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लाखों खर्च, फिर भी धूल खा रहीं कूड़ा गाड़ियां
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 26 Oct 2016 12:35 AM IST
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nagar palika lalitpur
- फोटो : demo
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शहर के मुहल्लों में कचरा एकत्रित करने व कचरा ढोने के लिए नगर पालिका ने करीब दो माह पूर्व 79.28 लाख रुपये खर्च करके 80 डस्टबिनों व 10 आपे की खरीद कर ली है। नगर पालिका अध्यक्ष ने विगत 23 दिन पूर्व 02 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर इनको हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया था। अब पूरा एक माह बीतने वाला है, लेकिन शहर का यह गाड़ियां शोपीस बनकर विभाग के स्टोर रूम में धूल खा रहीं हैं। जबकि शहर के मुहल्लों की सकरी गलियों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
शहर की गलियों से कचरा ढोने के लिए नगर पालिका ने करीब 75 लाख रुपये खर्च करके दस ऑटो गाड़ियाें की खरीदी की थी। विगत दो अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर देश भर में चलाए जा रहे विशेष स्वच्छता सप्ताह के तहत नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल व नगर पालिका अधिशासी अधिकारी राकेश कुमार ने उक्त आपे को हरी झंडी दिखाकर आपे को शहर का कचरा ढोने के लिए रवाना कर दिया था। उक्त आपे को हरी झंडी मिले हुए पूरा एक माह बीतने वाला है, लेकिन नगर पालिका इन आपे को शहर की सड़कों पर दौड़ने के लिए तैयार नहीं कर पा रही है। लाखों रुपए की लागत से खरीदी गई उक्त आपे गाड़ियां शहर की गलियों का कचरा ढोने की बजह शोपीस बनकर नगर पालिका के स्टोर की शोभा बढ़ा रही हैं। नगर पालिका ने इन आपे की खरीदी करीब दो माह पूर्व कर ली थी, लेकिन विभाग अभी तक इन आपे गाड़ियों का न तो रजिस्टेशन करा पाया है और न ही अभी तक बीमा हो सका है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि एआरटीओ विभाग द्वारा रजिस्टेशन में लेटलतीफी की जा रही है। इसी वजह से आपे को उपयोग में लाने में समस्या आ रही है। इन आपे की निगरानी करने के लिए इसमें जीपीएस लोकेशन सिस्टम भी लगाया जाना है, लेकिन रजिस्टेशन नहीं हो पाने के कारण जीपीएस सिस्टम लगने में भी देरी हो रही है।
सता रही डस्टबिन के रख-रखाव की समस्या
नगर पालिका ने चौदहवें वित्त आयोग के कुल 1.53 करोड़ रुपए में से 79.28 लाख रुपए शहर की सफाई व्यवस्था के लिए व्यय किए जाने थे। नगर पालिका ने उक्त रुपयों से संकरी गलियों से कचरा ढोने के लिए करीब 75 लाख रुपये की लागत से उक्त दस आपे गाड़ियों की खरीद की थी। बकाया 4 लाख रुपये का व्यय प्लास्टिक के 80 डस्टबिनों की खरीदी करने के लिए किया जाना था। विभाग ने विगत अगस्त माह में डस्टबिनों की खरीदी कर ली है, लेकिन विभाग इन डस्टबिनों को शहर में सार्वजनिक तौर पर रखने के लिए कतरा रहा है। विभाग ने लाखों रुपये खर्च करके डस्टबिनों की खरीदी कर ली है, इसके बाद नगर पालिका के अधिकारी को उक्त डस्टबिनों के रखरखाव की समस्या सताने लगी है। जिस कारण यह डस्टबिन अब तक शहर में नहीं रखे गए हैं। नगर पालिका ने इससे पूर्व वर्ष 2014-15 में भी प्लास्टिक के करीब एक सैंकड़ा डस्टबिन बाजार में रखे थे, जिनकों स्थानीय लोगों द्वारा जलाकर नष्ट कर दिया गया है। विभाग को अब यही भय है कि कहीं पुराने डस्टबिनों की तहर उनको भी नष्ट न कर दिया जाए या फिर इनकी चोरी न कर ली जाए। लेकिन विभाग को यह डस्टबिन खरीदने से पहले सोचना चाहिए था।
