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Lalitpur News: सोंरई के रितिक ने थाईलैंड में लहराया भारत का परचम
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मड़ावरा। सुविधाओं का अभाव हो या मार्गदर्शन की कमी, यदि इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा मंजिल की राह नहीं रोक सकती। कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी तहसील क्षेत्र के ग्राम सोंरई निवासी रितिक मिश्रा की है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वॉलीबॉल में देश का प्रतिनिधित्व कर जनपद को गौरवान्वित किया है।
रितिक के पिता संतोष मिश्रा सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं और खनिज विभाग में डीलिंग ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं। रितिक ने प्रारंभिक शिक्षा कस्बे के मदर्स प्राइड कॉनवेंट पब्लिक स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद कक्षा छह से बारहवीं तक द सन राइज इंटर कॉलेज, कुआघोषी में अध्ययन किया। वर्तमान में वह पहलवान ग्रुप ऑफ कॉलेज, ललितपुर से बीएससी की पढ़ाई कर रहे हैं।
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पुराने तहसील परिसर से शुरू हुआ खेल का सफर
पढ़ाई के साथ बचपन से ही रितिक की खेलों में विशेष रुचि रही। गांव से कस्बे में रहने के दौरान पुराने तहसील परिसर में स्थानीय बच्चों के साथ वॉलीबॉल खेलना शुरू किया। लगातार अभ्यास और मेहनत से उनकी प्रतिभा में निखार आया और उन्हें मध्यप्रदेश के बलदेवगढ़ व ललितपुर के बांसी की टीमों में खेलने का अवसर मिला। रितिक के अनुसार, इसी दौरान उनकी मुलाकात खिलाड़ी मुन्ना से हुई, जिन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचान कर उसे तराशने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बेहतर प्रदर्शन के चलते उन्हें नेशनल स्तर पर खेलने का अवसर मिला। छत्तीसगढ़, हरियाणा, पानीपत और चेन्नई में आयोजित प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन के बाद उनके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के रास्ते खुले।
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विदेश में किया देश का प्रतिनिधित्व
रितिक की मेहनत और शानदार प्रदर्शन का परिणाम रहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम के साथ थाईलैंड में खेलने का अवसर मिला। सीमित संसाधनों के बीच इस मुकाम तक पहुंचकर उन्होंने न केवल अपने परिवार और सोंरई गांव, बल्कि पूरे जनपद और देश का नाम रोशन किया। जहां उन्होंने गोल्ड मेडल जीता और अन्य पुरस्कारों से पुरस्कृत हुए। रितिक का सपना भविष्य में अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम में स्थायी चयन हासिल करना है। इसके साथ ही वह भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहते हैं। उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को सीमित समझ लेते हैं।
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रितिक के पिता संतोष मिश्रा सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं और खनिज विभाग में डीलिंग ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं। रितिक ने प्रारंभिक शिक्षा कस्बे के मदर्स प्राइड कॉनवेंट पब्लिक स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद कक्षा छह से बारहवीं तक द सन राइज इंटर कॉलेज, कुआघोषी में अध्ययन किया। वर्तमान में वह पहलवान ग्रुप ऑफ कॉलेज, ललितपुर से बीएससी की पढ़ाई कर रहे हैं।
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पुराने तहसील परिसर से शुरू हुआ खेल का सफर
पढ़ाई के साथ बचपन से ही रितिक की खेलों में विशेष रुचि रही। गांव से कस्बे में रहने के दौरान पुराने तहसील परिसर में स्थानीय बच्चों के साथ वॉलीबॉल खेलना शुरू किया। लगातार अभ्यास और मेहनत से उनकी प्रतिभा में निखार आया और उन्हें मध्यप्रदेश के बलदेवगढ़ व ललितपुर के बांसी की टीमों में खेलने का अवसर मिला। रितिक के अनुसार, इसी दौरान उनकी मुलाकात खिलाड़ी मुन्ना से हुई, जिन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचान कर उसे तराशने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बेहतर प्रदर्शन के चलते उन्हें नेशनल स्तर पर खेलने का अवसर मिला। छत्तीसगढ़, हरियाणा, पानीपत और चेन्नई में आयोजित प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन के बाद उनके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के रास्ते खुले।
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विदेश में किया देश का प्रतिनिधित्व
रितिक की मेहनत और शानदार प्रदर्शन का परिणाम रहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम के साथ थाईलैंड में खेलने का अवसर मिला। सीमित संसाधनों के बीच इस मुकाम तक पहुंचकर उन्होंने न केवल अपने परिवार और सोंरई गांव, बल्कि पूरे जनपद और देश का नाम रोशन किया। जहां उन्होंने गोल्ड मेडल जीता और अन्य पुरस्कारों से पुरस्कृत हुए। रितिक का सपना भविष्य में अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम में स्थायी चयन हासिल करना है। इसके साथ ही वह भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहते हैं। उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को सीमित समझ लेते हैं।