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खाद्यान्न किट की सूची में जरूरतमंदों के नाम गायब
lalitpur
Updated Sun, 17 Apr 2016 01:20 AM IST
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मुख्यमंत्री
- फोटो : demo pic
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पुलवारा (ललितपुर)। सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड के किसानों को राहत प्रदान करने के लिए जहां केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा कई राहत सामग्री दी जा रही है, वहीं जिले के जिम्मेदार हुक्मरान मनमानी कर गरीबों के मुंह से निवाला छीन रहे हैं। उन्हें मुख्यमंत्री से भी भय नहीं लग रहा है। मुख्यमंत्री जिले के दौरे पर गरीबों को राहत सामग्री बांटने आ रहे हैं, लेकिन उम्मीद लगाए बैठे पात्र गरीबों के नाम सूची में ही शामिल नहीं हो सके हैं।
सूखा के कारण कई लोग रोजी-रोटी की तलाश में अपने घरों में ताला जड़कर शहरों की ओर पलायन कर गए हैं। वहीं, खाद्यान्न किट में ब्लाक बार के गरीबों के साथ मनमानी की गई है। 19 अप्रैल को ब्लॉक बार के ग्राम लड़वारी में मुख्यमंत्री द्वारा गरीबों को खाद्यान्न सामग्री का वितरण किया जाना है। इसे देखते हुए गांव के लेखपाल को अंत्योदय कार्डधारकों की घर-घर जाकर सूची तैयार करने के आदेश दिए गए थे। आरोप है कि लेखपाल ने बिना सर्वे किए की घर बैठे लोगों की सूची तैयार कर ली। पिछले दिनों गांव में मुनादी कराकर कहा गया कि अंत्योदय कार्डधारक अपने कागज लेकर ग्राम सचिवालय में जमा कर दें, लेकिन जब लोग वहां कागज जमा करने गए तो पता चला कि सूची पहले से ही बनी हुई थी। सूची में से अति गरीब की श्रेणी में आने वाले 39 लोगों के नाम गायब मिले।
इससे मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद आस लगाए बैठे गरीब लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। साथ ही जिम्मेदार लोगों ने अपने चहेतों को सूची में शामिल कर दिया। सूची से बाहर हुए 39 लोगों में अधिकांश ऐसे महिला और पुरुष हैं, जिनके पास न तो जमीन है और न ही कोई रोजगार। इसमें निराश्रित तलाकशुदा महिलाएं भी शामिल हैं। इनका 12 साल पहले अंत्योदय कार्ड बना था। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में भी उनका कार्ड बना, लेकिन अब उन्हें समाजवादी सूखा राहत पैकेट योजना से बाहर कर दिया गया। उन्होंने डीएम से सूची की जांच कराकर उसमें उनके नाम भी जोड़े जाने की मांग की है। अन्यथा की स्थिति में वह मुख्यमंत्री के समक्ष पहुंच कर अपनी दशा से अवगत कराएंगे। मांग करने वालों में राजू कुशवाहा, प्रदीप दुबे, शोभा देवी, कैलाश यादव शामिल रहे।
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सूखा के कारण कई लोग रोजी-रोटी की तलाश में अपने घरों में ताला जड़कर शहरों की ओर पलायन कर गए हैं। वहीं, खाद्यान्न किट में ब्लाक बार के गरीबों के साथ मनमानी की गई है। 19 अप्रैल को ब्लॉक बार के ग्राम लड़वारी में मुख्यमंत्री द्वारा गरीबों को खाद्यान्न सामग्री का वितरण किया जाना है। इसे देखते हुए गांव के लेखपाल को अंत्योदय कार्डधारकों की घर-घर जाकर सूची तैयार करने के आदेश दिए गए थे। आरोप है कि लेखपाल ने बिना सर्वे किए की घर बैठे लोगों की सूची तैयार कर ली। पिछले दिनों गांव में मुनादी कराकर कहा गया कि अंत्योदय कार्डधारक अपने कागज लेकर ग्राम सचिवालय में जमा कर दें, लेकिन जब लोग वहां कागज जमा करने गए तो पता चला कि सूची पहले से ही बनी हुई थी। सूची में से अति गरीब की श्रेणी में आने वाले 39 लोगों के नाम गायब मिले।
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इससे मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद आस लगाए बैठे गरीब लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। साथ ही जिम्मेदार लोगों ने अपने चहेतों को सूची में शामिल कर दिया। सूची से बाहर हुए 39 लोगों में अधिकांश ऐसे महिला और पुरुष हैं, जिनके पास न तो जमीन है और न ही कोई रोजगार। इसमें निराश्रित तलाकशुदा महिलाएं भी शामिल हैं। इनका 12 साल पहले अंत्योदय कार्ड बना था। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में भी उनका कार्ड बना, लेकिन अब उन्हें समाजवादी सूखा राहत पैकेट योजना से बाहर कर दिया गया। उन्होंने डीएम से सूची की जांच कराकर उसमें उनके नाम भी जोड़े जाने की मांग की है। अन्यथा की स्थिति में वह मुख्यमंत्री के समक्ष पहुंच कर अपनी दशा से अवगत कराएंगे। मांग करने वालों में राजू कुशवाहा, प्रदीप दुबे, शोभा देवी, कैलाश यादव शामिल रहे।
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