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सुदामा चरित्र की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रद्घालु
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मां कात्यानी माता मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा के बाद हवन पूजन करते श्रद्धालु
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। मोहल्ला नेहरू नगर में रेलवे अस्पताल के पीछे मां कात्यायनी माता मंदिर में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का हवन- पूजन के साथ समापन हो गया है। कथा व्यास जयनारायण शास्त्री ने अंतिम दिन सुदामा चरित्र की कथा का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि सुदामा संसार में सबसे अनोखे भक्त रहे हैं। वह जीवन में जितने गरीब नजर आए, उतने वे मन से धनवान थे। उन्होंने अपने सुख व दुखों को भगवान की इच्छा पर सौंप दिया था। श्रीकृष्ण और सुदामा के मिलन का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। उन्होंने कहा कि जब सुदामा भगवान श्रीकृष्ण ने मिलने आए तो उन्होंने सुदामा के फटे कपड़े नहीं देखे, बल्कि मित्र की भावनाओं को देखा। मनुष्य को अपना कर्म नहीं भूलना चाहिए। अगर सच्चा मित्र है तो श्रीकृष्ण और सुदामा की तरह होना चाहिए। जीवन में मनुष्य को श्रीकृष्ण की तरह अपनी मित्रता निभानी चाहिए।
महिलाओं ने भजन कीर्तन किए। कथा सुनने आए श्रद्धालुओं ने भक्ति रस का पान किया। समापन पर कथा व्यास जयनारायण शास्त्री ने विधि - विधान से हवन कराया। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया। मोहल्लेवासियों ने गाजे- बाजे के साथ श्रीमद्भागवत कथा की विदाई की। कथा में कोमल सिंह यादव लाला को पारीक्षत बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
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उन्होंने कहा कि सुदामा संसार में सबसे अनोखे भक्त रहे हैं। वह जीवन में जितने गरीब नजर आए, उतने वे मन से धनवान थे। उन्होंने अपने सुख व दुखों को भगवान की इच्छा पर सौंप दिया था। श्रीकृष्ण और सुदामा के मिलन का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। उन्होंने कहा कि जब सुदामा भगवान श्रीकृष्ण ने मिलने आए तो उन्होंने सुदामा के फटे कपड़े नहीं देखे, बल्कि मित्र की भावनाओं को देखा। मनुष्य को अपना कर्म नहीं भूलना चाहिए। अगर सच्चा मित्र है तो श्रीकृष्ण और सुदामा की तरह होना चाहिए। जीवन में मनुष्य को श्रीकृष्ण की तरह अपनी मित्रता निभानी चाहिए।
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महिलाओं ने भजन कीर्तन किए। कथा सुनने आए श्रद्धालुओं ने भक्ति रस का पान किया। समापन पर कथा व्यास जयनारायण शास्त्री ने विधि - विधान से हवन कराया। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया। मोहल्लेवासियों ने गाजे- बाजे के साथ श्रीमद्भागवत कथा की विदाई की। कथा में कोमल सिंह यादव लाला को पारीक्षत बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
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