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सर्व शिक्षा अभियान को दिखाया जा रहा ठेंगा
lalitpur
Updated Sat, 16 Jul 2016 01:06 AM IST
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श्ािक्ष्ाा अभ्ाियान
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। शत-प्रतिशत नामांकन के लिए जिले में जागरूकता रैली निकाली जा रही है। लेकिन शहर का राजकीय बालिका इंटर कालेज सर्व शिक्षा अभियान व शासन की मंशा पर पानी फेर रहा है।
शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शासन द्वारा सरकारी विद्यालयों में कक्षा एक से आठवीं तक की शिक्षा को नि:शुल्क कर दिया गया है। वहीं, सर्व शिक्षा अभियान के तहत विभिन्न योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। शासन ने शिक्षा का नवीन सत्र अप्रैल से चालू कर दिया था, लेकिन जागरूकता की कमी के चलते काफी अधिक संख्या में बच्चों ने विद्यालय में प्रवेश नहीं ले पाए थे। इसको गंभीरता से लेते हुए कक्षा एक से आठवीं तक में बच्चों का प्रवेश की तिथि 15 जुलाई निर्धारित कर दी थी और वहीं सर्व शिक्षा अभियान के तहत शासनादेश भी जारी किया गया है कि 15 जुलाई के बाद यदि कोई प्रवेश लेना चाहे तो उसको मना नहीं किया जाए। लेकिन नगर में संचालित राजकीय बालिका विद्यालय में शासनादेशों को ठेेंगा दिखाया जा रहा है।
नगर के मुहल्ला महावीरपुरा में राजकीय बालिका इंटर कालेज की कक्षा एक से आठवीं तक की कक्षाएं संचालित होती है। इस विद्यालयों में पढ़ाने वाली शिक्षिकाओं की खासी भरमार है, लेकिन पढ़ने के लिए छात्राओं की भारी कमी है। इसके बावजूद विद्यालय प्रशासन द्वारा अप्रैल माह के बाद विद्यालय में छात्रों के प्रवेश को वर्जित कर दिया है। शासनादेश के अनुसार एक कक्ष के सापेक्ष 70 बच्चों के छात्रांकन का मानक है, लेकिन इस विद्यालय में मानकों के सापेक्ष 30 से 40 फीसदी ही छात्रांकन है। कक्षा छठवीं से आठवीं तक दो-दो सेक्शन संचालित होते हैं, जिनका कुल छात्रांकन 255 है। विद्यालय में कुल ग्यारह कक्ष संचालित किए जा रहे हैं। इसके सापेक्ष यहां पर तीन स्थायी शिक्षिकाएं तैनात हैं और 10 शिक्षिकाओं को अभिभावक शिक्षक संघ के तहत नियुक्त किया गया है।
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सौ साल से अधिक पुराना विद्यालय का भवन
मुहल्ला महावीरपुरा में स्थित जिस भवन में विद्यालय संचालित किया जा रहा है, वह भवन 110 वर्ष पुराना है। इस भवन को वर्ष 1905 में अंग्रेजी शासन द्वारा बनाया गया था, पूर्व में यहां महिला दीक्षा संस्थान संचालित किया जाता था। इसके बाद यह भवन राजकीय बालिका विद्यालय को दे दिया गया था। इन पुराने कक्षों के अलावा अन्य कक्षों का भी निर्माण कराया गया है। पुराने कक्षों की छतों से बारिश का पानी टपकता है। वहीं विद्यालय में लगे दो हैंडपंपों में से एक हैंडपंप विगत काफी लंबे से खराब पड़ा हुआ है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
रास्ते में फेंक दिया जाता है कचरा
विद्यालय स्टाफ ने बताया कि विद्यालय आने वाले रास्ते की गली में स्थानीय लोगों द्वारा कचरा फेंक दिया जाता है। गली में आवारा जानवरों का भी जमावड़ा लगा रहता है, जिससे रास्ते में गंदगी फैलती है और छोटे-छोटे बच्चों के घायल होने का भय भी बना रहता है। रास्ते में जमा गंदगी के कारण विद्यालय स्टाफ में काफी रोष व्याप्त है।
विद्यालय में बैठने की व्यवस्था नहीं है, इसलिए बड़ी मैडम द्वारा अप्रैल माह के बाद विद्यालय में प्रवेश बंद कर दिए गए हैं। अप्रैल के बाद केवल कक्षा एक में ही कुछ बच्चों के प्रवेश लिए गए है।
- ऊषा अंसारी, प्रभारी प्रधानाचार्य
