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छोटे सिक्के बने परेशानी का सबब, व्यापारी व ग्राहकों में होता विवाद
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बाजार में नही चल रहे एक व दो रूपए के सिक्के
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। शहर में छोटे सिक्के आम लोगों व व्यापारियों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। सामान की खरीदारी के दौरान आए दिन व्यापारियों व ग्राहकों में सिक्कों को लेकर विवाद की स्थिति बनती जा रही है। ऑटो व बस चालक भी सिक्कों के लेनदेन में मना करते हैं। यहां तक कि मंदिरों में भी अब पुजारी एक व दो रुपये के सिक्के नहीं बल्कि दस रुपए से अधिक का चढ़ावा ले रहे हैं। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड या फिर शहरों में भिखारी भी छोटे सिक्के लेने से मना कर दे रहे हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक की गाइड लाइन के अनुसार भले ही एक, दो, पांच व दस रुपए के सिक्केे चलन में रखे गए हैं, इसके बावजूद भी एक, दो व 10 रुपये के सिक्कों को लेकर अफवाहों का बाजार लगातार गर्म है। जिससे तमाम मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। शहर में एक, दो और पांच रुपए के सिक्के के लेनदेन को लेकर आए दिन दुुकानदारों व ग्राहकों में विवाद की स्थिति पैदा हो रही है। ग्राहक जब सामान लेने के लिए दुकानों पर पहुंच रहे हैं, तो अधिकांश फुुटकर व थोक विक्रेता छोटे सिक्के लेने से मना कर दे रहे हैं। जिससे ग्राहकों का विवाद आए दिन दुकानदारों से देखने को मिल रहा है। वहीं कई बार जब दुकानदार भी ग्राहकों को फुटकर रुपए के बदले सिक्के थमाते हैं, तो ग्राहक भी मना कर दे हैं। ऐसे में कुछ दिनों से शहर में छोटे सिक्कों का लेनदेन बंद सा होता जा रहा है। वहीं जब दुकानदार भी एक हजार रुपए या इससे अधिक रुपए के छोटे सिक्के लेकर बैंकों में जमा करने पहुंचते हैं, तो बैंकों पर भी सिक्के जमा नहीं करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में कई बड़े व खुदरा व्यापारियों के पास एक से दो लाख रुपए तक के सिक्के जमा हो गए हैं। जिसके चलते अब शहर में छोटे सिक्कों का लेनदेन परेशानी का सबब बन गया है। हालांकि, बैंकों के अधिकारी एक हजार रुपए तक के सिक्के जमा आसानी से करना बता रहे हैं।
भिखारी भी मांगता दस का नोट, सिक्के लेने से कर रहे मना
शहर में भिखारियों का स्तर भी बढ़ गया है। अब भिखारी भिक्षा मांगने के दौरान एक, दो या पांच रुपए के सिक्के नहीं बल्कि दस या इससे अधिक रुपए का नोट ही मांगता है। यदि कोई भिखारियों पर दया करके एक, दो या पांच रुपए के सिक्के देता भी है तो भिखारी उसे वहीं टोक देता है और सिक्के लेने से मना कर देता है।
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गुमटी ठेले वाले भी नहीं ले रहे छोटे सिक्के
एक व दो रुपए के सिक्के देकर सामान लेना अब आसान नहीं रह गया है। दस रुपए से कम के सिक्के लेने में दुकानदार आनाकानी करते हैं। गुुमटी ठेले वाले भी सामान खरीदने पर छोटे सिक्के नहीं ले रहे हैं। अधिक सामान लेने पर भी बड़े दुकानदारों द्वारा छोटे सिक्के थमा दिए जाते हैं, लेकिन जब सामान के बदले उन्हें सिक्के दिए जाते हैं तो वह सामान देने से साफ मना कर देते हैं।
कृष्णकांत मिश्रा, नागरिक।
छोटे सिक्के की समस्या जिला में अधिक बढ़ गई है। सिक्के लेकर जब बाजार में सामान खरीदने जाते हैं, तो दुकानदार छोटे सिक्के नहीं चलने की बात कर सामान देने से मना कर देते हैं। दस रुपए या इससे अधिक का नोट देने के बाद भी दुकानदार सामान देने को राजी होते हैं।
चंद्रकांत नायक, नागरिक।
फुटकर दुकानदार ले रहे, बड़े दुकानदार करते आनाकानी
शहर में एक व दो रुपए के सिक्के फुटकर छोटे दुकानदार तो ले रहे हैं, लेकिन कई जगह दुकानदार सिक्के लेने से साफ मना कर दे रहे हैं। ऑटो चालक भी सवारियों से छोटे सिक्के लेने से मना कर रहे हैं। ऑटो चालक दस रुपए का नोट या सिक्के तो लेते हैं, लेकिन एक व दो रुपए के नोट नहीं लेते हैं।
नरेंद्र सिंह राठौर, नागरिक।
बैंकों में व्यापारियों को सिक्का जमा करने में हो रही परेशानी
बैंकों में सिक्का जमा करने में व्यापारियों को परेशानी हो रही है। कई सरकारी और प्राइवेट बैंक सिक्का जमा करने में दिक्कत पैदा कर रहे हैं। इस संबंध में जिलाधिकारी के माध्यम से बैठक में भी सिक्के जमा नहीं करने का मामला उठाया गया है। खुदरा व्यापारियों के पास एक से दो लाख रुपए तक के छोटे सिक्के जमा हो गए हैं। खुदरा व्यापारी के पास यही पूंजी होती है। सिक्के जमा नहीं होने से परेशानी बढ़ गई है।
