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रैकिंग तय होते ही शहर फिर हुआ गंदा
amarujala
Updated Wed, 04 Jul 2018 01:41 AM IST
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gandgi, lalitpur news
- फोटो : amar ujala, lalitpur news
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शहर के स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग तय होते ही विभागीय अफसर सफाई के प्रति लापरवाह हो गए हैं। शहर में जगह-जगह कचरा नजर आने लगा है। ऐसा ही नजारा मंगलवार को नगर पालिका कार्यालय के बाहर व कचहरी चौराहे पर देखने को मिला। शहर की हृदय स्थली कहे जाने वाले घंटाघर के नीचे सड़क पर कचरा पड़ा था तो कचहरी चौराहे की नालियों का भी यही हाल रहा। इससे स्पष्ट है कि शहर की सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
नगर पालिका परिषद शहर की सफाई पर हर साल करीब एक करोड़ व्यय कर रही है। इसके बाद भी शहर साफ-सुथरा नहीं बन पा रहा है। अब मुख्य मार्गों पर ही कचरा नजर आने लगा है। हद तो तब हो गई जब मंगलवार को सुबह साढ़े दस बजे तक घंटाघर स्थित पालिका कार्यालय के बाहर यूं ही कचरे का ढेर लगा रहा। इससे चंद कदम की दूरी पर विभिन्न वार्डों के कई सभासद आपस में गपशप करते रहे लेकिन किसी ने सफाई निरीक्षक को फोन लगाना उचित नहीं समझा। यही नहीं, शहर के कई संभ्रांत नागरिक भी यहां गुजरे लेकिन वह चुपचाप निकल गए। इसके बाद जो ठेला पर कारोबार करने आए, वह भी अपनी दुकानदारी में व्यस्त हो गए।
इस तरह घंटाघर के पास कई घंटों कचरा पड़ा। ऐसा ही हाल कचहरी चौराहे का है। यहां की निकली नालियों में कचरा फंसा हुआ है, जिसे अभी तक नहीं हटाया गया है। कलक्ट्रेट की चहारदीवारी से लगा हुआ एक मूत्रालय है, जिसकी भी लंबे समय से सफाई नहीं हुई है जबकि इसी चौराहे से लगा हुआ कलक्ट्रेट कार्यालय है। जिसमें करीब आधा दर्जन प्रशासनिक अधिकारी बैठते हैं। यह अकेले दो ही स्थान नहीं हैं, शहर के विभिन्न वार्डों में इस तरह गंदगी पड़ी हुई है। जिस पर विभागीय अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिससे सफाई कर्मियों ने सफाई में लापरवाही बरतना आरंभ कर दिया है।
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तय करेंगे लापरवाही
शहर में गंदगी फैलने की जानकारी नहीं है। यदि घंटाघर के नीचे कचरा पड़ा रहा है तो यह गंभीर बात है कि इसकी जांच कराकर लापरवाही तय की जाएगी।
अवनींद्र कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद
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नगर पालिका परिषद शहर की सफाई पर हर साल करीब एक करोड़ व्यय कर रही है। इसके बाद भी शहर साफ-सुथरा नहीं बन पा रहा है। अब मुख्य मार्गों पर ही कचरा नजर आने लगा है। हद तो तब हो गई जब मंगलवार को सुबह साढ़े दस बजे तक घंटाघर स्थित पालिका कार्यालय के बाहर यूं ही कचरे का ढेर लगा रहा। इससे चंद कदम की दूरी पर विभिन्न वार्डों के कई सभासद आपस में गपशप करते रहे लेकिन किसी ने सफाई निरीक्षक को फोन लगाना उचित नहीं समझा। यही नहीं, शहर के कई संभ्रांत नागरिक भी यहां गुजरे लेकिन वह चुपचाप निकल गए। इसके बाद जो ठेला पर कारोबार करने आए, वह भी अपनी दुकानदारी में व्यस्त हो गए।
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इस तरह घंटाघर के पास कई घंटों कचरा पड़ा। ऐसा ही हाल कचहरी चौराहे का है। यहां की निकली नालियों में कचरा फंसा हुआ है, जिसे अभी तक नहीं हटाया गया है। कलक्ट्रेट की चहारदीवारी से लगा हुआ एक मूत्रालय है, जिसकी भी लंबे समय से सफाई नहीं हुई है जबकि इसी चौराहे से लगा हुआ कलक्ट्रेट कार्यालय है। जिसमें करीब आधा दर्जन प्रशासनिक अधिकारी बैठते हैं। यह अकेले दो ही स्थान नहीं हैं, शहर के विभिन्न वार्डों में इस तरह गंदगी पड़ी हुई है। जिस पर विभागीय अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिससे सफाई कर्मियों ने सफाई में लापरवाही बरतना आरंभ कर दिया है।
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तय करेंगे लापरवाही
शहर में गंदगी फैलने की जानकारी नहीं है। यदि घंटाघर के नीचे कचरा पड़ा रहा है तो यह गंभीर बात है कि इसकी जांच कराकर लापरवाही तय की जाएगी।
अवनींद्र कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद