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धनुष भंग लीला के साथ राम-जानकी विवाह सम्पन्न
lalitpur
Updated Mon, 15 Oct 2018 12:57 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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बानपुर। कस्बा बानपुर में बजरंग गढ़ रामलीला मंडल की ओर से चल रहे मंचन के तीसरे दिन धनुष भंग, रावण-वाणासुर संवाद और परशुराम-लक्ष्मण संवाद को काफी रोचक व मनमोहक तरीके से पेश किया गया।
लीला के प्रथम दृश्य में राजा - जनक सीता के स्वयंवर का निमन्त्रण देश- देश के राजाओं को भेजते हैं। इसी बीच रावण व वाणासुर को आकाशवाणी होती है कि जनकपुर में सीता जी का स्वयंवर हो रहा है अत: आप वहां पहुंचें । उपरान्त राम - लक्ष्मण अपने गुरु के साथ स्वयंवर में पहुंचते हैं। राजाजन धनुष उठाने का प्रयास करते हैं। इसके बाद रावण-वाणासुर संवाद आरंभ होता है। इसके बाद राम गुरु का आशीर्वाद लेकर धनुष की ओर बढ़ते हैं। दूसरे दृश्य में ऋषि परशुराम को सूचना होतीे है कि धनुष टूट गया है । बह स्वयंवर सभा में प्रवेश करते हैं व भारी कठोर वचनों से धनुष तोड़ने वाले व राजा जनक को सम्बोधित करते हैं। इतना सुनकर लक्ष्मण जी भी क्रोधित हो जाते हैं व परशुराम जी से उनकी शैली में संवाद स्थापित करते हैं जब इस चर्चा का कोई अंत नहीं दिखता तब राम अपने अनुज को शांत करते हैं व स्वयं परशुराम जी से संवाद करते हैं व अपने मधुर वचनों , शांत शैली व शिष्टाचार स्वभाव से परशुराम जी का दिल जीत लेते हैं। तब परशुराम जी राम से निवेदन करते हैं कि हे राम मैं आपको पहचानने में असमर्थ हूं इसलिए आप मेरे धनुष की प्रत्यंजा चढ़ाकर मेरा शंशय मिटाईये । तब राम उनका शंशय मिटा देते हैं। इस दौरान रामलीला मंडल अध्यक्ष राजनारायण रावत, जय किशोर श्रीवास्तव, सहावेन्द्र प्रताप सिंह, ओमप्रकाश पुष्पकार, रामपाल सिंह गहरवार, रामप्रताप सिंह, डा0 ध्रुबपाल सिंह, आशीष रावत, बृजेश चौबे, कृष्ण अवतार सिंह परमार, मनोज पुष्पकार, घनेन्द्र सिंह, राहुल राजा, डा. प्रदीप दीक्षित, नृपेन्द्र सिंह मौजूद रहे।
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लीला के प्रथम दृश्य में राजा - जनक सीता के स्वयंवर का निमन्त्रण देश- देश के राजाओं को भेजते हैं। इसी बीच रावण व वाणासुर को आकाशवाणी होती है कि जनकपुर में सीता जी का स्वयंवर हो रहा है अत: आप वहां पहुंचें । उपरान्त राम - लक्ष्मण अपने गुरु के साथ स्वयंवर में पहुंचते हैं। राजाजन धनुष उठाने का प्रयास करते हैं। इसके बाद रावण-वाणासुर संवाद आरंभ होता है। इसके बाद राम गुरु का आशीर्वाद लेकर धनुष की ओर बढ़ते हैं। दूसरे दृश्य में ऋषि परशुराम को सूचना होतीे है कि धनुष टूट गया है । बह स्वयंवर सभा में प्रवेश करते हैं व भारी कठोर वचनों से धनुष तोड़ने वाले व राजा जनक को सम्बोधित करते हैं। इतना सुनकर लक्ष्मण जी भी क्रोधित हो जाते हैं व परशुराम जी से उनकी शैली में संवाद स्थापित करते हैं जब इस चर्चा का कोई अंत नहीं दिखता तब राम अपने अनुज को शांत करते हैं व स्वयं परशुराम जी से संवाद करते हैं व अपने मधुर वचनों , शांत शैली व शिष्टाचार स्वभाव से परशुराम जी का दिल जीत लेते हैं। तब परशुराम जी राम से निवेदन करते हैं कि हे राम मैं आपको पहचानने में असमर्थ हूं इसलिए आप मेरे धनुष की प्रत्यंजा चढ़ाकर मेरा शंशय मिटाईये । तब राम उनका शंशय मिटा देते हैं। इस दौरान रामलीला मंडल अध्यक्ष राजनारायण रावत, जय किशोर श्रीवास्तव, सहावेन्द्र प्रताप सिंह, ओमप्रकाश पुष्पकार, रामपाल सिंह गहरवार, रामप्रताप सिंह, डा0 ध्रुबपाल सिंह, आशीष रावत, बृजेश चौबे, कृष्ण अवतार सिंह परमार, मनोज पुष्पकार, घनेन्द्र सिंह, राहुल राजा, डा. प्रदीप दीक्षित, नृपेन्द्र सिंह मौजूद रहे।
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