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Lalitpur News: सपा को झटका, पूर्व जिलाध्यक्ष बसपा में शामिल
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। समाजवादी पार्टी को एक और झटका लगा है। पूर्व जिलाध्यक्ष कैलाश यादव ने पार्टी का दामन छोड़ बसपा की राह पकड़ ली है। बसपा ने उन्हें मंडल प्रभारी बनाया है। इससे बसपा के पक्ष में पिछड़ा वर्ग का वोट बैंक आने की उम्मीद है। बसपा जिलाध्यक्ष कपिल अहिरवार ने बताया कि कैलाश यादव को मंडल प्रभारी बनाया गया है।
हाल में समाजवादी पार्टी में युवाओं को जिस तरह आगे बढ़ाया गया, उससे पुराने नेता व कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही थी। जब उन पर मुकदमे दर्ज कराए गए, तब भी समाजवादी पार्टी उनके साथ नजर नहीं आई। कैलाश यादव एक समय में समाजवादी पार्टी का बड़ा चेहरा थे। यही कारण था कि पार्टी ने उन्हें दो बार जिलाध्यक्ष बनाया। जनता में अच्छी पकड़ होने से वह ब्लॉक प्रमुख रहे, साथ ही अपने पुत्र को भी जिला पंचायत सदस्य पर विजय हासिल करवाई।
काफी दिनों से उनके बसपा में जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं। वह लगातार जनपद से लेकर प्रदेश मुख्यालय तक बसपा के नेताओं में संपर्क थे। सोमवार को सभी अटकलों पर विराम लग गया। यह घटना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। क्योंकि, समाजवादी पार्टी पीडीए के एजेंडे पर पार्टी को मजबूत करने का प्रयास कर रही है, ऐसे में पार्टी से एक बड़े नेता का जाना बड़ा झटका माना जा रहा है। कैलाश यादव ने कहा कि उन्होंने बसपा सुप्रीमो से मुलाकात कर यह निर्णय लिया है। वह बसपा के सिद्धांतों पर कार्य करेंगे। हालांकि, वह सपा का दामन छोड़ने के कारणों पर कुछ कहने को अभी तैयार नहीं हैं।
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ललितपुर। समाजवादी पार्टी को एक और झटका लगा है। पूर्व जिलाध्यक्ष कैलाश यादव ने पार्टी का दामन छोड़ बसपा की राह पकड़ ली है। बसपा ने उन्हें मंडल प्रभारी बनाया है। इससे बसपा के पक्ष में पिछड़ा वर्ग का वोट बैंक आने की उम्मीद है। बसपा जिलाध्यक्ष कपिल अहिरवार ने बताया कि कैलाश यादव को मंडल प्रभारी बनाया गया है।
हाल में समाजवादी पार्टी में युवाओं को जिस तरह आगे बढ़ाया गया, उससे पुराने नेता व कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही थी। जब उन पर मुकदमे दर्ज कराए गए, तब भी समाजवादी पार्टी उनके साथ नजर नहीं आई। कैलाश यादव एक समय में समाजवादी पार्टी का बड़ा चेहरा थे। यही कारण था कि पार्टी ने उन्हें दो बार जिलाध्यक्ष बनाया। जनता में अच्छी पकड़ होने से वह ब्लॉक प्रमुख रहे, साथ ही अपने पुत्र को भी जिला पंचायत सदस्य पर विजय हासिल करवाई।
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काफी दिनों से उनके बसपा में जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं। वह लगातार जनपद से लेकर प्रदेश मुख्यालय तक बसपा के नेताओं में संपर्क थे। सोमवार को सभी अटकलों पर विराम लग गया। यह घटना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। क्योंकि, समाजवादी पार्टी पीडीए के एजेंडे पर पार्टी को मजबूत करने का प्रयास कर रही है, ऐसे में पार्टी से एक बड़े नेता का जाना बड़ा झटका माना जा रहा है। कैलाश यादव ने कहा कि उन्होंने बसपा सुप्रीमो से मुलाकात कर यह निर्णय लिया है। वह बसपा के सिद्धांतों पर कार्य करेंगे। हालांकि, वह सपा का दामन छोड़ने के कारणों पर कुछ कहने को अभी तैयार नहीं हैं।
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