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आजीविका के स्थाई संसाधन विकसित कर रहे सहरिया आदिवासी

Fri, 12 Jun 2020 12:45 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2020 12:45 AM IST
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sahriya tribes, gardening
पेड़ों की निराई गुड़ाई करते सहरिया - फोटो : LALITPUR
ललितपुर। सहरिया आदिवासी राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के सहयोग से भूमि संरक्षण और जल संसाधनों का विकास कर आजीविका के स्थायी संसाधन विकसित कर रहे हैं। इस दौरान सहरियों ने पेड़ों के बीच इंटरक्रोपिंग में सब्जी उत्पादन करना सीख लिया है। वे अमरूद, आंवला एवं नीबू के फलदार पेड़ लगा रहे हैं।
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जनपद में सहरिया आदिवासियों के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। तमाम लोग दैनिक मजदूरी और जड़ी-बूटी एकत्रित कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। साईं ज्योति संस्थान ने जिले के सहरिया आदिवासियों को नई राह दिखाई है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक का सहयोग लेकर उन्हें बागवानी के लिए प्रोत्साहित किया है। इसी तरह जल संरक्षण के लिए सर दोरावजी टाटा ट्रस्ट के सहयोग से पांच गांवों में छोटे-छोटे खेत- तालाबों को विकसित कर पानी के संरक्षण का मॉडल प्रस्तुत किया है।
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इस संबंध में संस्था के सचिव अजय श्रीवास्तव ने बताया कि ललितपुर बुंदेलखंड का पिछड़ा जिला है। यहां के सूखे को कम करने एवं पानी को बचाने के लिए विभिन्न प्रकार के मॉडलों को धरातल पर उतारा जा रहा है। पानी को संरक्षित करने के लिए जहां एक ओर खेत- तालाब एवं मेड़ बंधी के माध्यम से पांच गांव जिनमें ग्राम एरावनी, बछलापुर, निबउवा, उत्तमधाना एवं बरौदा- बिजलौन में जल संरक्षण के मॉडल तैयार किए गए थे, वे अब किसानों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। बागवानी के माध्यम से सहरिया समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की कोशिश की जा रही है। इससे पर्यावरण भी संरक्षित हो सकेगा।
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जिले के आदिवासी समुदाय के ब्लाक बिरधा में 550 परिवारों एवं ब्लाक जखौरा में 1100 परिवारों को बागवानी के गुर सिखाए जा रहे हैं। सहरिया समुदाय के लिए उनकी एक- एक एकड़ भूमि पर बगीचा तैयार कराकर उनमें अमरूद, आंवला एवं नीबू के फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। पेड़ों के बीच इंटरक्रोपिंग में सब्जी उत्पादन सिखाया जा रहा है। इससे यह होगा कि जब तक पेड़ से आय आना प्रारंभ नहीं होती, तब तक सब्जी उत्पादन उनकी आजीविका के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। बगीचा विकसित होने से उनके पलायन को रोकने में मदद मिलेगी। यदि इस कार्य में सफलता मिलती है तो निश्चित तौर पर जनपद में खुशहाली आएगी।

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सहरिया आदिवासियों के जीवनोत्थान के लिए नाबार्ड मदद करता है। ब्लाक बिरधा और जखौरा के सहरिया आदिवासियों को 55-55 अमरूद व नींबू के पौधे उपलब्ध कराए गए हैं। यदि कहीं पानी की समस्या है तो जलकुंड की व्यवस्था की जाती है। उन्हें एनआरएलएम सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
- अरविंद निगम
जिला विकास प्रबंधक, नाबार्ड
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