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प्रभावित हो रही व्यवस्था
शहर की संकरी गलियों का कचरा ढोने के लिए नगर पालिका के पास साधन उपलब्ध नहीं थी। इसी वजह से विभाग ने 10 गाड़ियां खरीदी थी। लेकिन गाड़ियों की खरीद होने के बाद भी इनका उपयोग नहीं किया जा रहा है, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था व शासकीय नीतियां भी प्रभावित हो रही है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की नीति को प्रमुखता से लिया गया है। लेकिन शहर में शासन की यह डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की नीति लागू नहीं हो पा रही है। नगर पालिका के मुख्य सफाई निरीक्षक आरके लवानियां व दिनेश बिरौनियां बताते हैं कि शहर की संकरी गलियों का कचरा ढोने के लिए विभाग में पर्याप्त साधन नहीं है व उक्त आपे गाड़ियों का सुचारु संचालन होने के बाद ही इस डोर-टू-डोर कलेक्शन नीति को शहर में लागू कर पाएंगे। यह निति लागू नहीं हो पाने के कारण शहर की सफाई व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है, शहर के मुहल्लों में जगह-जगह गंदगी के अंबार लगे हुए हैं। विभाग द्वारा खरीदी गई आपे को सड़कों पर नहीं उतारने से सफाई नीति व व्यवस्था दोनों की प्रभावित हो रही है।
गांधी जयंती पर आपे गाड़ियों को हरी झंडी स्वच्छ भारत मिशन के तहत चलाए जा रहे स्वच्छता विशेष सप्ताह के तहत शासन की मंशा के अनुरूप दिखाई गई थी। आपे का रजिस्टेशन नहीं हो पाने के कारण गाड़ियों को सड़कों पर नहीं उतारा जा रहा है। विभागीय अधिकारियों द्वारा आपे का रजिस्टेशन करवाने व अन्य औपचारिकताएं पूर्ण कराई जा रही हैं, जल्द ही आपे गाड़ियों से शहर का कचरा ढोने का काम शुरू हो जाएगा।
राकेश कुमार
नगर पालिका अधिशासी अधिकारी
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शहर की गलियों से कचरा ढोने के लिए नगर पालिका ने करीब 75 लाख रुपये खर्च करके दस ऑटो गाड़ियाें की खरीदी की थी। विगत दो अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर देश भर में चलाए जा रहे विशेष स्वच्छता सप्ताह के तहत नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल व नगर पालिका अधिशासी अधिकारी राकेश कुमार ने उक्त आपे को हरी झंडी दिखाकर आपे को शहर का कचरा ढोने के लिए रवाना कर दिया था। उक्त आपे को हरी झंडी मिले हुए पूरा एक माह बीतने वाला है, लेकिन नगर पालिका इन आपे को शहर की सड़कों पर दौड़ने के लिए तैयार नहीं कर पा रही है। लाखों रुपए की लागत से खरीदी गई उक्त आपे गाड़ियां शहर की गलियों का कचरा ढोने की बजह शोपीस बनकर नगर पालिका के स्टोर की शोभा बढ़ा रही हैं। नगर पालिका ने इन आपे की खरीदी करीब दो माह पूर्व कर ली थी, लेकिन विभाग अभी तक इन आपे गाड़ियों का न तो रजिस्टेशन करा पाया है और न ही अभी तक बीमा हो सका है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि एआरटीओ विभाग द्वारा रजिस्टेशन में लेटलतीफी की जा रही है। इसी वजह से आपे को उपयोग में लाने में समस्या आ रही है। इन आपे की निगरानी करने के लिए इसमें जीपीएस लोकेशन सिस्टम भी लगाया जाना है, लेकिन रजिस्टेशन नहीं हो पाने के कारण जीपीएस सिस्टम लगने में भी देरी हो रही है।
