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गौरैया बचाओ,पर्यावरण को खुशहाल बनाओ
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गौरैया के जलपात्र दिखाते हुए बच्चे
- फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। वर्तमान समय में विलुप्त हो रही गौरैया का संरक्षण करना बहुत ही आवश्यक है। गौरैया संरक्षण अभियान में बच्चे भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने गौरैया को बचाने के लिए जल पात्रों को छत व कमरों की अलमारियों में रखना आरंभ कर दिया है। लोग गौरैया बचाओ, पर्यावरण को खुशहाल बनाओ संदेश दे रहे हैं।
गौरैया बचाओ पर काम कर रही संस्था के महामंत्री ध्रूव साहू ने बताया कि करुणा इंटरनेशनल के माध्यम से विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। बच्चों में पक्षियों के प्रति प्रेम, करुणा की भावना जागृत कर रहे हैं। गौरैया घोंसला व जलपात्रों को उचित स्थानों पर लगा रहे हैं। कई जगह बच्चे मिट्टी के बर्तनों मं गौरैया के लिए दाना-पानी रख रहे हैं।
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करुणा इंटरनेशनल द्वारा गौरैया संरक्षण अभियान चलाकर बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से बच्चों को घरों, बाग-बगीचे में गौरैया घर लगाने की प्रेरणा दी जा रही है, जिससे बच्चे पर्यावरण संरक्षण में महती भूमिका निभा सकें।
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अक्षय अलया-अध्यक्ष- करुणा इंटरनेशनल ललितपुर केंद्र
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वर्ष 1997 में मैंने घर की छत पर पक्षियों को भोजन देने के लिए पक्षीदाना स्टैंड बनवाया था। जिसमें प्रात:काल सैंकडों की संख्या में तोता, कबूतर, कौआ, गौरैया आकर अनाज खाती व पानी पीती हैं। मुझे इस कार्य को करने में बड़ा ही आनंद का अनुभव होता है।
- केपी पाण्डेय शिक्षाविद
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गौरैया बचाओ पर काम कर रही संस्था के महामंत्री ध्रूव साहू ने बताया कि करुणा इंटरनेशनल के माध्यम से विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। बच्चों में पक्षियों के प्रति प्रेम, करुणा की भावना जागृत कर रहे हैं। गौरैया घोंसला व जलपात्रों को उचित स्थानों पर लगा रहे हैं। कई जगह बच्चे मिट्टी के बर्तनों मं गौरैया के लिए दाना-पानी रख रहे हैं।
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करुणा इंटरनेशनल द्वारा गौरैया संरक्षण अभियान चलाकर बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से बच्चों को घरों, बाग-बगीचे में गौरैया घर लगाने की प्रेरणा दी जा रही है, जिससे बच्चे पर्यावरण संरक्षण में महती भूमिका निभा सकें।
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अक्षय अलया-अध्यक्ष- करुणा इंटरनेशनल ललितपुर केंद्र
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वर्ष 1997 में मैंने घर की छत पर पक्षियों को भोजन देने के लिए पक्षीदाना स्टैंड बनवाया था। जिसमें प्रात:काल सैंकडों की संख्या में तोता, कबूतर, कौआ, गौरैया आकर अनाज खाती व पानी पीती हैं। मुझे इस कार्य को करने में बड़ा ही आनंद का अनुभव होता है।
- केपी पाण्डेय शिक्षाविद