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लाखों की योजना फिर चढ़ रही अनियमितताओं की भेंट
Lalitpur
Updated Tue, 14 Nov 2017 12:43 AM IST
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Water supply news
- फोटो : demo pic
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तालबेहट। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद राजकीय बालिका इंटर कालेज के आसपास निवास करने वाले लोगों को एक बूंद पानी नहीं मिल सका। जनता की मांग पर शासन ने इस योजना को कारगर बनाने के लिए लगभग साढ़े चार लाख रुपये स्वीकृत किए, लेकिन इस धनराशि से हो रहा कार्य भी खराब गुणवत्ता की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। इससे नगर वासियों में काफी आक्रोश है।
बताते चलें कि नगर की जनता को पेयजल मुहैया कराने के लिए शासन ने दो करोड़ रुपये की लागत से पाइप लाइन डाली। इसके बाद उसे जल संस्थान को सौंपा जाना था, लेकिन जल संस्थान उसकी टेस्टिंग के बाद ही उसे लेने पर तैयार था। दोनों विभागों की इस खींच तान में एक वर्ष लग गया। इसके बाद जनता ने विरोध तेज किया तो तत्कालीन जिलाधिकारी ओपी वर्मा ने दोनों विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में टेस्टिंग करवाई तो पानी की आपूर्ति होते ही यह पाइप लाइन कई जगह से फट गई। इस पाइप लाइन की टेस्टिंग का खेल कई बार शुरू हुआ और फिर बंद हो गया। बाद में जनता ने सूबे में सरकार बदलने पर इसकी मांग उठाई तो जल संस्थान को लगभग साढ़े चार लाख रुपये देकर खांदी में लगे ट्यूबवेल से क्षेत्र में पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन डाली गई।
पहले जल संस्थान ने पीवीसी पाइप डलवाए। इसका जनता ने विरोध किया तो कुछ जीआई पाइप रखवा दिए गए। लोगों के अनुसार इन पाइपों को जमीन से एक मीटर गहराई में डाला जाना चाहिए था, लेकिन अपने लाभ के चलते विभागीय कर्मचारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। जनता के अनुसार मामूली ठोकर में यह पाइप कभी भी टूट सकते हैं।
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इस संबंध में जल संस्थान के अवर अभियंता संघ भूषण से उनका पक्ष लिया तो उनका कहना था कि इस योजना में दोनों प्रकार के पाइपों का उपयोग किया जाना है। गहराई कम होने पर वह कुछ नहीं बोले। उनका कहना था कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद जब जल निगम जनता को पानी मुहैया नहीं करा सका, वही उस काम को जल संस्थान ने काफी कम लागत में पूरा कर दिया।
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बताते चलें कि नगर की जनता को पेयजल मुहैया कराने के लिए शासन ने दो करोड़ रुपये की लागत से पाइप लाइन डाली। इसके बाद उसे जल संस्थान को सौंपा जाना था, लेकिन जल संस्थान उसकी टेस्टिंग के बाद ही उसे लेने पर तैयार था। दोनों विभागों की इस खींच तान में एक वर्ष लग गया। इसके बाद जनता ने विरोध तेज किया तो तत्कालीन जिलाधिकारी ओपी वर्मा ने दोनों विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में टेस्टिंग करवाई तो पानी की आपूर्ति होते ही यह पाइप लाइन कई जगह से फट गई। इस पाइप लाइन की टेस्टिंग का खेल कई बार शुरू हुआ और फिर बंद हो गया। बाद में जनता ने सूबे में सरकार बदलने पर इसकी मांग उठाई तो जल संस्थान को लगभग साढ़े चार लाख रुपये देकर खांदी में लगे ट्यूबवेल से क्षेत्र में पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन डाली गई।
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पहले जल संस्थान ने पीवीसी पाइप डलवाए। इसका जनता ने विरोध किया तो कुछ जीआई पाइप रखवा दिए गए। लोगों के अनुसार इन पाइपों को जमीन से एक मीटर गहराई में डाला जाना चाहिए था, लेकिन अपने लाभ के चलते विभागीय कर्मचारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। जनता के अनुसार मामूली ठोकर में यह पाइप कभी भी टूट सकते हैं।
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इस संबंध में जल संस्थान के अवर अभियंता संघ भूषण से उनका पक्ष लिया तो उनका कहना था कि इस योजना में दोनों प्रकार के पाइपों का उपयोग किया जाना है। गहराई कम होने पर वह कुछ नहीं बोले। उनका कहना था कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद जब जल निगम जनता को पानी मुहैया नहीं करा सका, वही उस काम को जल संस्थान ने काफी कम लागत में पूरा कर दिया।