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स्वकर प्रणाली में बढ़ाई गई अनुचित दरों पर जताया एतराज
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मंडलआयुक्त को ज्ञापन देते उ.प्र. व्यापार मण्डल के पदाधिकारी
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष संजय पटवारी के नेतृत्व में आयुक्त झांसी मंडल सुभाष चंद्र शर्मा को ज्ञापन सौंपा है। इसमें उन्होंने अवैध रूप से लागू की गई स्वकर प्रणाली और बढ़ाई गई अनुचित दरों का विरोध जताया गया।
ज्ञापन में आरोप लगाया कि नगर पालिका परिषद द्वारा 1916 अधिनियम की धारा में कर लगाने से संबंधित नियम का उल्लंघन कर वर्ष 2018 में स्वकर प्रणाली का नवीन शासनादेश जारी किया गया। इसमें टैक्स का भार कई गुना बढ़ा दिया गया। उक्त अधिनियम में उल्लेख है कि यदि जनता पर कोई कर लगाया गया या फिर कर में कोई संशोधन किया जाता है तो उसे बोर्ड द्वारा पारित किया जाना आवश्यक है। इसमें आपत्तियों के संबंध में विज्ञप्ति दो राष्ट्रीय एवं एक स्थानीय समाचार पत्र में प्रकाशित किया जाना अनिवार्य है। इसके बाद प्राप्त आपत्तियों पर सुनवाई कर उनका निस्तारण करना और उसे पुन: समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जाना चाहिए। उक्त नियमों को ताक पर रखते हुए तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी ने रख दिया। जिस कर का मूल्यांकन/सेल्फ असिस्मेंट जनता से कराना चाहिए था, उसे जनता से कराने की जगह एक प्राइवेट कंपनी से कराया। नामित कंपनी ने बिना जमीनी हकीकत के फर्जी तरीके से मनगढ़ंत सर्वे कर रिपोर्ट कार्यालय को सौंप दी। जिसे अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका परिषद द्वारा बिना बोर्ड मीटिंग में पारित करवाए शासन को भेज दिया। नगर पालिका परिषद द्वारा नियम का घोर उल्लंघन किया गया।
नगर के विभिन्न सामाजिक, व्यापारिक और राजनीतिक संगठनों द्वारा लगातार ज्ञापन और धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। सदर विधायक रामरतन कुशवाहा ने भी जनहित में संगठनों के आंदोलनों में शामिल होकर और नगर पालिका की बैठक में भी उपस्थित हुए। इसके बाद भी नगर पालिका परिषद द्वारा हठधर्मिता के चलते अभी तक जनहित में किसी भी आपत्ति का निस्तारण नहीं किया गया। वर्ष 2014 से 2017 तक जिन व्यक्तियों ने टैक्स जमा कर दिया था, उन व्यक्तियों को भी पुन: नोटिस देकर पिछले टैक्स की अपेक्षा कई गुना अधिक टैक्स जबरिया व गुंडागर्दी करते हुए वसूला गया है या वर्तमान में भी वसूला जा रहा है। उन्होंने संशोधन के उपरांत आने वाली दर को वर्तमान वित्तीय वर्ष से लेने की मांग की है। ज्ञापन में जिलाध्यक्ष नरेंद्र कडंकी, जिला संयोजक सुनील चौबे बुढ़वार, नगर अध्यक्ष संजय रसिया, गिरीश पाठक सोनू, अरविंद बबली डोगरा आदि रहे।
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ज्ञापन में आरोप लगाया कि नगर पालिका परिषद द्वारा 1916 अधिनियम की धारा में कर लगाने से संबंधित नियम का उल्लंघन कर वर्ष 2018 में स्वकर प्रणाली का नवीन शासनादेश जारी किया गया। इसमें टैक्स का भार कई गुना बढ़ा दिया गया। उक्त अधिनियम में उल्लेख है कि यदि जनता पर कोई कर लगाया गया या फिर कर में कोई संशोधन किया जाता है तो उसे बोर्ड द्वारा पारित किया जाना आवश्यक है। इसमें आपत्तियों के संबंध में विज्ञप्ति दो राष्ट्रीय एवं एक स्थानीय समाचार पत्र में प्रकाशित किया जाना अनिवार्य है। इसके बाद प्राप्त आपत्तियों पर सुनवाई कर उनका निस्तारण करना और उसे पुन: समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जाना चाहिए। उक्त नियमों को ताक पर रखते हुए तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी ने रख दिया। जिस कर का मूल्यांकन/सेल्फ असिस्मेंट जनता से कराना चाहिए था, उसे जनता से कराने की जगह एक प्राइवेट कंपनी से कराया। नामित कंपनी ने बिना जमीनी हकीकत के फर्जी तरीके से मनगढ़ंत सर्वे कर रिपोर्ट कार्यालय को सौंप दी। जिसे अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका परिषद द्वारा बिना बोर्ड मीटिंग में पारित करवाए शासन को भेज दिया। नगर पालिका परिषद द्वारा नियम का घोर उल्लंघन किया गया।
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नगर के विभिन्न सामाजिक, व्यापारिक और राजनीतिक संगठनों द्वारा लगातार ज्ञापन और धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। सदर विधायक रामरतन कुशवाहा ने भी जनहित में संगठनों के आंदोलनों में शामिल होकर और नगर पालिका की बैठक में भी उपस्थित हुए। इसके बाद भी नगर पालिका परिषद द्वारा हठधर्मिता के चलते अभी तक जनहित में किसी भी आपत्ति का निस्तारण नहीं किया गया। वर्ष 2014 से 2017 तक जिन व्यक्तियों ने टैक्स जमा कर दिया था, उन व्यक्तियों को भी पुन: नोटिस देकर पिछले टैक्स की अपेक्षा कई गुना अधिक टैक्स जबरिया व गुंडागर्दी करते हुए वसूला गया है या वर्तमान में भी वसूला जा रहा है। उन्होंने संशोधन के उपरांत आने वाली दर को वर्तमान वित्तीय वर्ष से लेने की मांग की है। ज्ञापन में जिलाध्यक्ष नरेंद्र कडंकी, जिला संयोजक सुनील चौबे बुढ़वार, नगर अध्यक्ष संजय रसिया, गिरीश पाठक सोनू, अरविंद बबली डोगरा आदि रहे।
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