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रमजान का मुकद्दस महीना शुरू, लोगों ने पढ़ी तरावीह
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सदन शाह मस्जिद।
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। रमजान का मुकद्दस महीना शुरू हो गया है। मंगलवार को इशा की नमाज के बाद तरावीह पढ़ी गई। कोरोना गाइड लाइन की वजह से मस्जिदों में कम ही लोगों ने तरावीह पढ़ी। तमाम लोगों ने घरों में ही तरावीह पढ़ी। बुधवार को पहला रोजा रखकर रोजेदार इफ्तार में अल्लाह से कोरोना के खात्मे और सभी को बीमारी से महफूज रखने की दुआ मांगेंगे। रमजान के महीने में इफ्तार के वक्त मांगी गई दुआ अल्लाह जरूर कुबूल करता है।
मंगलवार को लोगों ने एक दूसरे को रमजान की मुबारकबाद भी दी। लोगों ने इफ्तार और सहरी के लिए खरीदारी भी की। इस महीने में मुस्लिम इलाकों में रौनक काफी बढ़ जाती है लेकिन दो साल से लॉकडाउन की वजह से लोगों को रात में घरों में ही इबादत करनी पड़ रही है। रमजान माह में की गई इबादत, किसी के साथ किए गए किसी भी नेेकी के बदले अल्लाह उसका 70 गुना सवाब देता है।
रमजान माह को लेकर बच्चों में उत्साह दिखाई दिया। बड़ों की तरह वे भी खुदा की इबारत पूरी तैयारी के साथ करते हैं। सुबह फज्र की नमाज के लिए वह खुशी के साथ उठते हैं और मस्जिद की तरफ उत्साह से जाते हैं हालांकि उनमें रोजा रखने की उम्र करीब 14 साल से मानी जाती है।
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दान देने का भी सवाब
इस माह दान देने का भी अलग महत्व है। किसी को एक रुपया भी दिया गया तो अल्लाह उसका 70 गुना फायदा देता है। यह भी कहा गया है कि ऐसे लोगों को दान दिया जाए जो गरीब और जरूरतमंद हों। इस धन से वो भी रोजा रख कर अच्छी चीजें खाएं और इस पर्व को अच्छी तरह से खुशी के साथ मनाएं।
ये महीना यतीम, बेवाओं, गरीबों के दिल जीतने का महीना है। उनकी देख भाल करें। उन्हें खिलाएं। अपने नबी की सुन्नत पर अमल करें। मुहम्मद इकरामुद्दीन बरकाती, इमाम, सदन शाह मस्जिद।
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मंगलवार को लोगों ने एक दूसरे को रमजान की मुबारकबाद भी दी। लोगों ने इफ्तार और सहरी के लिए खरीदारी भी की। इस महीने में मुस्लिम इलाकों में रौनक काफी बढ़ जाती है लेकिन दो साल से लॉकडाउन की वजह से लोगों को रात में घरों में ही इबादत करनी पड़ रही है। रमजान माह में की गई इबादत, किसी के साथ किए गए किसी भी नेेकी के बदले अल्लाह उसका 70 गुना सवाब देता है।
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रमजान माह को लेकर बच्चों में उत्साह दिखाई दिया। बड़ों की तरह वे भी खुदा की इबारत पूरी तैयारी के साथ करते हैं। सुबह फज्र की नमाज के लिए वह खुशी के साथ उठते हैं और मस्जिद की तरफ उत्साह से जाते हैं हालांकि उनमें रोजा रखने की उम्र करीब 14 साल से मानी जाती है।
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दान देने का भी सवाब
इस माह दान देने का भी अलग महत्व है। किसी को एक रुपया भी दिया गया तो अल्लाह उसका 70 गुना फायदा देता है। यह भी कहा गया है कि ऐसे लोगों को दान दिया जाए जो गरीब और जरूरतमंद हों। इस धन से वो भी रोजा रख कर अच्छी चीजें खाएं और इस पर्व को अच्छी तरह से खुशी के साथ मनाएं।
ये महीना यतीम, बेवाओं, गरीबों के दिल जीतने का महीना है। उनकी देख भाल करें। उन्हें खिलाएं। अपने नबी की सुन्नत पर अमल करें। मुहम्मद इकरामुद्दीन बरकाती, इमाम, सदन शाह मस्जिद।