दिवस पर देवगढ़ में प्रकृति, जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण को लेकर विशेष आयोजन किया जाएगा। पर्यावरण के लिए काम करने वाले संगठन ने गिद्धों की घटती संख्या पर चिंता जताते हुए देवगढ़ में आयोजन कर गिद्धों एवं अन्य जीव-जंतुओं के संरक्षण का संदेश दिया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय गिद्ध दिवस पर पांच सितंबर को देवगढ़ में प्रकृति, जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण को समर्पित विशेष आयोजन किया जाएगा। मानव ऑर्गेनाइजेशन, विकासार्थ विद्यार्थी एवं भारतीय जैव विविधता संरक्षण संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में नेचर वॉक के माध्यम से गिद्धों एवं विभिन्न जीव-जंतुओं के संरक्षण का संदेश दिया जाएगा। देवगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पर्यावरण योद्धाओं एवं प्रकृति प्रेमियों की टीम सुबह 11.45 बजे तुवन मंदिर प्रांगण से बस द्वारा देवगढ़ के लिए रवाना होगी।
गिद्धों की घटती संख्या चिंता का विषय
भारत में गिद्धों की स्थिति लंबे समय से गंभीर बनी हुई है। स्टेट ऑफ इंडियाज बर्ड्स के नवीनतम 2025 के अनुसार भारतीय गिद्ध की दीर्घकालिक आबादी में लगभग 93.91 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। सफेद-पीठ वाले गिद्ध की दीर्घकालिक गिरावट 97.06 प्रतिशत, लाल सिर वाले गिद्ध की 86.09 प्रतिशत और मिस्र के गिद्ध की 81.33 प्रतिशत दर्ज की गई है। इन प्रजातियों को भारत में उच्च संरक्षण प्राथमिकता वाली प्रजातियों में रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय गिद्ध, सफेद-पीठ वाला गिद्ध और लाल सिर वाला गिद्ध वैश्विक स्तर पर क्रिटिकली एंडैंजर्ड श्रेणी में हैं, जबकि मिस्र का गिद्ध एंडैंजर्ड श्रेणी में है। यह आंकड़े बताते हैं कि गिद्ध संरक्षण केवल वन्यजीव संरक्षण का विषय नहीं बल्कि पारिस्थितिक संतुलन और पर्यावरणीय स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
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जनपद में 125 से घटकर 60 रह गई संख्या
देवगढ़ वन क्षेत्र में स्थित महावीर स्वामी वन्य विहार में दो वर्ष पहले जहां करीब 125 गिद्ध थे वहीं अब इनकी संख्या घटकर 50 से 60 के बीच रह गई है।
डॉ. राजीव कुमार निरंजन।
गिद्धों का संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा है
गिद्ध प्रकृति के महत्वपूर्ण सफाईकर्मी हैं। उनकी संख्या में भारी गिरावट पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए चिंता का विषय है। गिद्धों के प्राकृतिक आवास, भोजन और सुरक्षित प्रजनन क्षेत्रों की रक्षा के साथ-साथ समाज में इनके प्रति जागरूकता बढ़ाना भी आवश्यक है। देवगढ़ में आयोजित नेचर वॉक लोगों को प्रकृति के करीब ले जाने और यह समझाने का प्रयास है कि किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र में प्रत्येक जीव की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
पुष्पेंद्र सिंह चौहान।
गिद्ध केवल पक्षी नहीं, प्रकृति की सफाई व्यवस्था के प्रहरी है।
गिद्धों की संख्या में आई भारी गिरावट हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराती है। गिद्धों को बचाना केवल एक पक्षी को बचाना नहीं है। यह प्रकृति की उस व्यवस्था को बचाना है, जो मृत जीवों के अवशेषों को प्राकृतिक रूप से समाप्त कर पर्यावरण को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। गिद्ध बचेंगे तो जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की एक महत्वपूर्ण कड़ी सुरक्षित रहेगी। देवगढ़ की नेचर वॉक के माध्यम से गिद्धों के साथ-साथ छोटे-बड़े सभी जीव-जंतुओं, पक्षियों, वनस्पतियों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण का संदेश दिया जाएगा।
