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ताजदार-ए-हरम कोई अपना नहीं ग़म के मारे हैं हम...
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ललितपुर। हजरत बाबा सदनशाह के उर्स के दूसरे दिन लोगों ने मजार पर चादर चढ़ाकर अल्लाह से दुआएं मांगी। शनिवार को बाबा सदन की दरगाह पर अन्य जनपदों से आने वाले लोगों को तांता लगा रहा। शुक्रवार की रात को कव्वाली को दौर चला, जिसमें कव्वालों ने कव्वालियां पेश कीं।
हजरत बाबा सदनशाह उर्स मुबारक पर शुक्रवार की रात में महफिल-ए -कव्वाली का दौर चलता रहा, जिसमें बाहरी जनपदों से आए नामीगिरानी कव्वालों ने एक से बढ़कर एक उम्दा कलाम व गजलें पेश कीं। सुबह तक चली महफिल में कव्वाल के सूफियाना अंदाज ने ऐसा समा बांधा कि सभी श्रोता अल सुबह तक जमे रहे। सदारत उर्स कमेटी के सदर हाजी बाबू बदरुद्दीन कुरैशी ने की। कव्वाल मुज्तबा नाजां और मुकर्रम वारसी ने सबसे पहले खुदा की शान में हम्द-ए-पाक सुनाई। फिर दौर चला नात-ए-पाक- का, जिसमें कहा कि करे जिक्र जिसका ख़ुदा वो मोहम्मद हैं, जिसे रब ने रहमत बना के भेजा, लुटा कर्बला में जिसका घराना, वो मोहम्मद हैं, इंसान क्या है फरिश्तों ने माना, कहां पा सकेगा ये जमाना, वो मोहम्मद हैं। मुकर्रम वारसी ने कव्वाली पेश करते हुए कहा कि सबसे पहले क़िस्मत में मेरी चैन से जीना लिख दे, डूबे न कभी मेरा सफ़ीना लिख दे, जन्नत भी गवारा है मगर मेरे लिए, ए क़ातिब-ए-तक़दीर मदीना लिख दे, ताजदार-ए-हरम हो, निगाह-ए-करम, हम ग़रीबों के दिन भी संवर जाएंगे हामीं-ए बेकसां क्या कहेगा जहां, आपके दर से ख़ाली अगर जाएंगे ताजदार-ए-हरम, ताजदार-ए-हरम कोई अपना नहीं ग़म के मारे हैं हम, आपके दर पर फ़रियाद लाए हैं, हो निगाहे-ए-करम, वरना चौखट पे हम आपका नाम ले-ले मर जाएंगे ताजदार-ए-हरम, ताजदार-ए-हरम की लोगों ने खूब सराहना की। मुज्तबा नांजा ने ख़्वाजा की शान में कहा कि जिनका चेहरा मोहम्मद की तस्वीर है, वो चमकता सितारा है अजमेर में ,गम के मारे शिकवा-ए-गम न कर, बदनसीबी पे तू अपनी मातम न कर, बेकसों की बेकसी भी संभल जाएगी, बेकसों का सहारा है अजमेर में, यह सुनकर महफ़िल में बैठे लोगों की खूब तालियां बटोरीं। नायब सदर अब्दुल रहमान कल्ला ने सभी का आभार व्यक्त किया। मंच का संचालन जनरल सेक्रेट्री मोहम्मद नसीम व शाकिर अली, जनरल सेक्रेट्री अरमान कुरैशी ने संयुक्त रूप से किया।
ये रहे मौजूद
उर्स कमेटी के सदर हाजी बाबू बदरुद्दीन कुरैशी, जनरल सेक्रेट्री हाजी साबिर अली, असलम कुरैशी, अबरार अली, हमीद खां मंसूरी, सरफराज मेंबर, कोषाध्यक्ष हाजी अख्तर खान, उर्स संयोजक व प्रेस क्लब अध्यक्ष राजीव बबेले सप्पू, शरीफ कुरैशी पूर्व सभासद, नदीम शबनम, मीडिया प्रभारी रिजवान उज्जमा, रमजानी दादा, शाकिर अली, चौधरी बरकत चौधरी, मो. इदरीश, हाफिज हारून, हाफिज आगर अली, मो. सैय्यद गुलाम यूनिस रब्बानी, शब्बीर कुरैशी, हारून कुरैशी, शेख इस्राइल, नसीर कुरैशी, इरफान कुरैशी, अजीम खान, शेख नत्थू उस्ताद, करीम असर, जहीर ललितपुरी, मो.रहीस खलीफा शब्बीर खान बिरधा, राजू सिंधी, गिरीश पाठक सोनू, सरवर खान, शफात मैनेजर, समीर चौबे, शरद चौबे, खुर्शीद आलम, हफीज शॉकर ,साबिर खान घड़ी साज, कलीम खान, हाजी इरशाद, रिजवान कुरैशी, आसिफ पठान, मजीद खान, अनीस खान टाल वाले, मुस्तफ़ा मेंबर, जमील अहमद, शाकिर खां, मुस्ताक खान, अब्दुल बारी सदन, आरिफ बेग, खुर्शीद मुंशी, यूसुफ सिलगन, लियाकत अली, शब्बीर मंसूरी, करीम मंसूरी बिरधा, मो. जमील बाबू, चौधरी अजमेरी भूरा, आशिद खां रोवी, शफीक कुरैशी, जाबिर खान, शकील रियाज कुरैशी, मौलाना इकरामुद्दीन आदि मौजूद रहे।
