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सवालों के घेरे में टैंकर जलापूर्ति के स्टीमेट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 30 Apr 2016 12:59 AM IST
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water problem,lalitpur news
- फोटो : demo
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ललितपुर। जिले के अभावग्रस्त ग्रामों में लोगों की प्यास बुझाने को लगाए जाने वाले टैंकरों के स्टीमेट पर सवाल खड़े हो गए हैं। जल निगम ने 4,500 लीटर क्षमता के 222 वाटर टैंकर लगाने पर करीब 5.64 करोड़ रुपए व्यय होने का अनुमान लगाया गया है, जिसमें पर्यवेक्षण शुल्क अलग देने का जिक्र है। वहीं, जल संस्थान ने 50 ग्रामों में 90वें दिन टैंकर चलाने पर 1.26 करोड़ रुपए का स्टीमेट तैयार किया है। दोनों के दामों में अंतर होने से स्टीमेट के अनुमोदन में पेच फंस गया है।
भूगर्भ जल स्तर तेजी से नीचे की ओर खिसकने से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल का भीषण संकट उत्पन्न हो गया है। पिछले दिनों जल निगम ने अभावग्रस्त ग्रामों का चिह्नीकरण किया था, जिसमें जिले के 93 गांवों में पेयजल समस्या पाई गई थी। इस संख्या में निरंतर बदलाव आ रहा है। ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़कर 125 हो गई है। चिह्नित गांवों में पीने के पानी का इंतजाम टैंकर के जरिए किया जा रहा है।
जल निगम ने टैंकर से जलापूर्ति का स्टीमेट तैयार किया है, जिसमें चिह्नित ग्रामीण क्षेत्रों में 4,500 लीटर क्षमता के 222 वाटर टैंकर इस्तेमाल होंगे। जिस पर करीब पांच करोड़ रुपए खर्च होगा। इसके अतिरिक्त पर्यवेक्षण शुल्क अलग से देना होगा। इस तरह कुल 5.64 करोड़ रुपए का खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।
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उधर, जल संस्थान ने अभावग्रस्त क्षेत्रों में प्रति चक्कर पानी के टैंकर संचालन को स्टीमेट तैयार किया है। जिसमें टैंकर का किराया मय डीजल, ड्राइवर एवं टूट-फूट सहित 350 रुपए की दर से प्रति चक्कर, कुएं
से टैंकर भरना मय डीजल, पंपिग सेट, सेक्सन पाइप आदि सहित मजदूूरी 200 रुपए दर, जलापूर्ति संबंधी कार्यों के लिए हेल्पर 60 रुपए प्रति चक्कर, 50 ग्रामों में 90 दिनों के लिए संचालन पर व्यय 1.26 करोड़ रुपए का आकलन किया है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि जल निगम व जल संस्थान के स्टीमेट में रेटों का अंतर है। जिससे स्टीमेट के अनुमोदन का पेच फस गया है। हालांकि, पेयजल की समस्या को देखते हुए टैंकरों से जलापूर्ति का काम आरंभ हो गया है।
मजदूरी के रेट में अंतर
मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों को 174 रुपए प्रतिदिन का रेट रखा गया है। वहीं, जल संस्थान के स्टीमेट में कुएं से टैंकर भरने वाले मजदूर को 200 रुपए का रेट तय किया है। इसी तरह के अंतर से स्टीमेट पर सवाल खड़े हो गए हैं।
126 टैंकरों से हो रही जलापूर्ति
जिले के अभावग्रस्त ग्रामों में 71 टैंकर बव जिन ग्रामों में भूजल स्तर जभिगर गया है, उनमें 55 टैंकर से जलापूर्ति हो रही है। इस तरह करीब 125 ग्रामों में 126 टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही है।
अब ब्लॉक स्तर से तैयार होंगे स्टीमेट
जल निगम और जल संस्थान के स्टीमेट में अंतर आने से अब ब्लॉक स्तर पर स्टीमेट तैयार कराए जाएंगे।
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भूगर्भ जल स्तर तेजी से नीचे की ओर खिसकने से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल का भीषण संकट उत्पन्न हो गया है। पिछले दिनों जल निगम ने अभावग्रस्त ग्रामों का चिह्नीकरण किया था, जिसमें जिले के 93 गांवों में पेयजल समस्या पाई गई थी। इस संख्या में निरंतर बदलाव आ रहा है। ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़कर 125 हो गई है। चिह्नित गांवों में पीने के पानी का इंतजाम टैंकर के जरिए किया जा रहा है।
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जल निगम ने टैंकर से जलापूर्ति का स्टीमेट तैयार किया है, जिसमें चिह्नित ग्रामीण क्षेत्रों में 4,500 लीटर क्षमता के 222 वाटर टैंकर इस्तेमाल होंगे। जिस पर करीब पांच करोड़ रुपए खर्च होगा। इसके अतिरिक्त पर्यवेक्षण शुल्क अलग से देना होगा। इस तरह कुल 5.64 करोड़ रुपए का खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।
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उधर, जल संस्थान ने अभावग्रस्त क्षेत्रों में प्रति चक्कर पानी के टैंकर संचालन को स्टीमेट तैयार किया है। जिसमें टैंकर का किराया मय डीजल, ड्राइवर एवं टूट-फूट सहित 350 रुपए की दर से प्रति चक्कर, कुएं
से टैंकर भरना मय डीजल, पंपिग सेट, सेक्सन पाइप आदि सहित मजदूूरी 200 रुपए दर, जलापूर्ति संबंधी कार्यों के लिए हेल्पर 60 रुपए प्रति चक्कर, 50 ग्रामों में 90 दिनों के लिए संचालन पर व्यय 1.26 करोड़ रुपए का आकलन किया है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि जल निगम व जल संस्थान के स्टीमेट में रेटों का अंतर है। जिससे स्टीमेट के अनुमोदन का पेच फस गया है। हालांकि, पेयजल की समस्या को देखते हुए टैंकरों से जलापूर्ति का काम आरंभ हो गया है।
मजदूरी के रेट में अंतर
मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों को 174 रुपए प्रतिदिन का रेट रखा गया है। वहीं, जल संस्थान के स्टीमेट में कुएं से टैंकर भरने वाले मजदूर को 200 रुपए का रेट तय किया है। इसी तरह के अंतर से स्टीमेट पर सवाल खड़े हो गए हैं।
126 टैंकरों से हो रही जलापूर्ति
जिले के अभावग्रस्त ग्रामों में 71 टैंकर बव जिन ग्रामों में भूजल स्तर जभिगर गया है, उनमें 55 टैंकर से जलापूर्ति हो रही है। इस तरह करीब 125 ग्रामों में 126 टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही है।
अब ब्लॉक स्तर से तैयार होंगे स्टीमेट
जल निगम और जल संस्थान के स्टीमेट में अंतर आने से अब ब्लॉक स्तर पर स्टीमेट तैयार कराए जाएंगे।