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सता रही डस्टबिन के रख-रखाव की समस्या
नगर पालिका ने चौदहवें वित्त आयोग के कुल 1.53 करोड़ रुपए में से 79.28 लाख रुपए शहर की सफाई व्यवस्था के लिए व्यय किए जाने थे। नगर पालिका ने उक्त रुपयों से संकरी गलियों से कचरा ढोने के लिए करीब 75 लाख रुपये की लागत से उक्त दस आपे गाड़ियों की खरीद की थी। बकाया 4 लाख रुपये का व्यय प्लास्टिक के 80 डस्टबिनों की खरीदी करने के लिए किया जाना था। विभाग ने विगत अगस्त माह में डस्टबिनों की खरीदी कर ली है, लेकिन विभाग इन डस्टबिनों को शहर में सार्वजनिक तौर पर रखने के लिए कतरा रहा है। विभाग ने लाखों रुपये खर्च करके डस्टबिनों की खरीदी कर ली है, इसके बाद नगर पालिका के अधिकारी को उक्त डस्टबिनों के रखरखाव की समस्या सताने लगी है। जिस कारण यह डस्टबिन अब तक शहर में नहीं रखे गए हैं। नगर पालिका ने इससे पूर्व वर्ष 2014-15 में भी प्लास्टिक के करीब एक सैंकड़ा डस्टबिन बाजार में रखे थे, जिनकों स्थानीय लोगों द्वारा जलाकर नष्ट कर दिया गया है। विभाग को अब यही भय है कि कहीं पुराने डस्टबिनों की तहर उनको भी नष्ट न कर दिया जाए या फिर इनकी चोरी न कर ली जाए। लेकिन विभाग को यह डस्टबिन खरीदने से पहले सोचना चाहिए था।
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प्रभावित हो रही व्यवस्था
शहर की संकरी गलियों का कचरा ढोने के लिए नगर पालिका के पास साधन उपलब्ध नहीं थी। इसी वजह से विभाग ने 10 गाड़ियां खरीदी थी। लेकिन गाड़ियों की खरीद होने के बाद भी इनका उपयोग नहीं किया जा रहा है, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था व शासकीय नीतियां भी प्रभावित हो रही है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की नीति को प्रमुखता से लिया गया है। लेकिन शहर में शासन की यह डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की नीति लागू नहीं हो पा रही है। नगर पालिका के मुख्य सफाई निरीक्षक आरके लवानियां व दिनेश बिरौनियां बताते हैं कि शहर की संकरी गलियों का कचरा ढोने के लिए विभाग में पर्याप्त साधन नहीं है व उक्त आपे गाड़ियों का सुचारु संचालन होने के बाद ही इस डोर-टू-डोर कलेक्शन नीति को शहर में लागू कर पाएंगे। यह निति लागू नहीं हो पाने के कारण शहर की सफाई व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है, शहर के मुहल्लों में जगह-जगह गंदगी के अंबार लगे हुए हैं। विभाग द्वारा खरीदी गई आपे को सड़कों पर नहीं उतारने से सफाई नीति व व्यवस्था दोनों की प्रभावित हो रही है।
गांधी जयंती पर आपे गाड़ियों को हरी झंडी स्वच्छ भारत मिशन के तहत चलाए जा रहे स्वच्छता विशेष सप्ताह के तहत शासन की मंशा के अनुरूप दिखाई गई थी। आपे का रजिस्टेशन नहीं हो पाने के कारण गाड़ियों को सड़कों पर नहीं उतारा जा रहा है। विभागीय अधिकारियों द्वारा आपे का रजिस्टेशन करवाने व अन्य औपचारिकताएं पूर्ण कराई जा रही हैं, जल्द ही आपे गाड़ियों से शहर का कचरा ढोने का काम शुरू हो जाएगा।
राकेश कुमार
नगर पालिका अधिशासी अधिकारी