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अंतरराष्ट्रीय गिद्ध दिवस पर पांच सितंबर को देवगढ़ में प्रकृति, जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण को समर्पित विशेष आयोजन किया जाएगा। मानव ऑर्गेनाइजेशन, विकासार्थ विद्यार्थी एवं भारतीय जैव विविधता संरक्षण संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में नेचर वॉक के माध्यम से गिद्धों एवं विभिन्न जीव-जंतुओं के संरक्षण का संदेश दिया जाएगा। देवगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पर्यावरण योद्धाओं एवं प्रकृति प्रेमियों की टीम सुबह 11.45 बजे तुवन मंदिर प्रांगण से बस द्वारा देवगढ़ के लिए रवाना होगी।
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गिद्धों की घटती संख्या चिंता का विषय
भारत में गिद्धों की स्थिति लंबे समय से गंभीर बनी हुई है। स्टेट ऑफ इंडियाज बर्ड्स के नवीनतम 2025 के अनुसार भारतीय गिद्ध की दीर्घकालिक आबादी में लगभग 93.91 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। सफेद-पीठ वाले गिद्ध की दीर्घकालिक गिरावट 97.06 प्रतिशत, लाल सिर वाले गिद्ध की 86.09 प्रतिशत और मिस्र के गिद्ध की 81.33 प्रतिशत दर्ज की गई है। इन प्रजातियों को भारत में उच्च संरक्षण प्राथमिकता वाली प्रजातियों में रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय गिद्ध, सफेद-पीठ वाला गिद्ध और लाल सिर वाला गिद्ध वैश्विक स्तर पर क्रिटिकली एंडैंजर्ड श्रेणी में हैं, जबकि मिस्र का गिद्ध एंडैंजर्ड श्रेणी में है। यह आंकड़े बताते हैं कि गिद्ध संरक्षण केवल वन्यजीव संरक्षण का विषय नहीं बल्कि पारिस्थितिक संतुलन और पर्यावरणीय स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
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जनपद में 125 से घटकर 60 रह गई संख्या
देवगढ़ वन क्षेत्र में स्थित महावीर स्वामी वन्य विहार में दो वर्ष पहले जहां करीब 125 गिद्ध थे वहीं अब इनकी संख्या घटकर 50 से 60 के बीच रह गई है।
डॉ. राजीव कुमार निरंजन।
गिद्धों का संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा है
गिद्ध प्रकृति के महत्वपूर्ण सफाईकर्मी हैं। उनकी संख्या में भारी गिरावट पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए चिंता का विषय है। गिद्धों के प्राकृतिक आवास, भोजन और सुरक्षित प्रजनन क्षेत्रों की रक्षा के साथ-साथ समाज में इनके प्रति जागरूकता बढ़ाना भी आवश्यक है। देवगढ़ में आयोजित नेचर वॉक लोगों को प्रकृति के करीब ले जाने और यह समझाने का प्रयास है कि किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र में प्रत्येक जीव की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
पुष्पेंद्र सिंह चौहान।
गिद्ध केवल पक्षी नहीं, प्रकृति की सफाई व्यवस्था के प्रहरी है।
गिद्धों की संख्या में आई भारी गिरावट हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराती है। गिद्धों को बचाना केवल एक पक्षी को बचाना नहीं है। यह प्रकृति की उस व्यवस्था को बचाना है, जो मृत जीवों के अवशेषों को प्राकृतिक रूप से समाप्त कर पर्यावरण को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। गिद्ध बचेंगे तो जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की एक महत्वपूर्ण कड़ी सुरक्षित रहेगी। देवगढ़ की नेचर वॉक के माध्यम से गिद्धों के साथ-साथ छोटे-बड़े सभी जीव-जंतुओं, पक्षियों, वनस्पतियों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण का संदेश दिया जाएगा।