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रेफर सेंटर बनकर रह गया जिला अस्पताल
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Mon, 03 Aug 2015 11:35 PM IST
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शासन के निर्देश हैं कि जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को सीधे रेफर नहीं किया जाए, बल्कि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को भर्ती करके प्राथमिक उपचार मुहैया कराया जाए। इसके बाद संबंधित डाक्टर को ऑन कॉल बुलाकर मरीज का इलाज कराया जाए। संबंधित डाक्टर के इलाज की प्रगति आख्या को दृष्टिगत रखते हुए आवश्यकता पड़ने पर ही मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाए, लेकिन जिला चिकित्सालय में शासन के यह दिशा- निर्देश हवा में उड़ाए जा रहे हैं। इमरजेंसी में मौजूद डाक्टर संबंधित विशेषज्ञों को कॉल भेजने के बजाय मोबाइल पर ही बात करके मरीज का इलाज शुरू कर देते हैं। फिर, हालत में सुधार न होने की बात कहकर मरीज को मेडिकल कालेज रेफर कर देते हैं। बाद में विशेषज्ञ रजिस्टर पर हस्ताक्षर करके ऑन कॉल पर आने की रस्म अदायगी कर लेते हैं। इन हालातों पर पर्दा डालने के लिए इमरजेंसी से रेफर होने वाले मरीजों का रिकार्ड भी नहीं रखा जा रहा है। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इमरजेंसी वार्ड के रिकार्ड के मुताबिक जनवरी - 2015 से अब तक महज एक दर्जन मरीजों को ही रेफर किए जाने की इंट्री की गई है। इमरजेंसी के इस ढर्रे का खामियाजा उन मरीजों और तीमारदारों को उठाना पड़ता है, जिनका इलाज स्थानीय स्तर पर ही संभव होने के बाद भी उन्हें मेडिकल कालेज झांसी या फिर अन्य महानगरों में भटकना पड़ता है।