15 जुलाई तक पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में प्रवेश लेना अनिवार्य था, इसके बाद भी यदि कोई बच्चा प्रवेश लेना चाहे तो उनको मना नहीं किया जाएगा। यही जीजीआईसी विद्यालय में कक्षा आठ तक प्रवेेश नहीं लिए जा रहे हैं तो मामले की जांच की जाएगी।
- संतोष राय, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शासन द्वारा सरकारी विद्यालयों में कक्षा एक से आठवीं तक की शिक्षा को नि:शुल्क कर दिया गया है। वहीं, सर्व शिक्षा अभियान के तहत विभिन्न योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। शासन ने शिक्षा का नवीन सत्र अप्रैल से चालू कर दिया था, लेकिन जागरूकता की कमी के चलते काफी अधिक संख्या में बच्चों ने विद्यालय में प्रवेश नहीं ले पाए थे। इसको गंभीरता से लेते हुए कक्षा एक से आठवीं तक में बच्चों का प्रवेश की तिथि 15 जुलाई निर्धारित कर दी थी और वहीं सर्व शिक्षा अभियान के तहत शासनादेश भी जारी किया गया है कि 15 जुलाई के बाद यदि कोई प्रवेश लेना चाहे तो उसको मना नहीं किया जाए। लेकिन नगर में संचालित राजकीय बालिका विद्यालय में शासनादेशों को ठेेंगा दिखाया जा रहा है।
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नगर के मुहल्ला महावीरपुरा में राजकीय बालिका इंटर कालेज की कक्षा एक से आठवीं तक की कक्षाएं संचालित होती है। इस विद्यालयों में पढ़ाने वाली शिक्षिकाओं की खासी भरमार है, लेकिन पढ़ने के लिए छात्राओं की भारी कमी है। इसके बावजूद विद्यालय प्रशासन द्वारा अप्रैल माह के बाद विद्यालय में छात्रों के प्रवेश को वर्जित कर दिया है। शासनादेश के अनुसार एक कक्ष के सापेक्ष 70 बच्चों के छात्रांकन का मानक है, लेकिन इस विद्यालय में मानकों के सापेक्ष 30 से 40 फीसदी ही छात्रांकन है। कक्षा छठवीं से आठवीं तक दो-दो सेक्शन संचालित होते हैं, जिनका कुल छात्रांकन 255 है। विद्यालय में कुल ग्यारह कक्ष संचालित किए जा रहे हैं। इसके सापेक्ष यहां पर तीन स्थायी शिक्षिकाएं तैनात हैं और 10 शिक्षिकाओं को अभिभावक शिक्षक संघ के तहत नियुक्त किया गया है।
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सौ साल से अधिक पुराना विद्यालय का भवन
मुहल्ला महावीरपुरा में स्थित जिस भवन में विद्यालय संचालित किया जा रहा है, वह भवन 110 वर्ष पुराना है। इस भवन को वर्ष 1905 में अंग्रेजी शासन द्वारा बनाया गया था, पूर्व में यहां महिला दीक्षा संस्थान संचालित किया जाता था। इसके बाद यह भवन राजकीय बालिका विद्यालय को दे दिया गया था। इन पुराने कक्षों के अलावा अन्य कक्षों का भी निर्माण कराया गया है। पुराने कक्षों की छतों से बारिश का पानी टपकता है। वहीं विद्यालय में लगे दो हैंडपंपों में से एक हैंडपंप विगत काफी लंबे से खराब पड़ा हुआ है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
रास्ते में फेंक दिया जाता है कचरा
विद्यालय स्टाफ ने बताया कि विद्यालय आने वाले रास्ते की गली में स्थानीय लोगों द्वारा कचरा फेंक दिया जाता है। गली में आवारा जानवरों का भी जमावड़ा लगा रहता है, जिससे रास्ते में गंदगी फैलती है और छोटे-छोटे बच्चों के घायल होने का भय भी बना रहता है। रास्ते में जमा गंदगी के कारण विद्यालय स्टाफ में काफी रोष व्याप्त है।
विद्यालय में बैठने की व्यवस्था नहीं है, इसलिए बड़ी मैडम द्वारा अप्रैल माह के बाद विद्यालय में प्रवेश बंद कर दिए गए हैं। अप्रैल के बाद केवल कक्षा एक में ही कुछ बच्चों के प्रवेश लिए गए है।
- ऊषा अंसारी, प्रभारी प्रधानाचार्य
15 जुलाई तक पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में प्रवेश लेना अनिवार्य था, इसके बाद भी यदि कोई बच्चा प्रवेश लेना चाहे तो उनको मना नहीं किया जाएगा। यही जीजीआईसी विद्यालय में कक्षा आठ तक प्रवेेश नहीं लिए जा रहे हैं तो मामले की जांच की जाएगी।
- संतोष राय, बेसिक शिक्षा अधिकारी