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कक्षाएं छोड़ कृषि कार्य में हाथ बंटा रहे छात्र

Sat, 04 Mar 2017 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 04 Mar 2017 12:45 AM IST
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The classes are divided left hand student in agriculture
कक्षाएं छोड़ कृषि कार्य में हाथ बंटा रहे छात्र - फोटो : demo
ललितपुर। 
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परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों ने कृषि कार्य में अभिभावकों का हाथ बटाना आरंभ कर दिया है। इसका असर स्कूलों में दिखाई दे रहा है। इस समय स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति 50 प्रतिशत से कम दर्ज की जा रही है।      
परिषदीय विद्यालयों में ज्यादातर मध्य वर्गीय और निर्धन परिवारों के बच्चे नामांकित हैं। जिस वजह से उनके सामने जीविकोपार्जन की समस्या बनी रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो अभिभावक समय-समय पर कृषि कार्य में बच्चों को साथ लगा लेते हैं। इस समय फसल कटाई और थ्रेसिंग का कार्य शुरू हो गया है। इससे बच्चों के सहयोग की आवश्यकता अभिभावकों को पड़ गई है। कोई खेत पर खाना लेकर पहुंच रहा है तो कोई घर पर रहकर अपने भाई बहिनों को संभाल रहा है। इन हालात में अधिकांश बच्चों का स्कूल जाना छूट गया है। इससे निपटने के लिए अध्यापक बच्चों के घर-घर पहुंचकर उन्हें स्कूल आने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके बाद भी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं बढ़ पा रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि परिषदीय विद्यालयों का वार्षिक परीक्षा कार्यक्रम भी तय हो गया है। 18 मार्च से परीक्षाएं आरंभ हो रही हैं। यदि बच्चों का स्कूल में आना यूं ही बंद रहा तो उन्हें परीक्षा दिलाना भी मुश्किल हो जाएगा। वरिष्ठ खंड शिक्षा अधिकारी एनएल शर्मा का कहना है कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति काफी गिर गई है। जिसे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।      
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समस्या का नहीं ढूंढा जा सका विकल्प      
हर साल रबी सीजन में फसल कटाई, चना, गेहूं की वाली, महुआ बीनने में बच्चों के लग जाने की समस्या आती है। विभागीय अफसर इसका अभी तक समाधान नहीं ढूंढ सके हैं। बीते सालों में यूनिसेफ ने सर्वे भी कराया था।      
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स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए संकुल स्तर पर स्कूल प्रबंध समितियों के पदाधिकारी व सदस्यों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस दौरान उन्हें उनके अधिकार बताने के साथ बच्चों को कम से कम एक घंटा घर देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।      
संतोष कुमार राय      
बीएसए ललितपुर।
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