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छात्रों ने आवाज उठाई तो खुला अव्यवस्थाओं का पिटारा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Aug 2016 12:57 AM IST
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student problm, lalitpur news
- फोटो : amar ujala, lalitpur news
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तालबेहट। राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय के छात्रों द्वारा की गई शिकायत की हकीकत जानने के लिए उपजिलाधिकारी हरीओम शर्मा शाम को विद्यालय पहुंचे तो वहां की व्यवस्थाएं देख उनका पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर अधीक्षक सत्यनारायण पटेल की जमकर खबर ली।
उपजिलाधिकारी ने कमरा नंबर 5 का निरीक्षण किया जहां अलमारी में कुंदे नहीं थे तथा गंदगी थी। कमरा नंबर 2 के लगे अधिकांश पंखे खराब थे। कमरा नंबर सात में पर्याप्त बल्ब नहीं थे। दो दर्जन बच्चों को लेटने के लिए मात्र नौ बेड थे। बाथरूम काफी गंदे थे, जिनके नलों में पानी नहीं आ रहा था। खिड़कियों में लगे शीशे टूटे हुए थे। बच्चों को मिली चॉदर काफी गंदी थी। रसोई घर में प्रकाश की समुचित व्यवस्था नहीं थी। बच्चों के लिए पानी तक का पर्याप्त इंतजाम नहीं था।
जिस टैंक से बच्चों को पानी दिया जाता था वह खुला मिला। समीप ही काफी गंदगी फैली थी। बदबू के कारण खड़ा होना मुश्किल था। उन्होंने पूरे परिसर की साफ सफाई कराने एवं पानी के टैंक को ताले से बंद करने के निर्देश दिए। रसोई घर में और बुरा हाल था। वहां सड़े बैगन एवं प्याज रखी थी। एक बोरी में फफूंदी युक्त रोटी एवं पूड़ियां रखी थीँ। रसोईघर में इन्हें इतने दिन तक रखने का कारण पूछने पर कोई समुचित उत्तर नहीं दे सका। एसडीएम ने मौके पर मौजूद कर्मचारियों की जमकर खबर ली और बच्चों के प्रति मातृत्व भाव दिखाने को कहा।
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तीन सौ छात्रों को पढ़ाते हैं मात्र चार अध्यापक
उपजिलाधिकारी ने विद्यालय में मौजूद स्टाफ के बारे में जानकारी ली तो बताया गया कि कक्षा दो से बारह तक की कक्षाओं में कुल तीन सौ तीस छात्र हैं। शिक्षण कार्य के लिए मात्र चार अध्यापक हैं।
साहब! नहीं मिली ड्रेस एवं किताबें
कक्षा ग्यारह के छात्रों ने बताया कि अगस्त का माह शुरू हो गया है और उन्हें अभी तक ड्रेस तथा किताबें नहीं दी गई। वह सामग्री के लिए परेशान हैं परन्तु उनकी कोई सुनता नहीं है।
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उपजिलाधिकारी ने कमरा नंबर 5 का निरीक्षण किया जहां अलमारी में कुंदे नहीं थे तथा गंदगी थी। कमरा नंबर 2 के लगे अधिकांश पंखे खराब थे। कमरा नंबर सात में पर्याप्त बल्ब नहीं थे। दो दर्जन बच्चों को लेटने के लिए मात्र नौ बेड थे। बाथरूम काफी गंदे थे, जिनके नलों में पानी नहीं आ रहा था। खिड़कियों में लगे शीशे टूटे हुए थे। बच्चों को मिली चॉदर काफी गंदी थी। रसोई घर में प्रकाश की समुचित व्यवस्था नहीं थी। बच्चों के लिए पानी तक का पर्याप्त इंतजाम नहीं था।
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जिस टैंक से बच्चों को पानी दिया जाता था वह खुला मिला। समीप ही काफी गंदगी फैली थी। बदबू के कारण खड़ा होना मुश्किल था। उन्होंने पूरे परिसर की साफ सफाई कराने एवं पानी के टैंक को ताले से बंद करने के निर्देश दिए। रसोई घर में और बुरा हाल था। वहां सड़े बैगन एवं प्याज रखी थी। एक बोरी में फफूंदी युक्त रोटी एवं पूड़ियां रखी थीँ। रसोईघर में इन्हें इतने दिन तक रखने का कारण पूछने पर कोई समुचित उत्तर नहीं दे सका। एसडीएम ने मौके पर मौजूद कर्मचारियों की जमकर खबर ली और बच्चों के प्रति मातृत्व भाव दिखाने को कहा।
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तीन सौ छात्रों को पढ़ाते हैं मात्र चार अध्यापक
उपजिलाधिकारी ने विद्यालय में मौजूद स्टाफ के बारे में जानकारी ली तो बताया गया कि कक्षा दो से बारह तक की कक्षाओं में कुल तीन सौ तीस छात्र हैं। शिक्षण कार्य के लिए मात्र चार अध्यापक हैं।
साहब! नहीं मिली ड्रेस एवं किताबें
कक्षा ग्यारह के छात्रों ने बताया कि अगस्त का माह शुरू हो गया है और उन्हें अभी तक ड्रेस तथा किताबें नहीं दी गई। वह सामग्री के लिए परेशान हैं परन्तु उनकी कोई सुनता नहीं है।