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सत्संग से होता संशय रूपी वृत्ति का नाश
ब्यूरो
Updated Fri, 26 Feb 2016 01:02 AM IST
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ललितपुर। श्री तुवन मंदिन प्रांगण में चल रही श्रीरामकथा में सीता और राम विवाहोत्सव का मंगल प्रसंग सुनाया गया। इसे सुनकर श्रद्धालु आनंदित हो उठे।
बृहस्पतिवार को श्रीरामकथा के तीसरे दिन मलूकपीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्र देवाचार्य महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम अपनी नर लीला में विश्वामित्र का यज्ञ पूर्ण कराने के बाद महाराज जनक के धनुष यज्ञ को संपन्न करते हैं। शिव का धनुष अहंकार का प्रतीक है, अहंकार श्रेष्ठ सद्गुणों को निगलने वाला है।
अहंकार मिटते ही जीव परमात्मा का हो जाता है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम साक्षात ब्रह्म और माता जानकी साक्षात भगवती हैं, उनका मिलन अलौकिक है। अहंकारी राजाओं के मान का मर्दन हुआ, राजा जनक के मोह का नाश धनुष भंग होते ही हो गया। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से प्रभु राम ने धनुष भंग किया और जानकी ने प्रभु के गले में वरमाला डाल दी।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं कि प्रभु श्रीराम का चरित्र अत्यंत गूढ़ है, इसको पढ़ और जानकर ज्ञानी व्यक्ति और भक्ति संपन्न संत वैराग्य की ओर गति करते हैं और मूर्ख इस चरित्र को पढ़कर मोहित होते हैं। उनके अंदर संशय रूपी जाल पड़ जाता है। प्रभु लीला में संशय नहीं होना चाहिए।
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श्रीराम के जन्म से जड़ और चेतन दोनों प्रकारों में हर्ष फैल गया। दशरथ के भाव के कारण ही प्रभु अवतरित हुए हैं। अयोध्या में घर-घर बधाई हुई। नामकरण संस्कार पर उन्होंने कहा कि नाम छोटा एवं पूर्वजों की स्मृति दिलाने वाला रखना चाहिए। बच्चों का नामकरण प्राय: गुरुजनों, पुरोहितों एवं घर के बड़े-बूढ़ों की सहमति से ही रखना चाहिए। कथा के अंत में श्रीरामायणजी की आरती की गई।
कथा के प्रथम सत्र की प्रारंभ बेला में मुख्य यजमान ऊषा जायसवाल और नगर पालिकाध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने विधि-विधान के साथ श्रीरामायण पोथी एवं व्यास पूजन किया। इस मौके पर उमाशंकर विदुआ, अवध बिहारी उपाध्याय, डा. ओमप्रकाश शास्त्री, अशोक रावत, सुनील चौबे, प्रमोद गुप्ता, धर्मेंद्र रावत, दिनेश गोस्वामी, राव राजा, अनूप मोदी आदि ने श्रीरामायणजी की मंगल आरती की।
कथा की व्यवस्थाओं में मानू शर्मा, शुभम कौशिक, अभिषेक खरे, रोहित रावत, रमाकांत तिवारी, रत्नेश तिवारी, अभिषेक चौबे, शरद खैरा, सुदर्शन श्रीवास्तव, रविंद्र शुक्ला, सोनू पाठक श्रीतुवन सरकार भंडारा समिति के सदस्य मौजूद रहे।
रसिका पागल बाबा की भजन संध्या आज
दीनबंधुदास महाराज ने बताया कि 26 फरवरी दिन शुक्रवार को रात्रि आठ बजे से भजन सम्राट रसिका पागल बाबा की भजन संध्या का आयोजन श्रीतुवन मंदिर प्रांगण में होगा।
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बृहस्पतिवार को श्रीरामकथा के तीसरे दिन मलूकपीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्र देवाचार्य महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम अपनी नर लीला में विश्वामित्र का यज्ञ पूर्ण कराने के बाद महाराज जनक के धनुष यज्ञ को संपन्न करते हैं। शिव का धनुष अहंकार का प्रतीक है, अहंकार श्रेष्ठ सद्गुणों को निगलने वाला है।
अहंकार मिटते ही जीव परमात्मा का हो जाता है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम साक्षात ब्रह्म और माता जानकी साक्षात भगवती हैं, उनका मिलन अलौकिक है। अहंकारी राजाओं के मान का मर्दन हुआ, राजा जनक के मोह का नाश धनुष भंग होते ही हो गया। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से प्रभु राम ने धनुष भंग किया और जानकी ने प्रभु के गले में वरमाला डाल दी।
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उन्होंने कहा कि भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं कि प्रभु श्रीराम का चरित्र अत्यंत गूढ़ है, इसको पढ़ और जानकर ज्ञानी व्यक्ति और भक्ति संपन्न संत वैराग्य की ओर गति करते हैं और मूर्ख इस चरित्र को पढ़कर मोहित होते हैं। उनके अंदर संशय रूपी जाल पड़ जाता है। प्रभु लीला में संशय नहीं होना चाहिए।
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श्रीराम के जन्म से जड़ और चेतन दोनों प्रकारों में हर्ष फैल गया। दशरथ के भाव के कारण ही प्रभु अवतरित हुए हैं। अयोध्या में घर-घर बधाई हुई। नामकरण संस्कार पर उन्होंने कहा कि नाम छोटा एवं पूर्वजों की स्मृति दिलाने वाला रखना चाहिए। बच्चों का नामकरण प्राय: गुरुजनों, पुरोहितों एवं घर के बड़े-बूढ़ों की सहमति से ही रखना चाहिए। कथा के अंत में श्रीरामायणजी की आरती की गई।
कथा के प्रथम सत्र की प्रारंभ बेला में मुख्य यजमान ऊषा जायसवाल और नगर पालिकाध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने विधि-विधान के साथ श्रीरामायण पोथी एवं व्यास पूजन किया। इस मौके पर उमाशंकर विदुआ, अवध बिहारी उपाध्याय, डा. ओमप्रकाश शास्त्री, अशोक रावत, सुनील चौबे, प्रमोद गुप्ता, धर्मेंद्र रावत, दिनेश गोस्वामी, राव राजा, अनूप मोदी आदि ने श्रीरामायणजी की मंगल आरती की।
कथा की व्यवस्थाओं में मानू शर्मा, शुभम कौशिक, अभिषेक खरे, रोहित रावत, रमाकांत तिवारी, रत्नेश तिवारी, अभिषेक चौबे, शरद खैरा, सुदर्शन श्रीवास्तव, रविंद्र शुक्ला, सोनू पाठक श्रीतुवन सरकार भंडारा समिति के सदस्य मौजूद रहे।
रसिका पागल बाबा की भजन संध्या आज
दीनबंधुदास महाराज ने बताया कि 26 फरवरी दिन शुक्रवार को रात्रि आठ बजे से भजन सम्राट रसिका पागल बाबा की भजन संध्या का आयोजन श्रीतुवन मंदिर प्रांगण में होगा।