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पांच वर्ष बाद भी नहीं बन सका रोडवेज का डिपो
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ग्राम रोंड़ा में अधूरा पड़ा रोडवेज डिपो का काम
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। एक तरफ बस यात्रा को सुगम बनाने के लिए वातानुकूलित जनरथ बसें चलाई जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ जिला रोडवेज बसों के मामले में उपेक्षित है। जिले में पांच साल पहले रोडवेज बस डिपो बनाने का काम शुरू हुआ था, लेकिन अब तक अधूरा पड़ा है। इससे विकास कार्यों की प्रगति का अंदाजा स्वयं लगाया जा सकता है।
यात्रा को सुगम बनाने के लिए रोडवेज डिपो की नींव समाजवादी पार्टी के शासन में रखी गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसकी आधारशिला रखी, लेकिन रोडवेज डिपो का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है। डिपो नहीं बनने के कारण शुरूआत में जो बसें यात्रियों की सुविधा के लिए चलाई गईं थीं, उनमें से ज्यादातर बंद हो गई हैं। निर्माण की लेटलतीफी का आलम यह है कि पहले चार करोड़ 99 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे, लेकिन अब फिर से रिवाइज एस्टीमेट तैयार किया गया है और अब इसकी लागत दस करोड़ रुपये हो गई है।
पांच बार बदली निर्माण पूरा होने की अवधि
मुख्यालय के समीपवर्ती ग्राम रोड़ा में रोडवेज डिपो के लिए जमीन चिह्नित कर इसका निर्माण कार्य शुरू किया गया था, लेकिन पांच वर्ष में पूरा नहीं हो सका है। डिपो को जनवरी 2018 में बन कर तैयार होना था, लेेकिन इसका निर्माण कार्य तय समय में पूरा नहीं किया गया। इसके बाद जुलाई 2018 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया। निर्माण की अगली तिथि बढ़ाकर मार्च 2019 कर दी गई, इसके बाद जून तय किया गया, लेकिन सात माह बीतने के बाद भी निर्माण नहीं हो सका।
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अब दस करोड़ से होगा डिपो का निर्माण
शुरुआत में रोडवेज डिपो का निर्माण कार्य चार करोड़ 99 लाख रुपये से होना स्वीकृत किया गया था। लेकिन, समय अवधि में निर्माण नहीं होने व रास्ते में पत्थर व मिट्ंटी हटाने के कारण राशि कम पड़ गई है। अब लगभग पांच करोड़ रुपये का रिवाइज एस्टीमेट शासन को भेजा गया है।
रोडवेज डिपो निर्माण में मुख्य भवन का काम पूरा हो गया है। इसमें गेट व वायरिंग का काम बाकी रह गया है। कैंटीन, डीजल शेड और वर्कशाप का कार्य अधूरा पड़ा है। इसके निर्माण में हाइटेंशन लाइन बाधा बनी हुई है। लाइन हटने पर कार्यशाला का निर्माण किया जाएगा। जमीन में पत्थर और मिट्टी होने के कारण इसका रिवाइज एस्टीमेट भेजा गया है।
- हरीओम वर्मा, अवर अभियंता, परिवहन निगम डिपो
रिवाइज एस्टीमेट की स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य पूरा कराया जाएगा।
- रामलवट, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज डिपो, झांसी
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यात्रा को सुगम बनाने के लिए रोडवेज डिपो की नींव समाजवादी पार्टी के शासन में रखी गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसकी आधारशिला रखी, लेकिन रोडवेज डिपो का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है। डिपो नहीं बनने के कारण शुरूआत में जो बसें यात्रियों की सुविधा के लिए चलाई गईं थीं, उनमें से ज्यादातर बंद हो गई हैं। निर्माण की लेटलतीफी का आलम यह है कि पहले चार करोड़ 99 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे, लेकिन अब फिर से रिवाइज एस्टीमेट तैयार किया गया है और अब इसकी लागत दस करोड़ रुपये हो गई है।
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पांच बार बदली निर्माण पूरा होने की अवधि
मुख्यालय के समीपवर्ती ग्राम रोड़ा में रोडवेज डिपो के लिए जमीन चिह्नित कर इसका निर्माण कार्य शुरू किया गया था, लेकिन पांच वर्ष में पूरा नहीं हो सका है। डिपो को जनवरी 2018 में बन कर तैयार होना था, लेेकिन इसका निर्माण कार्य तय समय में पूरा नहीं किया गया। इसके बाद जुलाई 2018 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया। निर्माण की अगली तिथि बढ़ाकर मार्च 2019 कर दी गई, इसके बाद जून तय किया गया, लेकिन सात माह बीतने के बाद भी निर्माण नहीं हो सका।
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अब दस करोड़ से होगा डिपो का निर्माण
शुरुआत में रोडवेज डिपो का निर्माण कार्य चार करोड़ 99 लाख रुपये से होना स्वीकृत किया गया था। लेकिन, समय अवधि में निर्माण नहीं होने व रास्ते में पत्थर व मिट्ंटी हटाने के कारण राशि कम पड़ गई है। अब लगभग पांच करोड़ रुपये का रिवाइज एस्टीमेट शासन को भेजा गया है।
रोडवेज डिपो निर्माण में मुख्य भवन का काम पूरा हो गया है। इसमें गेट व वायरिंग का काम बाकी रह गया है। कैंटीन, डीजल शेड और वर्कशाप का कार्य अधूरा पड़ा है। इसके निर्माण में हाइटेंशन लाइन बाधा बनी हुई है। लाइन हटने पर कार्यशाला का निर्माण किया जाएगा। जमीन में पत्थर और मिट्टी होने के कारण इसका रिवाइज एस्टीमेट भेजा गया है।
- हरीओम वर्मा, अवर अभियंता, परिवहन निगम डिपो
रिवाइज एस्टीमेट की स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य पूरा कराया जाएगा।
- रामलवट, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज डिपो, झांसी