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अधर में लटकी नवीन स्कूलों की मान्यता

Wed, 12 Apr 2017 12:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 12 Apr 2017 12:50 AM IST
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Recognition of new schools in limbo
Private school - फोटो : demo
निजी स्कूलों की मान्यता मानक पूरे नहीं होने से अधर में लटककर रह गई है। जिले में 30 स्कूलों ने बेसिक शिक्षा परिषद से मान्यता के लिए आवेदन किया है। इसके कारण ऐसे स्कूलों में नवीन प्रवेश आरंभ नहीं हो पा रहे हैं।
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बेसिक शिक्षा परिषद जूनियर स्तर की शिक्षा को आसान बनाने के मकसद से हर साल नवीन स्कूलों को मान्यता प्रदान करती है। वर्तमान शैक्षिक सत्र में 30 स्कूलों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है। इनमें 11 हिंदी और 19 अंग्रेजी माध्यम स्कूल हैं। लंबे समय से मान्यता देने की प्रक्रिया चल रही है लेकिन अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। इसकी वजह निजी स्कूल मान्यता की शर्तें पूरी नहीं कर पा रहे हैं। अधिकतर स्कूलों के भवन में कोई न कोई कमी रह गई है। जिस कारण खंड शिक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट उनके खिलाफ चल गई है। बीते दिनों झांसी में मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक नजरुद्दीन की अध्यक्षता में मान्यता समिति की बैठक हुई। इस दौरान स्कूलों की पत्रावली में तमाम कमियां पाई गई। नतीजतन मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक ने मान्यता संबंधी फाइल लौटा दी। इससे मान्यता के लिए इंतजार कर रहे प्रबंधकों में बेचैनी देखी जा रही है। इस संबंध में बीएसए संतोष कुमार राय का कहना है कि निजी स्कूलों को कमियां पूर्ण करने के लिए समय दिया गया है। उन्होंने शीघ्र ही नवीन स्कूलों को मान्यता दिए जाने की बात कही है।
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यह हैं मान्यता की शर्ते
विद्यालय के पास नेशनल बिल्डिंग कोड प्रमाण पत्र और अग्निशमन यंत्र मानक अनुसार स्थापित होना आवश्यक है। प्री प्राइमरी से प्राइमरी तक कक्षा कक्षों की संख्या सात, प्राइमरी में पांच, जूनियर हाईस्कूल में 10 कक्षा कक्ष होना चाहिए। संस्था के पास निजी भवन हो या किराए/लीज पर भवन होने की स्थिति में रजिस्टर्ड किरायानामा जरूरी है। विद्यालय में या विद्यालय के समीप क्रीड़ा स्थल हो, छात्र/छात्राओं के लिए कुर्सी, स्टूल, बैंच, मेज आदि हो।
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