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Lalitpur News: टैक्स की मार में ठप हो गया तालबेहट का कड़ाही व्यवसाय
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संवाद न्यूज एजेंसी
तालबेहट। टैक्स की मार के चलते क्षेत्र में व्यापक स्तर पर संचालित होने वाला कड़ाही बनाने का कारोबार ठप हो गया है। लघु उद्योग संचालकों ने बताया कि इस समय वह केवल कृषि में उपयोग आने वाले यंत्रों का ही निर्माण कर रहे हैं।
कुछ समय पहले तालबेहट और उसके आसपास के गांवों में लोहे के उद्योग काफी थे। जहां कड़ाही, कुल्हाडी, सरौता, सुरया, हसिया, फार, सब्बल आदि यंत्र बनाए जाते थे। जिनकी आपूर्ति प्रदेश के कई शहरों के अलावा सहित मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र के कई शहरों में होती थी। सरकार द्वारा हाथ से उपयोग में आने वाले कृषि यंत्रों पर 12 प्रतिशत की जीएसटी रोपित करने के बाद उद्योग संचालकों ने कड़ाही बनाना बंद कर दिया। उनका कहना है कि एक तो सामान नहीं मिल पाता और दूसरी वजह इसे बनाने में काफी समय लगता है। जो उनके लिए मंहगा सौदा होता है। जबकि अन्य शहरों में इसे प्रेस मशीन द्वारा बनाने से कम लागत आती है।
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पहले जहां-जहां भेजते थे कड़ाही, अब वहीं से खुद मंगाते हैं
क्षेत्र के लघु उद्योग संचालकों ने बताया कि कुछ समय पहले वह कड़ाही विक्रय करने के लिए कानपुर, आगरा, जबलपुर, ग्वालियर, नागपुर, इंदौर, सागर, भोपाल आदि शहरों में भेजते थे। आज वहीं, से ही कड़ाही विक्रय के लिए तालबेहट आ रही हैं।
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गुटखा की भेंट चढ़ा सरौता
निर्माण लद्यु उद्योग संचालकों ने बताया कि कड़ाही के साथ-साथ सरौता निर्माण भी गुटखा की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। अब गुटखा के चलते लोगों ने पान और तंबाकू खाना कम कर दिया है। ऐसी स्थिति में लोगों ने सरौती लेना बंद कर दिया है।
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तालबेहट। टैक्स की मार के चलते क्षेत्र में व्यापक स्तर पर संचालित होने वाला कड़ाही बनाने का कारोबार ठप हो गया है। लघु उद्योग संचालकों ने बताया कि इस समय वह केवल कृषि में उपयोग आने वाले यंत्रों का ही निर्माण कर रहे हैं।
कुछ समय पहले तालबेहट और उसके आसपास के गांवों में लोहे के उद्योग काफी थे। जहां कड़ाही, कुल्हाडी, सरौता, सुरया, हसिया, फार, सब्बल आदि यंत्र बनाए जाते थे। जिनकी आपूर्ति प्रदेश के कई शहरों के अलावा सहित मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र के कई शहरों में होती थी। सरकार द्वारा हाथ से उपयोग में आने वाले कृषि यंत्रों पर 12 प्रतिशत की जीएसटी रोपित करने के बाद उद्योग संचालकों ने कड़ाही बनाना बंद कर दिया। उनका कहना है कि एक तो सामान नहीं मिल पाता और दूसरी वजह इसे बनाने में काफी समय लगता है। जो उनके लिए मंहगा सौदा होता है। जबकि अन्य शहरों में इसे प्रेस मशीन द्वारा बनाने से कम लागत आती है।
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पहले जहां-जहां भेजते थे कड़ाही, अब वहीं से खुद मंगाते हैं
क्षेत्र के लघु उद्योग संचालकों ने बताया कि कुछ समय पहले वह कड़ाही विक्रय करने के लिए कानपुर, आगरा, जबलपुर, ग्वालियर, नागपुर, इंदौर, सागर, भोपाल आदि शहरों में भेजते थे। आज वहीं, से ही कड़ाही विक्रय के लिए तालबेहट आ रही हैं।
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गुटखा की भेंट चढ़ा सरौता
निर्माण लद्यु उद्योग संचालकों ने बताया कि कड़ाही के साथ-साथ सरौता निर्माण भी गुटखा की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। अब गुटखा के चलते लोगों ने पान और तंबाकू खाना कम कर दिया है। ऐसी स्थिति में लोगों ने सरौती लेना बंद कर दिया है।