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स्टांप : 266 मामलों में पकड़ी 30.47 करोड़ रुपये की चोरी
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भूमि का स्वरूप छुपाकर करते हैं राजस्व की चोरी, लगातार बढ़ रहे मामले
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद में स्टांप चोरी के मामले बढ़ रहे हैं। पिछले डेढ़ वर्ष में 266 मामलों में 30.47 कराेड़ रुपये की चोरी पकड़ी गई है। सबसे ज्यादा प्रकरण शहर के विस्तार इलाके के पाए गए हैं।
जनपद में कुछ शातिर लोग स्टांप ड्यूटी बचाने के लिए बैनामों में गलत चौहद्दी व आसपास की व्यावसायिक गतिविधियों को छिपाकर स्टांप चोरी कर लेते हैं। शासन के आदेश पर नियमित बैनामों की जांच विभिन्न स्तरों होती है। जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी, अपर महानिरीक्षण स्टांप व सब रजिस्टार सभी लोग मौके पर स्थलीय निरीक्षण कर स्टांप चोरी की जांच करते हैं।
जनपद में अभी तक कलेक्टर न्यायालय में 157 वाद, अपर कलेक्ट्रेट में 61 वाद व सहायक आयुक्त स्टांप के यहां पर वाद चल रहे हैं। इन सभी में इन सभी प्रकरणों में 30 करोड़ 47 लाख की स्टांप चोरी गई है। हालांकि कई वादों का निस्तारण भी होता है। अप्रैल से लेकर अगस्त तक करीब 77 मामले दर्ज किए गए हैं। तो वहीं अभी तक 73 वादों का निस्तारण कर स्टांप ड्यूटी वसूली निर्धारण की गई है।
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तीन मामलों में 58 लाख रुपये की वसूली
केस-एक
मेसर्स बालाजी इंटर प्राइजेज ने एक भूमि शहर की सीमा में खरीदी थी, जिसमें जांच में 3722700 रुपये की स्टांप चोरी पाई गई। इसके लिए कलेक्टर न्यायालय ने शुल्क वसूली के आरसी जारी करने के निर्देश दिए हैं।
केस- दो
रेखा राज ने शहर सीमा में भूमि क्रय की थी, लेकिन भूमि का स्वरूप गलत दर्शाते हुए 104900 रुपये स्टांप चोरी की जांच में पाई गई। कलेक्टर न्यायालय में शुल्क वसूली के आदेश जारी कर दिए हैं।
केस-तीन
मेसर्स सिटी लाइफ फर्म ने शहर की सीमा में अंदर भूमि खरीदी, लेकिन उसमें भूमि की कीमत को कम आंकते हुए 1083570 रुपये की स्टांप चोरी की है। जांच में पुष्टि होने के बाद कलेक्टर न्यायालय ने वसूली के आदेश जारी कर दिए हैं।
वर्जन
जो भी बड़े बैनामे होते है उनकी जनपद स्तरीय अधिकारी से जांच कराकर स्टांप चोरी की पुष्टि कर वाद दर्ज किया जाता है जिसमें क्रेता व विक्रेता को अपना पक्ष रखने का अधिकार होता है इसके बाद राजस्व न्यायालय वसूली निर्धारित कर राजस्व वसूला जाता है। -अक्षय त्रिपाठी, डीएम
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद में स्टांप चोरी के मामले बढ़ रहे हैं। पिछले डेढ़ वर्ष में 266 मामलों में 30.47 कराेड़ रुपये की चोरी पकड़ी गई है। सबसे ज्यादा प्रकरण शहर के विस्तार इलाके के पाए गए हैं।
जनपद में कुछ शातिर लोग स्टांप ड्यूटी बचाने के लिए बैनामों में गलत चौहद्दी व आसपास की व्यावसायिक गतिविधियों को छिपाकर स्टांप चोरी कर लेते हैं। शासन के आदेश पर नियमित बैनामों की जांच विभिन्न स्तरों होती है। जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी, अपर महानिरीक्षण स्टांप व सब रजिस्टार सभी लोग मौके पर स्थलीय निरीक्षण कर स्टांप चोरी की जांच करते हैं।
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जनपद में अभी तक कलेक्टर न्यायालय में 157 वाद, अपर कलेक्ट्रेट में 61 वाद व सहायक आयुक्त स्टांप के यहां पर वाद चल रहे हैं। इन सभी में इन सभी प्रकरणों में 30 करोड़ 47 लाख की स्टांप चोरी गई है। हालांकि कई वादों का निस्तारण भी होता है। अप्रैल से लेकर अगस्त तक करीब 77 मामले दर्ज किए गए हैं। तो वहीं अभी तक 73 वादों का निस्तारण कर स्टांप ड्यूटी वसूली निर्धारण की गई है।
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तीन मामलों में 58 लाख रुपये की वसूली
केस-एक
मेसर्स बालाजी इंटर प्राइजेज ने एक भूमि शहर की सीमा में खरीदी थी, जिसमें जांच में 3722700 रुपये की स्टांप चोरी पाई गई। इसके लिए कलेक्टर न्यायालय ने शुल्क वसूली के आरसी जारी करने के निर्देश दिए हैं।
केस- दो
रेखा राज ने शहर सीमा में भूमि क्रय की थी, लेकिन भूमि का स्वरूप गलत दर्शाते हुए 104900 रुपये स्टांप चोरी की जांच में पाई गई। कलेक्टर न्यायालय में शुल्क वसूली के आदेश जारी कर दिए हैं।
केस-तीन
मेसर्स सिटी लाइफ फर्म ने शहर की सीमा में अंदर भूमि खरीदी, लेकिन उसमें भूमि की कीमत को कम आंकते हुए 1083570 रुपये की स्टांप चोरी की है। जांच में पुष्टि होने के बाद कलेक्टर न्यायालय ने वसूली के आदेश जारी कर दिए हैं।
वर्जन
जो भी बड़े बैनामे होते है उनकी जनपद स्तरीय अधिकारी से जांच कराकर स्टांप चोरी की पुष्टि कर वाद दर्ज किया जाता है जिसमें क्रेता व विक्रेता को अपना पक्ष रखने का अधिकार होता है इसके बाद राजस्व न्यायालय वसूली निर्धारित कर राजस्व वसूला जाता है। -अक्षय त्रिपाठी, डीएम