{"_id":"57ffd3ec4f1c1b762b28eed4","slug":"sample-failed-to-increase-the-income-of-poor-families","type":"story","status":"publish","title_hn":"निर्धन परिवारों की आय बढ़ाने में विफल रही जायका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निर्धन परिवारों की आय बढ़ाने में विफल रही जायका
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 14 Oct 2016 12:05 AM IST
विज्ञापन
income lalitpur news
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश सहभागी वन प्रबंध और निर्धनता उन्मूलन परियोजना जंगलों के आसपास रहने वाले निर्धन परिवारों की आय बढ़ाने में नाकाम रही है। योजनांतर्गत गठित स्वयं सहायता समूहों के अधिकतर कुटीर उद्योग तरक्की करने की जगह दम तोड़ते नजर आ रहे हैं।
जंगलों के आसपास रहने वाली आदिवासी सहरिया जाति पूरी तरह वन उपज पर निर्भर है। वन विभाग ने इस जाति को गरीबी से छुटकारा दिलाने के मकसद से उत्तर प्रदेश सहभागी वन प्रबंध और निर्धनता उन्मूलन परियोजना जापान सरकार के सहयोग से प्रारंभ की। इसके तहत जिले में करीब 213 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है। इनमें से 206 स्वयं सहायता समूहों को कुटीर उद्योग स्थापित करने के लिए ऋण मुहैया कराया गया है। इस राशि से समूहों ने आटा चक्की, सब्जी की खेती, बकरी पालन, मुर्गी पालन, तंबू, ईट भट्टा व गल्ला का काम आरंभ किया है। लेकिन, कइयों के शुरुआत में पैर उखड़ने लगे। नतीजा यह हुआ कि विभाग ने करीब 75 समूहों को आधा अधूरा ही ऋण उपलब्ध कराया। कुछ समूह पूरा ऋण एक लाख रुपये का पाकर भी उद्योग को गति प्रदान नहीं कर सके। जिससे तमाम समूहों को ऋण वापस करने में मुश्किलें आ रही हैं।
कई समूहों के उद्योग बेहतर काम कर रहे हैं। ऐसे समूहों ने अपना ऋण वापस करना भी आरंभ कर दिया है। कुछ समूह ही अपने उद्योग आगे नहीं बढ़ा सके हैं। लखनऊ से नामित संस्था इन समूहों को मार्गदर्शन प्रदान कर रही है। जिन समूहों को ऋण पूरा नहीं मिल सका है। यदि वह अच्छा काम करेंगे तो उनकी अगली किस्त रिलीज की जाएगी।
विज्ञापन
- आरके त्रिपाठी
प्रभारी डीएफओ ललितपुर।
विज्ञापन
जंगलों के आसपास रहने वाली आदिवासी सहरिया जाति पूरी तरह वन उपज पर निर्भर है। वन विभाग ने इस जाति को गरीबी से छुटकारा दिलाने के मकसद से उत्तर प्रदेश सहभागी वन प्रबंध और निर्धनता उन्मूलन परियोजना जापान सरकार के सहयोग से प्रारंभ की। इसके तहत जिले में करीब 213 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है। इनमें से 206 स्वयं सहायता समूहों को कुटीर उद्योग स्थापित करने के लिए ऋण मुहैया कराया गया है। इस राशि से समूहों ने आटा चक्की, सब्जी की खेती, बकरी पालन, मुर्गी पालन, तंबू, ईट भट्टा व गल्ला का काम आरंभ किया है। लेकिन, कइयों के शुरुआत में पैर उखड़ने लगे। नतीजा यह हुआ कि विभाग ने करीब 75 समूहों को आधा अधूरा ही ऋण उपलब्ध कराया। कुछ समूह पूरा ऋण एक लाख रुपये का पाकर भी उद्योग को गति प्रदान नहीं कर सके। जिससे तमाम समूहों को ऋण वापस करने में मुश्किलें आ रही हैं।
विज्ञापन
कई समूहों के उद्योग बेहतर काम कर रहे हैं। ऐसे समूहों ने अपना ऋण वापस करना भी आरंभ कर दिया है। कुछ समूह ही अपने उद्योग आगे नहीं बढ़ा सके हैं। लखनऊ से नामित संस्था इन समूहों को मार्गदर्शन प्रदान कर रही है। जिन समूहों को ऋण पूरा नहीं मिल सका है। यदि वह अच्छा काम करेंगे तो उनकी अगली किस्त रिलीज की जाएगी।
विज्ञापन
- आरके त्रिपाठी
प्रभारी डीएफओ ललितपुर।