{"_id":"444f031fb60e633a91c3e1170aef30a9","slug":"that-employs-the-workers-themselves-made-the-family-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रोजगार देने वाले ने खुद के परिवार को बनाया मजदूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रोजगार देने वाले ने खुद के परिवार को बनाया मजदूर
ब्यूरो
Updated Tue, 08 Dec 2015 12:55 AM IST
विज्ञापन
सिलावन (ललितपुर)। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत ग्रामीणों को गांव में 100 दिन रोजगार देने की गारंटी देने वाले ही मजदूरों की जमात में शामिल हो गए हैं। यह बात कुछ अटपटी जरूर है,
लेकिन ग्राम पंचायत चौकी में एक रोजगार सेवक ने यह कारनामा करके दिखा दिया है। रोजगार सेवक ने अपनी बहन के नाम जॉब कार्ड निर्गत कर उसमें पत्नी का नाम अंकित कर दोनों से नाली, बंधी, कूप, शौचालय और संपर्क मार्ग निर्माण में 100 दिन से अधिक की मजदूरी भी करा ली। इसकी जांच कराई जाए, तो कई फर्जीवाड़ों का खुलासा हो सकता है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक महरौनी विकासखंड के अंतर्गत एक रोजगार सेवक ने 20 फरवरी 2014 को अपनी बहन स्नेहलता का मनरेगा में पंजीकरण कराकर 001/426 नंबर का जॉब कार्ड निर्गत किया। इसमें पत्नी नेहा का नाम भी शामिल करा दिया गया।
विज्ञापन
पत्नी ने आवेदन 393 और 18233 और बहन स्नेहलता ने आवेदन 18229 देकर रोजगार देने की मांग की, जिस पर पत्नी नेहा को चार अप्रैल 2014 को छह दिन और नौ मई 2014 छह दिन का काम दिया गया। इसी तरह बहन स्नेहलता को नौ मई को 2014 को छह दिन का काम दिया गया।
इसके बाद दोनों ने वर्ष 2014-15 में ग्राम पंचायत में हुए नाली निर्माण, बंधी निर्माण व संपर्क मार्ग निर्माण पर कुल 96 दिनों का रोजगार प्राप्त किया। मजदूरी का सिलसिला वर्ष 2015-16 में भी चलता रहा।
इस वित्तीय वर्ष में नेहा ने आवेदन 27586 पर सात मई 2015 को छह दिन, आवेदन 44927 पर 24 मई 2015 को छह दिन, 75667 पर 13 जून 2015 को 12 दिन, आवेदन 120905 पर पांच जुलाई 2015 को 12 दिन और आवेदन 196956 पर 12 दिन का रोजगार प्राप्त किया। इस प्रकार रोजगार सेवक ने अपने परिवारीजन के नाम जॉब कार्ड बनाकर 100 दिनों से अधिक के काम का जुगाड़ कर लिया।
इनका कहना है
ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। यदि संज्ञान में आएगा तो दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- गजेंद्र प्रताप
खंड विकास अधिकारी, महरौनी
विज्ञापन
लेकिन ग्राम पंचायत चौकी में एक रोजगार सेवक ने यह कारनामा करके दिखा दिया है। रोजगार सेवक ने अपनी बहन के नाम जॉब कार्ड निर्गत कर उसमें पत्नी का नाम अंकित कर दोनों से नाली, बंधी, कूप, शौचालय और संपर्क मार्ग निर्माण में 100 दिन से अधिक की मजदूरी भी करा ली। इसकी जांच कराई जाए, तो कई फर्जीवाड़ों का खुलासा हो सकता है।
विज्ञापन
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक महरौनी विकासखंड के अंतर्गत एक रोजगार सेवक ने 20 फरवरी 2014 को अपनी बहन स्नेहलता का मनरेगा में पंजीकरण कराकर 001/426 नंबर का जॉब कार्ड निर्गत किया। इसमें पत्नी नेहा का नाम भी शामिल करा दिया गया।
विज्ञापन
पत्नी ने आवेदन 393 और 18233 और बहन स्नेहलता ने आवेदन 18229 देकर रोजगार देने की मांग की, जिस पर पत्नी नेहा को चार अप्रैल 2014 को छह दिन और नौ मई 2014 छह दिन का काम दिया गया। इसी तरह बहन स्नेहलता को नौ मई को 2014 को छह दिन का काम दिया गया।
इसके बाद दोनों ने वर्ष 2014-15 में ग्राम पंचायत में हुए नाली निर्माण, बंधी निर्माण व संपर्क मार्ग निर्माण पर कुल 96 दिनों का रोजगार प्राप्त किया। मजदूरी का सिलसिला वर्ष 2015-16 में भी चलता रहा।
इस वित्तीय वर्ष में नेहा ने आवेदन 27586 पर सात मई 2015 को छह दिन, आवेदन 44927 पर 24 मई 2015 को छह दिन, 75667 पर 13 जून 2015 को 12 दिन, आवेदन 120905 पर पांच जुलाई 2015 को 12 दिन और आवेदन 196956 पर 12 दिन का रोजगार प्राप्त किया। इस प्रकार रोजगार सेवक ने अपने परिवारीजन के नाम जॉब कार्ड बनाकर 100 दिनों से अधिक के काम का जुगाड़ कर लिया।
इनका कहना है
ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। यदि संज्ञान में आएगा तो दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- गजेंद्र प्रताप
खंड विकास अधिकारी, महरौनी