शैलेंद्र सिंघई, महामंत्री जिला उद्योग व्यापार मंडल।
सभी प्रकार के सिक्के चलन में हैं और बैंकों में जमा किए जा रहे हैं। बैंकों से अब छोटे सिक्के बाहर नहीं दिए जा रहे हैं। नियम सभी के लिए बराबर हैं, जो बैंक में नियम हैं, वहीं आम नागरिकों पर भी सिक्के नहीं लेने पर लागू होते हैं।
एसके श्रीवास्तव, एलडीएम।
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भारतीय रिजर्व बैंक की गाइड लाइन के अनुसार भले ही एक, दो, पांच व दस रुपए के सिक्केे चलन में रखे गए हैं, इसके बावजूद भी एक, दो व 10 रुपये के सिक्कों को लेकर अफवाहों का बाजार लगातार गर्म है। जिससे तमाम मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। शहर में एक, दो और पांच रुपए के सिक्के के लेनदेन को लेकर आए दिन दुुकानदारों व ग्राहकों में विवाद की स्थिति पैदा हो रही है। ग्राहक जब सामान लेने के लिए दुकानों पर पहुंच रहे हैं, तो अधिकांश फुुटकर व थोक विक्रेता छोटे सिक्के लेने से मना कर दे रहे हैं। जिससे ग्राहकों का विवाद आए दिन दुकानदारों से देखने को मिल रहा है। वहीं कई बार जब दुकानदार भी ग्राहकों को फुटकर रुपए के बदले सिक्के थमाते हैं, तो ग्राहक भी मना कर दे हैं। ऐसे में कुछ दिनों से शहर में छोटे सिक्कों का लेनदेन बंद सा होता जा रहा है। वहीं जब दुकानदार भी एक हजार रुपए या इससे अधिक रुपए के छोटे सिक्के लेकर बैंकों में जमा करने पहुंचते हैं, तो बैंकों पर भी सिक्के जमा नहीं करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में कई बड़े व खुदरा व्यापारियों के पास एक से दो लाख रुपए तक के सिक्के जमा हो गए हैं। जिसके चलते अब शहर में छोटे सिक्कों का लेनदेन परेशानी का सबब बन गया है। हालांकि, बैंकों के अधिकारी एक हजार रुपए तक के सिक्के जमा आसानी से करना बता रहे हैं।
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भिखारी भी मांगता दस का नोट, सिक्के लेने से कर रहे मना
शहर में भिखारियों का स्तर भी बढ़ गया है। अब भिखारी भिक्षा मांगने के दौरान एक, दो या पांच रुपए के सिक्के नहीं बल्कि दस या इससे अधिक रुपए का नोट ही मांगता है। यदि कोई भिखारियों पर दया करके एक, दो या पांच रुपए के सिक्के देता भी है तो भिखारी उसे वहीं टोक देता है और सिक्के लेने से मना कर देता है।
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गुमटी ठेले वाले भी नहीं ले रहे छोटे सिक्के
एक व दो रुपए के सिक्के देकर सामान लेना अब आसान नहीं रह गया है। दस रुपए से कम के सिक्के लेने में दुकानदार आनाकानी करते हैं। गुुमटी ठेले वाले भी सामान खरीदने पर छोटे सिक्के नहीं ले रहे हैं। अधिक सामान लेने पर भी बड़े दुकानदारों द्वारा छोटे सिक्के थमा दिए जाते हैं, लेकिन जब सामान के बदले उन्हें सिक्के दिए जाते हैं तो वह सामान देने से साफ मना कर देते हैं।
कृष्णकांत मिश्रा, नागरिक।
छोटे सिक्के की समस्या जिला में अधिक बढ़ गई है। सिक्के लेकर जब बाजार में सामान खरीदने जाते हैं, तो दुकानदार छोटे सिक्के नहीं चलने की बात कर सामान देने से मना कर देते हैं। दस रुपए या इससे अधिक का नोट देने के बाद भी दुकानदार सामान देने को राजी होते हैं।
चंद्रकांत नायक, नागरिक।
फुटकर दुकानदार ले रहे, बड़े दुकानदार करते आनाकानी
शहर में एक व दो रुपए के सिक्के फुटकर छोटे दुकानदार तो ले रहे हैं, लेकिन कई जगह दुकानदार सिक्के लेने से साफ मना कर दे रहे हैं। ऑटो चालक भी सवारियों से छोटे सिक्के लेने से मना कर रहे हैं। ऑटो चालक दस रुपए का नोट या सिक्के तो लेते हैं, लेकिन एक व दो रुपए के नोट नहीं लेते हैं।
नरेंद्र सिंह राठौर, नागरिक।
बैंकों में व्यापारियों को सिक्का जमा करने में हो रही परेशानी
बैंकों में सिक्का जमा करने में व्यापारियों को परेशानी हो रही है। कई सरकारी और प्राइवेट बैंक सिक्का जमा करने में दिक्कत पैदा कर रहे हैं। इस संबंध में जिलाधिकारी के माध्यम से बैठक में भी सिक्के जमा नहीं करने का मामला उठाया गया है। खुदरा व्यापारियों के पास एक से दो लाख रुपए तक के छोटे सिक्के जमा हो गए हैं। खुदरा व्यापारी के पास यही पूंजी होती है। सिक्के जमा नहीं होने से परेशानी बढ़ गई है।
शैलेंद्र सिंघई, महामंत्री जिला उद्योग व्यापार मंडल।
सभी प्रकार के सिक्के चलन में हैं और बैंकों में जमा किए जा रहे हैं। बैंकों से अब छोटे सिक्के बाहर नहीं दिए जा रहे हैं। नियम सभी के लिए बराबर हैं, जो बैंक में नियम हैं, वहीं आम नागरिकों पर भी सिक्के नहीं लेने पर लागू होते हैं।
एसके श्रीवास्तव, एलडीएम।