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कीचड़ भरे रास्ते से निकलने को मजबूर हैं हरपुरावासी
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संपर्क रास्ते में भरा पानी।
- फोटो : LALITPUR
बिरधा। विकासखंड बिरधा के ग्राम पंचायत नीमखेरा के मजरा हरपुरा के निवासी कीचड़ भरे रास्ते से आने - जाने को मजबूर हैं। गांव तक पहुंचने के लिए अभी तक पक्का रास्ता नहीं बन सका है। इससे ग्रामीणों को बरसात के सीजन में आने - जाने में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गांव में यदि कोई बीमार हो जाता है, तो बरसात में बहुत परेशानी होती है। बिना ट्रैक्टर के आना - जाना संभव नहीं हो पाता है। जब चुनाव का मौसम आता है, तो नेता सड़क बनवाने का वायदा कर वोट हासिल कर लेते हैं, लेकिन चुनाव के बाद सब भूल जाते हैं। ब्लाक बिरधा से चार किलोमीटर दूर ग्राम हरपुरा ग्राम पंचायत नीमखेरा के अंतर्गत आता है। सभी सरकारें गांवों को सड़कों से जोड़ने की बात करती हैं, लेकिन ग्राम हरपुरा की ओर किसी का भी ध्यान नहीं है।
हमारे गांव आने - जाने के लिए अभी तक पक्का रास्ता नहीं बन सका है। ग्रामीण कच्चे रास्ते से ही होकर आते - जाते हैं। कोई अधिकारी गांव देखने की सुध नहीं ले रहा है। - मानसिंह लोधी
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ग्रामीणों को अभी तक पक्का रोड नसीब नहीं हो सका है। किसी को सामान लेने बिरधा या ललितपुर जाना होता है, तो बड़ी चुनौतियों के साथ कच्चा रास्ता तय करना पड़ता है। - भगवान सिंह यादव
हमारे गांव की जो पगडंडी है, वह पूरी तरह से खराब है। अगर गांव में किसी महिला या पुरुष को बिरधा के अस्पताल जाना पड़ता है, तो ट्रैक्टर के सहारे ही जा पाता है। गांव में एंबुलेंस व अन्य कोई वाहन नहीं पहुंच जाता है। - रामसहाय
ग्रामीण आज भी पुराने जमाने में अपना जीवन यापन कर रहे हैं। जब चुनाव आते हैं तो नेता गांव के चक्कर काटते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब भूल जाते हैं। - ब्रजभान सिंह राजपूत
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गांव में यदि कोई बीमार हो जाता है, तो बरसात में बहुत परेशानी होती है। बिना ट्रैक्टर के आना - जाना संभव नहीं हो पाता है। जब चुनाव का मौसम आता है, तो नेता सड़क बनवाने का वायदा कर वोट हासिल कर लेते हैं, लेकिन चुनाव के बाद सब भूल जाते हैं। ब्लाक बिरधा से चार किलोमीटर दूर ग्राम हरपुरा ग्राम पंचायत नीमखेरा के अंतर्गत आता है। सभी सरकारें गांवों को सड़कों से जोड़ने की बात करती हैं, लेकिन ग्राम हरपुरा की ओर किसी का भी ध्यान नहीं है।
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हमारे गांव आने - जाने के लिए अभी तक पक्का रास्ता नहीं बन सका है। ग्रामीण कच्चे रास्ते से ही होकर आते - जाते हैं। कोई अधिकारी गांव देखने की सुध नहीं ले रहा है। - मानसिंह लोधी
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ग्रामीणों को अभी तक पक्का रोड नसीब नहीं हो सका है। किसी को सामान लेने बिरधा या ललितपुर जाना होता है, तो बड़ी चुनौतियों के साथ कच्चा रास्ता तय करना पड़ता है। - भगवान सिंह यादव
हमारे गांव की जो पगडंडी है, वह पूरी तरह से खराब है। अगर गांव में किसी महिला या पुरुष को बिरधा के अस्पताल जाना पड़ता है, तो ट्रैक्टर के सहारे ही जा पाता है। गांव में एंबुलेंस व अन्य कोई वाहन नहीं पहुंच जाता है। - रामसहाय
ग्रामीण आज भी पुराने जमाने में अपना जीवन यापन कर रहे हैं। जब चुनाव आते हैं तो नेता गांव के चक्कर काटते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब भूल जाते हैं। - ब्रजभान सिंह राजपूत