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हजरत बाबा सदनशाह उर्स मुबारक पर शुक्रवार की रात में महफिल-ए -कव्वाली का दौर चलता रहा, जिसमें बाहरी जनपदों से आए नामीगिरानी कव्वालों ने एक से बढ़कर एक उम्दा कलाम व गजलें पेश कीं। सुबह तक चली महफिल में कव्वाल के सूफियाना अंदाज ने ऐसा समा बांधा कि सभी श्रोता अल सुबह तक जमे रहे। सदारत उर्स कमेटी के सदर हाजी बाबू बदरुद्दीन कुरैशी ने की। कव्वाल मुज्तबा नाजां और मुकर्रम वारसी ने सबसे पहले खुदा की शान में हम्द-ए-पाक सुनाई। फिर दौर चला नात-ए-पाक- का, जिसमें कहा कि करे जिक्र जिसका ख़ुदा वो मोहम्मद हैं, जिसे रब ने रहमत बना के भेजा, लुटा कर्बला में जिसका घराना, वो मोहम्मद हैं, इंसान क्या है फरिश्तों ने माना, कहां पा सकेगा ये जमाना, वो मोहम्मद हैं। मुकर्रम वारसी ने कव्वाली पेश करते हुए कहा कि सबसे पहले क़िस्मत में मेरी चैन से जीना लिख दे, डूबे न कभी मेरा सफ़ीना लिख दे, जन्नत भी गवारा है मगर मेरे लिए, ए क़ातिब-ए-तक़दीर मदीना लिख दे, ताजदार-ए-हरम हो, निगाह-ए-करम, हम ग़रीबों के दिन भी संवर जाएंगे हामीं-ए बेकसां क्या कहेगा जहां, आपके दर से ख़ाली अगर जाएंगे ताजदार-ए-हरम, ताजदार-ए-हरम कोई अपना नहीं ग़म के मारे हैं हम, आपके दर पर फ़रियाद लाए हैं, हो निगाहे-ए-करम, वरना चौखट पे हम आपका नाम ले-ले मर जाएंगे ताजदार-ए-हरम, ताजदार-ए-हरम की लोगों ने खूब सराहना की। मुज्तबा नांजा ने ख़्वाजा की शान में कहा कि जिनका चेहरा मोहम्मद की तस्वीर है, वो चमकता सितारा है अजमेर में ,गम के मारे शिकवा-ए-गम न कर, बदनसीबी पे तू अपनी मातम न कर, बेकसों की बेकसी भी संभल जाएगी, बेकसों का सहारा है अजमेर में, यह सुनकर महफ़िल में बैठे लोगों की खूब तालियां बटोरीं। नायब सदर अब्दुल रहमान कल्ला ने सभी का आभार व्यक्त किया। मंच का संचालन जनरल सेक्रेट्री मोहम्मद नसीम व शाकिर अली, जनरल सेक्रेट्री अरमान कुरैशी ने संयुक्त रूप से किया।
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ये रहे मौजूद
उर्स कमेटी के सदर हाजी बाबू बदरुद्दीन कुरैशी, जनरल सेक्रेट्री हाजी साबिर अली, असलम कुरैशी, अबरार अली, हमीद खां मंसूरी, सरफराज मेंबर, कोषाध्यक्ष हाजी अख्तर खान, उर्स संयोजक व प्रेस क्लब अध्यक्ष राजीव बबेले सप्पू, शरीफ कुरैशी पूर्व सभासद, नदीम शबनम, मीडिया प्रभारी रिजवान उज्जमा, रमजानी दादा, शाकिर अली, चौधरी बरकत चौधरी, मो. इदरीश, हाफिज हारून, हाफिज आगर अली, मो. सैय्यद गुलाम यूनिस रब्बानी, शब्बीर कुरैशी, हारून कुरैशी, शेख इस्राइल, नसीर कुरैशी, इरफान कुरैशी, अजीम खान, शेख नत्थू उस्ताद, करीम असर, जहीर ललितपुरी, मो.रहीस खलीफा शब्बीर खान बिरधा, राजू सिंधी, गिरीश पाठक सोनू, सरवर खान, शफात मैनेजर, समीर चौबे, शरद चौबे, खुर्शीद आलम, हफीज शॉकर ,साबिर खान घड़ी साज, कलीम खान, हाजी इरशाद, रिजवान कुरैशी, आसिफ पठान, मजीद खान, अनीस खान टाल वाले, मुस्तफ़ा मेंबर, जमील अहमद, शाकिर खां, मुस्ताक खान, अब्दुल बारी सदन, आरिफ बेग, खुर्शीद मुंशी, यूसुफ सिलगन, लियाकत अली, शब्बीर मंसूरी, करीम मंसूरी बिरधा, मो. जमील बाबू, चौधरी अजमेरी भूरा, आशिद खां रोवी, शफीक कुरैशी, जाबिर खान, शकील रियाज कुरैशी, मौलाना इकरामुद्दीन आदि मौजूद रहे।
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